कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई ने आरोप लगाया है कि उसके पूर्व विधायक राहुल बोंद्रे पर सत्तारूढ़ भाजपा में शामिल होने का दबाव बनाया गया था। पार्टी ने दावा किया कि जब विधायक ने पाला नहीं बदलने का फैसला किया तो उनके शैक्षणिक संस्थान के संबंध में पुलिस की ओर से नोटिस भेजकर उन्हें निशाना बनाया जा रहा था। विपक्षी दल ने रविवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने बोंद्रे को व्यक्तिगत रूप से फोन किया, उन्हें समर्थन का आश्वासन दिया और बिना किसी डर के लड़ने की सलाह दी।
पार्टी के अनुसार, इसके बाद बोंद्रे ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल नहीं होने का फैसला किया। कांग्रेस ने कहा कि वह विदर्भ क्षेत्र के बुलढाणा जिले के चिखली से पूर्व विधायक बोंद्रे के साथ मजबूती से खड़ी है और अन्याय, दमन तथा दबाव की राजनीति के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेगी। पार्टी ने चिखली स्थित बोंद्रे के शैक्षणिक संस्थान के संबंध में उन्हें हाल ही में जारी किए गए पुलिस नोटिस की एक प्रति भी पोस्ट की।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा बोंद्रे को इसलिए नोटिस जारी कर रही थी, क्योंकि उन्होंने अपनी राजनीतिक लड़ाई जारी रखने का फैसला किया था। पार्टी ने जोर देकर कहा, “राहुल बोंद्रे न तो डरेंगे और न ही दबाव के आगे झुकेंगे। वह अपना संघर्ष नहीं रोकेंगे।”
इससे पहले, बोंद्रे ने 22 सितंबर को राहुल गांधी से फोन पर बातचीत के बाद भाजपा में शामिल होने की अपनी योजना छोड़ दी थी।
उन्होंने कहा था कि वह मुश्किलों का सामना करने के बावजूद कांग्रेस के लिए काम करना जारी रखेंगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के साथ मिलकर लड़ाई लड़ेंगे। कांग्रेस नेताओं विजय वडेट्टीवार और यशोमती ठाकुर ने तब आरोप लगाया था कि बोंद्रे पर दबाव बनाया जा रहा है और उनके खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं।

