महाकुंभ से सीखा, माघ मेले में लागू किया:आने-जाने के लिए पुल और रास्ते पहले से तय; संगम पर एक्स्ट्रा बैरिकेडिंग नहीं

महाकुंभ से सीखा, माघ मेले में लागू किया:आने-जाने के लिए पुल और रास्ते पहले से तय; संगम पर एक्स्ट्रा बैरिकेडिंग नहीं

‘महाकुंभ 2025 में आए थे तो बहुत भीड़ थी। खड़े होने की जगह नहीं थी। सही से घाट तक पहुंच नहीं पाए। अब फिर से आए हैं, तो सहूलियत नजर आ रही। शांत स्थिति है। बहुत चलना नहीं पड़ा।’ ये शब्द माघ मेले में आए अभय मिश्रा के हैं। ऐसे ही तमाम और लोग हैं, जो कुंभ में आए थे और अब माघ मेले में भी आए हैं। मौजूदा व्यवस्था को देखकर कहते हैं कि अब सही है। असल में प्रशासन ने महाकुंभ से कुछ सीख लेकर माघ मेले में लागू किया। इसका असर यह हुआ कि मेले में आने वाले लोगों को सहूलियत मिल गई। आज उन्हीं बदलाव की बात कहते हैं। एरिया घटा, स्थिर व्यवस्था पर ज्यादा जोर
प्रयागराज में 3 जनवरी से माघ मेले की शुरुआत हो गई। पहले दिन पौष पूर्णिमा के स्नान पर्व पर करीब 30 लाख लोगों ने संगम में स्नान किया। संगम पर लगा यह मेला 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के स्नान के साथ पूरा होगा। पिछले साल संगम तट पर महाकुंभ का आयोजन हुआ था। जो लोग उस मेले में आए थे, उनके मन में यह बात बस गई है कि इस बार भी उसी तरह से भीड़-भाड़ और जाम की स्थिति होगी। जो लोग इस भ्रम को तोड़कर दोबारा आ रहे, वह पहले से सोची हुई चीज से अलग स्थिति देख रहे हैं। माघ मेला इस बार 800 हेक्टेयर एरिया में लगा है। पिछले साल महाकुंभ इसके पांच गुना ज्यादा 4 हजार हेक्टेयर एरिया में लगा था। उसी हिसाब से सारी व्यवस्था थी। हालांकि, भीड़ के चलते कई जगहों पर अव्यवस्था फैल गई थी। इस बार मेला प्रशासन का पूरा फोकस व्यवस्थित मेला आयोजन करवाने पर है। इसलिए पहले से ही नियम को मेनटेन करके चल रहे हैं। पांटून पुल पर आने-जाने का रास्ता पहले से तय
माघ मेले में इस बार कुल 9 पांटून पुल बनाए गए हैं। पहले तो सिर्फ 7 ही तय थे। 20 दिसंबर को फैसला लिया गया कि दो पुल फाफामऊ में बनाए जाएंगे। क्योंकि अगर ऐसा नहीं होता तो लखनऊ-अयोध्या की तरफ से आने वाले श्रद्धालु फाफामऊ पुल पर जाम में फंस सकते थे। इसलिए रिकॉर्ड 10 दिन में दो और पुल बना दिए गए। एक पुल 250 मीटर का है और दूसरा 300 मीटर का है। महाकुंभ में कुल 30 पांटून पुल बनाए गए थे। यह पहला मौका था, जब संगम पर इतने सारे पुल बनाए गए थे। सारे पुल गंगा नदी पर बनाए गए थे। शुरुआत में यह तय किया गया कि कुछ पुल आने और कुछ जाने के लिए हैं। लेकिन जैसे ही मेले में भीड़ बढ़ी, पांटून पुलों को बंद कर दिया गया। कई बार तो स्थिति ऐसी हुई कि लोग पांटून पुल से नदी की दूसरी तरफ गए, लौटने का सोचा तो पुल ही बंद मिला। इससे लोग परेशान हो गए। ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों से कहासुनी हो गई। माघ मेले में पांटून पुलों की स्थिति पहले से ही क्लियर है। 1, 3 और 5 संगम एरिया से झूंसी साइड जाने के लिए है। 2, 4, 6 उधर से संगम एरिया में आने के लिए हैं। एक पुल को पीडब्ल्यूडी विभाग ने रिजर्व रखा है। पहले स्नान से लेकर अब तक पांटून पुलों की यही स्थिति है। अब तक न रूट बदला गया और न ही बंद करने की स्थिति बनी। मौके पर तैनात पुलिसकर्मी भी कहते हैं, चीजें क्लियर रहती हैं तो जनता को सहूलियत मिलती है। संगम पर इस बार बैरिकेडिंग नहीं
माघ मेले में आने वाले लगभग सभी श्रद्धालु संगम के तट पर ही स्नान करना चाहते हैं। इसलिए वहां लगातार भीड़ रहती है। महाकुंभ में कई स्तर पर बैरिकेडिंग थी। ये बैरिकेडिंग भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बनाई गई थी। संगम के 30% हिस्से को साधु-संतो के स्नान के लिए आरक्षित कर दिया गया था। संगम पर ही पहुंचने के लिए लोगों को 1 किलोमीटर तक में घुमा दिया गया। ऐसा इसलिए, क्योंकि भीड़ बहुत ज्यादा थी। जो बैरिकेडिंग लगाई गई थी, उसमें जाली लगा दी गई थी, ताकि कोई इधर-उधर से भी न जाए पाए। मौनी अमावस्या जब भीड़ बढ़ी तो इसी बैरिकेडिंग में फंस गई थी। माघ मेले में स्थिति एकदम अलग नजर आती है। इस बार संगम पर किसी तरह की बैरिकेडिंग नहीं लगाई गई है। सुरक्षा की दृष्टि से हर तरफ पुलिसकर्मियों की तैनाती है। पुलिस के ही एक अफसर कहते हैं, हमारी ड्यूटी यहीं संगम पर है। अगर भीड़ बढ़ती है तो इसे नियंत्रित करने के लिए रस्से के जरिए दूसरी तरफ डायवर्ट किया जाएगा। अभी जो स्थिति है, उसमें इस चीज की जरूरत नहीं है। टॉवर बनाए गए हैं, उसके ऊपर से निगरानी की जा रही। वीआईपी मूवमेंट और प्रोटोकॉल पर रोक
माघ मेले में प्रमुख स्नान पर्व पर वीआईपी मूवमेंट और प्रोटोकॉल जैसी स्थिति नहीं होगी। सीएम योगी के निर्देश पर इसे पूरी तरह से रोक दिया गया है। अन्य दिनों में भी अगर कोई वीआईपी आता है तो उसके लिए रास्ते को पूरी तरह से बंद नहीं किया जाएगा। 10 जनवरी को स्वयं सीएम योगी मेले में आए थे। वह जिन रूट्स से निकलने वाले थे, 10 मिनट पहले खाली करवाया गया। उनके जाते ही फिर से रास्ता श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया। महाकुंभ में ऐसी स्थिति नहीं थी। हर दिन वीआईपी मूवमेंट रहता था। संगम एरिया के आधे हिस्से को लगातार बंद करने की नौबत आ गई। लेटे हुए हनुमान मंदिर पर भी यही स्थिति रहती। मंदिर की तरफ से कहा जाता कि दर्शन शाम को होंगे या फिर आज नहीं होंगे। श्रद्धालु निराश हो जाते थे। ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर भी कन्फ्यूजन रहता था। जिस रास्ते को जाने के लिए बनाया गया था, उसे ही बंद कर दिया जाता था, भीड़ इसकी वजह होती थी। इस बार जिन रास्तों को जिस लिए तय किया गया है, वह लगातार उसी तरह से चल रहे हैं। हनुमान मंदिर पर एक ही गेट से एंट्री और एग्जिट
माघ मेले में आए श्रद्धालु पहले संगम स्नान करते हैं और फिर किले के पास मौजूद लेटे हुए हनुमान मंदिर में दर्शन करते हैं। यही यहां की परंपरा रही है। इस बार किले की तरफ से ही श्रद्धालु मंदिर के अंदर जा रहे हैं और इसी के बगल बने रास्ते से वह बाहर आ रहे हैं। श्रद्धालुओं के साथ जो लोग मौजूद हैं, वो मंदिर के ही बाहर उनका इंतजार करते रहते हैं। महाकुंभ में स्थिति इसके उलट थी। किले की तरफ से एंट्री होती, दूसरी तरफ से निकाला जाता था। इसके बाद श्रद्धालु पीछे वाले गेट की तरफ आते थे, क्योंकि यहां सामान और जूते-चप्पल पड़े होते थे। उसे यहां तक आने में काफी मशक्कत करनी पड़ती थी। भीड़ के चलते आने से रोका भी जाता था। इस चक्कर में लोग अपनों से बिछड़ जाते थे। बाघंबरी गद्दी के प्रमुख बलबीर गिरी ने पिछली बार ही कहा था कि हम इस व्यवस्था से खुश नहीं हैं। उन्होंने ही इस बार एंट्री-एग्जिट एक तरफ से करवाया है। प्रयागराज जाने वाले सभी रास्तों के छोटे कट बंद हुए
महाकुंभ में न सिर्फ मेले के अंदर, बल्कि मेले के बाहर भी ट्रैफिक व्यवस्था एकदम चरमरा गई थी। 100 से 200 किलोमीटर तक जाम की स्थिति बन गई। लोगों से अपील की जाने लगी कि वापस घर चले जाएं। कुछ दिन के बाद महाकुंभ में आएं। प्रदेश के दर्जनों तेज-तर्रार आईपीएस अधिकारियों को ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने में लगाया गया था। यह सब इसलिए हुआ, क्योंकि अनुमान से कहीं अधिक लोग मेले में शामिल होने के लिए आ गए। कुंभ से सीख लेते हुए माघ मेले में ट्रैफिक व्यवस्था के लिए अलग व्यवस्था की गई है। शहर में प्रवेश से 25-25 किलोमीटर पहले ही हाईवे पर जो छोटे-छोटे कट थे, उन्हें बंद कर दिया गया है। मुख्य चौराहों पर ही जो कट हैं, वो खोले गए हैं। ट्रैफिक से जुड़े अफसर कहते हैं, ऐसा इसलिए किया गया है ताकि कोई कहीं से भी उल्टे रास्ते से न आए। इससे जाम की समस्या तो होती ही है, दुर्घटना की भी स्थिति बनती है। इस स्थिति से निपटने के लिए कट को बंद किया गया है। ट्रैफिक के लिए 4 इंस्पेक्टर, 38 दरोगा, 381 ट्रैफिक पुलिस जवान, 1088 होमगार्ड तैनात हैं। मेले के हर हिस्से में पुलिस तैनात
माघ मेले में सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त रखा गया है। 7 अपर पुलिस अधीक्षक, 14 सीओ, 29 इंस्पेक्टर, 221 दरोगा, 15 महिला दरोगा, 1593 सिपाही, 136 महिला सिपाही तैनात हैं। इसके अलावा पीएसी की 7 कंपनियां, 4 आरएएफ कंपनियां, दो एनडीआरएफ, एक एसडीआरएफ की टीमें तैनात हैं। इन सबके इतर 78 एलआईयू कर्मी, एटीएस की दो टीमें, बीडीडीएस की 6 टीमें मेले की आतंरिक सुरक्षा के लिए तैनात हैं। ——————— यह खबर भी पढ़ें… हर्षा रिछारिया भाई के साथ माघ मेला पहुंचीं, संगम में 200 फीट ऊंचाई पर पैराग्लाइडिंग महाकुंभ से चर्चा में आईं हर्षा रिछारिया अपने भाई के साथ माघ मेले में आई हैं। हर्षा ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया। इसमें लिखा है- सब मांगने नहीं आते, कुछ बस भरोसा छोड़ जाते हैं गंगा किनारे। समय पक्ष में हो या विपक्ष में… स्वाभिमान से समझौता नहीं। पढ़ें पूरी खबर

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