जैसलमेर/लाठी. पिता की आंखों में बेटे को वर्दी में देखने का सपना था। बेटा भी वायुसेना में अधिकारी बनकर देश की सेवा करना चाहता था। एका गांव निवासी महिपाल सिंह इसी लक्ष्य के साथ एयरफोर्स भर्ती परीक्षा देने जैसलमेर आया था। परिवार को उम्मीद थी कि मेहनत और पढ़ाई के सहारे वह अपने सपने की ओर आगे बढ़ेगा, लेकिन 14 अक्टूबर 2025 को बस अग्निकांड ने इस उम्मीद को हमेशा के लिए तोड़ दिया। महिपाल के पिता नगसिंह के अनुसार गत 13 अक्टूबर को वे बेटे को परीक्षा केंद्र पर छोड़कर आए थे। अगले दिन उसके लौटने की बात हुई थी। 14 अक्टूबर को महिपाल रिश्तेदार के यहां से निजी बस में बैठा और पिता को फोन कर कहा- मुझे लेने मत आना, मैं बस में बैठ गया हूं। इसके कुछ ही देर बाद बस आग की चपेट में आ गई।
छह दिन तक अस्पताल में चला संघर्ष
हादसे में महिपाल करीब 35 प्रतिशत झुलस गया था। उसे उपचार के लिए जोधपुर ले जाया गया, जहां छह दिन तक जिंदगी बचाने की कोशिश जारी रही। परिवार को उम्मीद थी कि वह स्वस्थ होकर घर लौट आएगा, लेकिन उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया।
अस्पताल में बीते वे छह दिन परिवार के लिए अनिश्चितता और चिंता से भरे रहे। हर गुजरते दिन के साथ घर लौटने की उम्मीद बनी रही, लेकिन आखिरकार वही खबर मिली, जिसने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।
इकलौते बेटे के जाने से बिखरा परिवार
महिपाल अपने परिवार का इकलौता बेटा था। उसकी एक छोटी बहन है, जो अभी पढ़ाई कर रही है। पिता की मोटरसाइकिल बिक्री की एजेंसी है। बेटे की मौत ने परिवार को ऐसी पीड़ा में डाल दिया, जिसका असर केवल वर्तमान पर नहीं, बल्कि उससे जुड़ी भविष्य की उम्मीदों पर भी पड़ा है। नगसिंह ने जिस बेटे को देश की सेवा करते देखने का सपना संजोया था, वह सपना अब अधूरा रह गया। परिवार के लिए महिपाल केवल बेटा नहीं था, बल्कि वह उम्मीद भी था जिसके साथ उसके भविष्य की कल्पना जुड़ी हुई थी।

