रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल एवं दूरसंचार इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स ने वित्त वर्ष 2030-31 तक देश की अनुमानित 1,400 अरब डॉलर की डिजिटल अर्थव्यवस्था में बड़ी हिस्सेदारी हासिल करने का लक्ष्य रखा है। कंपनी को अपने 53.33 करोड़ ग्राहकों, 5जी नेटवर्क के विस्तार और प्रौद्योगिकी क्षमताओं के दम पर इस वृद्धि की उम्मीद है। अगले सप्ताह अपना आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) लाने जा रही जियो प्लेटफॉर्म्स के प्रबंध निदेशक आकाश अंबानी ने कहा कि जियो देश के वायरलेस डेटा ट्रैफिक का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा संभालती है और उसने भारत का सबसे बड़ा डिजिटल कनेक्टिविटी कारोबार खड़ा किया है।
अंबानी ने कंपनी की वृद्धि रणनीति का ब्योरा देते हुए कहा, “हमें वित्त वर्ष 2030-31 तक देश में 1,400 अरब डॉलर की डिजिटल अर्थव्यवस्था बनने की उम्मीद है। हम इसमें बड़ी बाजार हिस्सेदारी हासिल करेंगे।”
उन्होंने कहा कि कंपनी मोबाइल कनेक्टिविटी, घरेलू ब्रॉडबैंड और उद्यम सेवाओं के क्षेत्र में वृद्धि के अवसरों का लाभ उठाने पर ध्यान दे रही है। अंबानी ने कहा कि जून, 2026 तक जियो के ग्राहकों की संख्या 53.33 करोड़ थी, जिनमें 28.5 करोड़ 5जी ग्राहक थे।
इसके साथ कंपनी चीन के बाहर सबसे बड़ा 5जी ग्राहक आधार रखने वाली दूरसंचार कंपनी बन गई। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में प्रति ग्राहक औसत मासिक डेटा खपत 43.7 जीबी रही। कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 में 76,225 करोड़ रुपये कर पूर्व लाभ (ईबीआईटीडीए) दर्ज किया।
वित्त वर्ष 2023-24 से 2025-26 के बीच इसमें 17.8 प्रतिशत की संचयी वार्षिक वृद्धि दर रही। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कंपनी का ईबीआईटीडीए मार्जिन 53.3 प्रतिशत था। अंबानी ने कंपनी की रणनीति को प्रौद्योगिकी, डिजिटल कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे पर आधारित बताते हुए कहा कि वृद्धि के तीन प्रमुख कारक मोबाइल सेवाएं, घरेलू ब्रॉडबैंड तथा उद्यम एवं अंतरराष्ट्रीय सेवाएं हैं।
उन्होंने कहा कि कंपनी का संपूर्ण प्रौद्योगिकी ढांचा इस रणनीति का अहम हिस्सा है। जियो के नेटवर्क में 3,60,537 दूरसंचार टावर और 26,800 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम शामिल हैं। मोबाइल सेवाओं के क्षेत्र में जियो को वित्त वर्ष 2025-26 से 2030-31 के बीच 4जी एवं 5जी ग्राहकों की संख्या में 34 करोड़ की वृद्धि होने की उम्मीद है।
इससे प्रति उपयोगकर्ता औसत राजस्व (एआरपीयू) बढ़ाने के अवसर मिलेंगे। घरेलू ब्रॉडबैंड भी कंपनी की वृद्धि रणनीति का अहम हिस्सा है। वित्त वर्ष 2025-26 में जियो के फिक्स्ड ब्रॉडबैंड ग्राहकों की संख्या 2.86 करोड़ थी।
इस दौरान फिक्स्ड ब्रॉडबैंड के नए ग्राहकों में कंपनी की हिस्सेदारी 67.5 प्रतिशत रही। उद्यम सेवाओं के क्षेत्र में कंपनी डिजिटल सेवाओं के लिए भारत के अनुमानित 5.1 लाख करोड़ रुपये के संभावित बाजार को लक्ष्य बना रही है। कंपनी चुनिंदा विदेशी बाजारों में भी अपने प्रौद्योगिकी ढांचे का व्यावसायिक इस्तेमाल करने की योजना बना रही है।
आकाश अंबानी ने कहा कि 2016 में जियो के दूरसंचार बाजार में प्रवेश के बाद देश में डाउनलोड की औसत गति 2.5 मेगाबिट प्रति सेकंड (एमबीपीएस) से बढ़कर करीब 68 एमबीपीएस हो गई है। जियो की औसत 5जी डाउनलोड गति 198.9 एमबीपीएस रही, जो पिछले तीन वर्षों में प्रतिस्पर्धी कंपनियों की तुलना में करीब दोगुनी थी। कंपनी के मुताबिक, उसकी डेटा दरें दुनिया की सबसे कम दरों में से एक हैं।
सस्ते डेटा और 5जी नेटवर्क के विस्तार से ऑनलाइन वीडियो, डिजिटल भुगतान और अन्य इंटरनेट सेवाओं का इस्तेमाल बढ़ा है। अंबानी ने जियो प्लेटफॉर्म्स को महज मोबाइल सेवा प्रदाता के बजाय एक प्रौद्योगिकी कंपनी के रूप में पेश करते हुए कहा कि कंपनी अपने द्वारा विकसित नेटवर्क सॉफ्टवेयर और उपकरण विदेशी दूरसंचार परिचालकों को भी बेचेगी। हालांकि, फिलहाल उसका कारोबार मुख्य रूप से घरेलू बाजार पर केंद्रित है।
जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ 21 अक्टूबर को खुलेगा और 23 अक्टूबर को बंद होगा। मसौदा दस्तावेज के मुताबिक, निर्गम में 10 रुपये अंकित मूल्य वाले अधिकतम 27 करोड़ नए शेयर जारी किए जाएंगे। इसमें मौजूदा शेयरधारकों की ओर से बिक्री पेशकश (ओएफएस) शामिल नहीं होगी।
प्रस्तावित निर्गम कंपनी की मौजूदा शेयर पूंजी का करीब तीन प्रतिशत है। प्रति शेयर 1,065 से 1,119 रुपये के मूल्य दायरे के ऊपरी स्तर पर आईपीओ से करीब 30,213 करोड़ रुपये जुटाए जाने का अनुमान है। ऐसा होने पर यह देश का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ होगा।
एंकर निवेशकों के लिए बोली 19 अक्टूबर को होगी। रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास जियो प्लेटफॉर्म्स की 66.43 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

