विस्थापित कश्मीरी पंडित परिवारों की लंबित मांग को पूरा करने के लिए सरकार ने जम्मू के विभिन्न प्रवासी शिविरों में बड़े पैमाने पर मरम्मत और नवीनीकरण का कार्यक्रम शुरू किया है, जिसके तहत 200 से अधिक भवन खंडों और करीब 5,000 फ्लैट के अलावा सामुदायिक भवनों तथा अन्य साझा सुविधाओं की मरम्मत की जाएगी। एक अधिकारी ने रविवार को बताया कि प्रवासी शिविरों में इतने बड़े स्तर पर पहली बार मरम्मत और नवीनीकरण का काम किया जा रहा है। जम्मू के जगती और अन्य स्थानों पर बने कई शिविर मुख्य रूप से प्रधानमंत्री पुनर्निर्माण एवं पुनर्वास कार्यक्रम के तहत 2004 से 2011 के बीच स्थापित किए गए थे।
इन शिविरों में रहने वाले प्रवासी परिवार लंबे समय से भवनों और साझा सुविधाओं की मरम्मत, नवीनीकरण तथा बुनियादी ढांचे में सुधार की मांग कर रहे थे, क्योंकि ये समय के साथ पुराने हो गए हैं और इनमें व्यापक स्तर पर काम की जरूरत है। जम्मू-कश्मीर के राहत एवं पुनर्वास (प्रवासी) आयुक्त अरविंद करवानी ने वरिष्ठ अधिकारियों के दल के साथ जगती और नगरोटा प्रवासी शिविरों में जारी विकास कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने सभी भवनों का संरचनात्मक ऑडिट कराने तथा स्थानीय लोगों और संबंधित शिविर कमांडेंट से सलाह लेकर कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
करवानी ने बताया कि लोक निर्माण विभाग (सड़क एवं भवन) ने जम्मू के प्रवासी शिविरों में प्रमुख मरम्मत और नवीनीकरण कार्य शुरू किए हैं। इनमें 200 से अधिक भवन खंड, करीब 5,000 फ्लैट, सामुदायिक भवन और अन्य साझा सुविधाएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि विभाग ने आंतरिक सड़कों और गलियों के विकास, पार्कों के विकास तथा सभी प्रवासी स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों और जगती उप-जिला अस्पताल के कायाकल्प के लिए भी एक व्यापक परियोजना तैयार की है।
सरकार ने इन कार्यों के लिए हाल में 82.45 करोड़ रुपये की प्रशासनिक मंजूरी दी है। दौरे के दौरान राहत एवं पुनर्वास आयुक्त ने शिविरों में सुरक्षित पेयजल, बिजली आपूर्ति और साफ-सफाई जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति की भी समीक्षा की। उन्होंने जल शक्ति विभाग के अधिकारियों को शिविरों में निर्बाध जलापूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने और जरूरत पड़ने पर पानी की कमी पूरी करने के लिए पर्याप्त टैंकर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
दीर्घकालिक समाधान के तौर पर जल शक्ति विभाग ने जगती टाउनशिप में जलापूर्ति बढ़ाने के लिए करीब 10 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली एक परियोजना तैयार की है। करवानी ने शिविरों में स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित करने के लिए नियमित अंतराल पर पानी की गुणवत्ता की जांच कराने पर भी जोर दिया। नगरोटा, मुठी-बुटा नगर और पुरखू के प्रवासी शिविरों के लिए करीब 11.5 करोड़ रुपये की लागत वाले मलजल शोधन संयंत्र (एसटीपी) को अंतिम रूप दे दिया गया है।
ये जगती टाउनशिप में पहले से काम कर रहे एसटीपी की तर्ज पर होंगे और इनका काम जल्द शुरू किया जाएगा। अधिकारी ने बताया कि सभी प्रवासी शिविरों में करीब 20 करोड़ रुपये की लागत से बहुउद्देश्यीय सामुदायिक भवनों के निर्माण की निविदा प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इन भवनों में विशेष रूप से महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए जगह, विद्यार्थियों के लिए पुस्तकालय और संस्कृति एवं विरासत को बढ़ावा देने की सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है।
प्रवासी परिवारों तक सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं का लाभ पहुंचाने के संबंध में करवानी ने बताया कि प्रवासी राशन कार्डों के डिजिटलीकरण और उन्हें राष्ट्रीय डेटाबेस से जोड़ने के बाद करीब 3,000 परिवार इन योजनाओं का लाभ उठा चुके हैं। उन्होंने कहा कि विभिन्न सामाजिक और कल्याणकारी योजनाओं, स्वरोजगार तथा कौशल विकास योजनाओं की जानकारी देने और ऑनलाइन आवेदन भरने में मदद के लिए जम्मू के विभिन्न स्थानों पर संपर्क शिविरों का अगला दौर 30 सितंबर से शुरू होगा।

