कानपुर नगर में प्राचीन ज्ञान परंपरा को संरक्षित करने के लिए प्रशासन ने ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के तहत एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। इसके अंतर्गत जनपद के मंदिरों, मठों, आश्रमों, पुस्तकालयों, संस्कृत पाठशालाओं, शिक्षण संस्थानों और निजी संग्रहों में मौजूद दुर्लभ पांडुलिपियों का सर्वेक्षण, दस्तावेजीकरण और डिजिटलीकरण किया जाएगा। इस संबंध में गुरुवार को जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट स्थित समाधान कक्ष में जनपद स्तरीय समिति की बैठक हुई। इस बैठक में अधिकारियों ने बताया कि जनपद में भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ी बहुमूल्य पांडुलिपियां कई स्थानों पर संरक्षित हैं। इनमें धर्म, दर्शन, आयुर्वेद, ज्योतिष, इतिहास, साहित्य और संस्कृति से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां निहित हैं। इन पांडुलिपियों के नष्ट होने या क्षतिग्रस्त होने की आशंका को देखते हुए, इन्हें डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित रखने का निर्णय लिया गया है। इस अभियान के तहत ‘ज्ञान भारतम् मोबाइल ऐप’ का उपयोग किया जाएगा। सर्वेक्षण दल ऐप के माध्यम से विभिन्न स्थानों पर मौजूद पांडुलिपियों की पहचान करेगा और उनकी संख्या, वर्तमान स्थिति, स्थल के फोटोग्राफ तथा जीपीएस लोकेशन सहित पूरी जानकारी अपलोड करेगा। इसके उपरांत, संस्कृति विभाग की विशेषज्ञ टीम इन पांडुलिपियों का परीक्षण कर उनका डिजिटलीकरण करेगी। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि यह पहल केवल प्राचीन दस्तावेजों को सुरक्षित रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का भी माध्यम बनेगी। उन्होंने बताया कि डिजिटलीकरण के बाद इन पांडुलिपियों का लाभ देश-विदेश के शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और अध्येताओं को मिल सकेगा। बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि पांडुलिपियों का स्वामित्व उनके मूल संग्रहकर्ताओं के पास ही रहेगा। प्रशासन और संस्कृति विभाग केवल उनके संरक्षण, दस्तावेजीकरण और डिजिटलीकरण का कार्य करेंगे। इस दौरान मुख्य विकास अधिकारी दीक्षा जैन, पर्यटन अधिकारी अर्जिता ओझा, एडीआईओएस प्रशांत द्विवेदी और धर्मप्रकाश गुप्ता सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं समिति सदस्य उपस्थित रहे।


