jaisalmer: बारिश रूठी तो खेत सूखे, चरागाह उजड़े, जैसलमेर में गांवों पर दोहरी मार

jaisalmer: बारिश रूठी तो खेत सूखे, चरागाह उजड़े, जैसलमेर में गांवों पर दोहरी मार

जैसलमेर/नाचना/रामगढ़/फतेहगढ़. खेत में खड़ी फसल और बंधे पशु—दोनों इस समय एक ही चीज का इंतजार कर रहे हैं, बारिश का। जुलाई में हुई बारिश के बाद किसानों ने खरीफ की उम्मीद में बुआई की, लेकिन लंबे अंतराल ने खेतों की नमी छीननी शुरू कर दी। नाचना में फसल बचाने के लिए सिंचाई का खर्च बढ़ रहा है। रामगढ़ और फतेहगढ़ में चारागाहों की हरियाली कम होने से पशुपालकों को चारे और पानी की चिंता सताने लगी है। नाचना क्षेत्र के किसान मोहनलाल मेघवाल का कहना है कि जुलाई में बारिश देखकर ग्वार, मूंगफली, मूंग और मोठ बोई थी। बीज, खाद और मजदूरी पर खर्च किया। अब बारिश का अंतराल बढ़ने से खेत की नमी घट रही है। सिंचाई की सुविधा वाले किसान इंजन और डीजल का खर्च उठाकर फसल बचाने में जुटे हैं। छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह अतिरिक्त खर्च बड़ी चुनौती है। फसल बचाने के लिए पानी चाहिए और पानी के लिए पैसा। ऐसे में किसान के सामने सबसे बड़ा डर उत्पादन घटने के साथ बढ़ती लागत का है।

चार संकेत : खेतों में साफ नजर आ रहा सूखे का असर

नमी घट रही: लंबे अंतराल से मिट्टी में उपलब्ध नमी लगातार कम हो रही।

फसल मुरझाई: ग्वार, मूंगफली, मूंग और मोठ पर असर दिखने लगा।

लागत बढ़ी: सिंचाई शुरू होने से डीजल और इंजन खर्च बढ़ा।

जोखिम बढ़ा: बारिश नहीं हुई तो उत्पादन प्रभावित होने की आशंका बढ़ी।

चारा कम हुआ तो पशुपालक का खर्च बढ़ा

रामगढ़ क्षेत्र के पशुपालक हनुमानराम बताते हैं कि इस बार चारागाहों में अपेक्षित हरियाली नहीं आई। पशुओं को चराने के लिए ज्यादा दूरी तय करनी पड़ रही है। जहां प्राकृतिक चारा नहीं मिल रहा, वहां बाजार से चारा खरीदना पड़ रहा है। फतेहगढ़ में भी पशुपालकों की चिंता यही है। खेतों और चारागाहों में पर्याप्त चारा नहीं बन पाया। हरे चारे की कमी के साथ सूखा चारा जुटाना भी चुनौती बन रहा है। पशुओं के पीने के पानी की व्यवस्था भी ग्रामीणों के लिए चिंता का विषय है। पशुधन परिवार की आय और जीवन-यापन का महत्वपूर्ण आधार है, लेकिन जब चारागाह में चारा नहीं मिलता और बाजार से खरीदना पड़ता है, तो रोज का खर्च बढ़ जाता है। रामगढ़ और फतेहगढ़ के ग्रामीणों ने चारा डिपो, पशु शिविर और पर्याप्त पानी की व्यवस्था की मांग की है।

जमीन पर असर दिखा, आधिकारिक तस्वीर अभी बाकी

नाचना के तहसीलदार, उपनिवेशन विभाग हाबूलाल मीणा के अनुसार गिरदावरी का काम जारी है। उनके अनुसार 15 अक्टूबर के बाद ही फसल खराबे की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। स्थानीय किसान संघ अध्यक्ष खुशाल सोनी और ग्रामीणों ने प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कराने तथा फसल खराबे के अनुसार राहत देने की मांग की है।

एक्सपर्ट व्यू : फसल के लिए बारिश से ज्यादा उसका अंतराल भी मायने रखता है

पश्चिमी राजस्थान में खरीफ फसलों के लिए बारिश की मात्रा के साथ बारिश के बीच का अंतराल भी महत्वपूर्ण है। लंबे समय तक मिट्टी में पर्याप्त नमी नहीं रहने पर फसल की बढ़वार प्रभावित हो सकती है। कम बारिश का असर चारागाहों में चारा उत्पादन पर भी पड़ता है, जिससे पशुपालकों की लागत बढ़ सकती है।

– डॉ. अरविंद चौधरी, कृषि विशेषज्ञ

​ 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *