डीडवाना। जिला मुख्यालय पर पुलिस और अधिवक्ताओं के बीच विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। वरिष्ठ अधिवक्ता के साथ थाने में कथित अभद्रता और पुलिस अधीक्षक की कथित उदासीनता के विरोध में डीडवाना बार संघ ने अनिश्चितकालीन कार्य स्थगन का ऐलान किया है। आंदोलन के दूसरे दिन गुरुवार को अधिवक्ताओं ने उग्र प्रदर्शन करते हुए कोर्ट परिसर से बस स्टैंड तक रैली निकाली और विरोध जताया।
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गौरतलब है कि विवाद डीडवाना थाने के थानाधिकारी की ओर से एक वरिष्ठ अधिवक्ता के साथ किए गए कथित दुर्व्यवहार से जुड़ा है। एडवोकेट जयप्रकाश भाकर ने बताया कि बार संघ अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता हकीम खान एक मामले में परिवादी के रूप में अपनी बात रखने थाने गए थे, जहां थानाधिकारी ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया। इस घटना की जानकारी मिलते ही वकीलों में आक्रोश फैल गया।
अधिवक्ताओं का आरोप है कि जब वे इस मामले की शिकायत लेकर पुलिस अधीक्षक के पास पहुंचे तो घंटों इंतजार के बावजूद कोई अधिकारी उनकी बात सुनने नहीं आया। प्रशासन के इस कथित अड़ियल रवैये से नाराज वकीलों ने मौके पर ही ज्ञापन की प्रति जला दी और कार्य बहिष्कार का निर्णय लिया। बार संघ के बैनर तले बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने कोर्ट परिसर के बाहर धरना दिया। इसके बाद एक आक्रोश रैली निकाली गई, जो शहर के मुख्य बस स्टैंड से होते हुए पुनः कोर्ट परिसर पहुंची। यहां अधिवक्ताओं ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
झुकेंगे नहीं, मांग मनवाकर रहेंगे
बार संघ अध्यक्ष हकीम खान और वरिष्ठ अधिवक्ता संतोष जाजू ने कहा कि जब तक थानाधिकारी को निलंबित नहीं किया जाता और जिला पुलिस अधीक्षक का तबादला नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि पूरा राजस्थान बार उनके साथ खड़ा है।
राज्यव्यापी आंदोलन की आहट
डीडवाना के इस आंदोलन को अब आसपास के क्षेत्रों का भी समर्थन मिल रहा है। लाडनूं, कुचामन, नावां और मकराना के बार एसोसिएशन इस आंदोलन में शामिल हो गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए जयपुर और जोधपुर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन को भी अवगत कराया गया है। अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो पूरे प्रदेश के वकील सड़कों पर उतरेंगे।
थानाधिकारी व एसपी के खिलाफ कोर्ट में परिवाद
वरिष्ठ अधिवक्ता हकीम खान के नेतृत्व में जिला बार संघ के वकीलों ने थानाधिकारी राजेंद्र सिंह और जिला पुलिस अधीक्षक ऋचा तोमर के खिलाफ मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय में परिवाद दायर किया है। कोर्ट ने महानिरीक्षक, अजमेर को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अगली सुनवाई 23 अप्रेल को तय की है। अधिवक्ताओं का आरोप है कि पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली संतोषजनक नहीं है, जिसके कारण उन्हें न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।


