पोकरण. पंचायतीराज चुनाव की सरगर्मियों के बीच सांकड़ा क्षेत्र में पेयजल संकट, पशुधन के लिए चारे की कमी, क्षतिग्रस्त सड़कें और शिक्षा व्यवस्था में सुधार प्रमुख मुद्दे बनकर उभरे हैं। गांवों की चौपालों से लेकर चाय की दुकानों तक चुनावी चर्चाएं तेज हो गई हैं। ग्रामीणों के बीच जनप्रतिनिधियों के पिछले कार्यकाल और क्षेत्र की बुनियादी सुविधाओं को लेकर चर्चा हो रही है। जैसलमेर जिले में पंचायतीराज चुनाव चौथे चरण में होंगे। इसके लिए 31 अक्टूबर को लोक सूचना जारी होने के साथ चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। सांकड़ा ग्राम पंचायत उपतहसील मुख्यालय होने के साथ अब पंचायत समिति मुख्यालय भी है। पहले पंचायत समिति सांकड़ा का मुख्यालय पोकरण कस्बे में था। गत वर्ष हुए पंचायतीराज परिसीमन के बाद मुख्यालय सांकड़ा गांव में स्थानांतरित कर दिया गया। मुख्यालय बनने के बाद यहां पहली बार पंचायत समिति चुनाव हो रहे हैं। इसे लेकर ग्रामीणों में उत्साह है, लेकिन स्थानीय समस्याओं के समाधान को लेकर अपेक्षाएं भी बनी हुई हैं।
पेयजल संकट से ग्रामीण और पशुधन बेहाल
सांकड़ा क्षेत्र में पेयजल की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। इस बार बारिश कम होने से तालाबों और नाड़ियों में भी पानी सूख चुका है। इससे ग्रामीणों के साथ पशुधन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। क्षेत्र को पोकरण-फलसूंड पेयजल लिफ्ट परियोजना से जोड़ा गया है, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार बड़ी संख्या में अवैध कनेक्शन होने से जलापूर्ति प्रभावित होती है। समय पर पर्याप्त पानी नहीं मिलने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्र में इस बार अकाल के हालात के बीच पशुओं के लिए चारे और पानी की व्यवस्था बड़ी चुनौती बन गई है। ग्रामीणों का कहना है कि एक ओर चुनावी गतिविधियां तेज हो रही हैं, वहीं दूसरी ओर पशुधन को बचाने के लिए चारे-पानी की व्यवस्था करना मुश्किल हो रहा है। ग्रामीणों के अनुसार मुख्यमंत्री की घोषणा के बावजूद जिला प्रशासन की ओर से चारा डिपो और पशु शिविर शुरू करने की कार्रवाई नहीं हुई है। चारे-पानी की कमी के कारण गोवंश जंगलों में भटक रहा है। ग्रामीणों ने पशुधन के संरक्षण के लिए तत्काल व्यवस्था की जरूरत जताई है।
सड़कों की मरम्मत और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दरकार
सांकड़ा क्षेत्र में पोकरण-सांकड़ा मार्ग लंबे समय से मरम्मत की बाट जोह रहा है। ग्रामीणों के अनुसार सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे हो गए हैं, जिससे आवागमन जोखिमभरा बना हुआ है। गांव के मुख्य चौराहे और प्रमुख मार्गों पर भी क्षतिग्रस्त सड़कों की समस्या बनी हुई है। ग्रामीणों ने सड़कों की मरम्मत को प्राथमिकता देने की मांग की है। शिक्षा व्यवस्था भी ग्रामीणों की चिंता का विषय है। क्षेत्र के विद्यालयों में शिक्षकों की कमी के साथ सांकड़ा के राजकीय महाविद्यालय में भी पर्याप्त स्टाफ नहीं होने की समस्या बताई जा रही है। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने की शिकायत है। ग्रामीणों का कहना है कि उच्च शिक्षा के लिए जरूरी शैक्षणिक सुविधाओं और नियमित शिक्षण व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है। बेहतर चिकित्सा सेवाएं भी क्षेत्र की प्रमुख मांगों में शामिल हैं।
पिछले कार्यों के आधार पर तय करेंगे मतदान
सांकड़ा गांव के मुख्य चौराहे के पास ग्रामीणों की चौपाल में चुनाव और स्थानीय समस्याओं को लेकर चर्चा हुई। मनोहरसिंह, नेपालसिंह, अमृतलाल गांधी, भीखसिंह, आवड़सिंह, गिरवरसिंह, पेंपसिंह, अगराराम, शंकराराम, सवाईराम, श्यामसिंह, वीरमसिंह, पीराराम, जूंझारसिंह, सुजानसिंह और नरपतसिंह सहित अन्य ग्रामीणों ने कहा कि पंचायत समिति और उपतहसील मुख्यालय बनने के बावजूद क्षेत्र में कई बुनियादी समस्याएं कायम हैं। पेयजल संकट, विद्यालयों में शिक्षकों की कमी, चिकित्सा सुविधाओं का अभाव और खराब सड़कें लोगों की परेशानी बढ़ा रही हैं।
फैक्ट फाइल
पोकरण उपखंड मुख्यालय से सांकड़ा की दूरी : 45 किलोमीटर
सांकड़ा ग्राम पंचायत की आबादी : करीब 10 हजार
पंचायत समिति सांकड़ा क्षेत्र में ग्राम पंचायतें : 29

