War: ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा कूटनीतिक विवाद अब एक विनाशकारी युद्ध के मुहाने पर खड़ा नजर आ रहा है। ताजा घटनाक्रम में, तेहरान ने अमेरिका द्वारा की जा रही बंदरगाहों की घेराबंदी को पूरी तरह से ‘असहनीय’ करार दिया है। इस कड़े बयान के बाद पूरी दुनिया में हलचल मच गई है। खाड़ी क्षेत्र में युद्ध के बादल एक बार फिर से गहराने लगे हैं और ऐसा माना जा रहा है कि यह तनाव किसी भी वक्त एक हिंसक सैन्य झड़प में बदल सकता है।
समुद्री रास्तों पर अमेरिकी नौसेना का बढ़ता दबाव बर्दाश्त के बाहर : ईरान
ईरान के शीर्ष अधिकारियों ने एक लाइव प्रेस ब्रीफिंग में स्पष्ट कर दिया है कि उनके समुद्री रास्तों और बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसेना का बढ़ता दबाव अब बर्दाश्त के बाहर है। ईरान का कहना है कि यह घेराबंदी न केवल उनके अंतरराष्ट्रीय व्यापार को रोक रही है, बल्कि यह उनकी संप्रभुता पर भी सीधा और अवैध हमला है। तेहरान की ओर से दी गई इस चेतावनी को पश्चिमी देशों के लिए एक बड़े खतरे के रूप में देखा जा रहा है। ईरान ने साफ किया है कि अगर यह घेराबंदी तुरंत नहीं हटाई गई, तो वह अपनी रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।
ईरान को पीछे धकेलने के लिए कदम उठाना ही एकमात्र विकल्प बचा : ट्रंप
दूसरी तरफ, वाशिंगटन में भी बैठकों का दौर और सरगर्मियां तेज हो गई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति और रिपब्लिकन नेता डोनाल्ड ट्रंप इस मामले पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं और लगातार आक्रामक रुख अपना रहे हैं। सूत्रों के हवाले से खबर है कि ट्रंप और उनके शीर्ष रणनीतिकार इस मुद्दे पर ईरान के खिलाफ एक बड़ी और सख्त कार्रवाई (Action) पर विचार कर रहे हैं। उनका मानना है कि ईरान को पीछे धकेलने के लिए कड़े सैन्य और आर्थिक कदम उठाना ही एकमात्र विकल्प बचा है।
पूरी दुनिया के लिए भयावह हो सकते हैं परिणाम
इस भयंकर तनाव का सीधा असर वैश्विक बाजार और अर्थव्यवस्था पर पड़ना शुरू हो गया है। मध्य पूर्व में अस्थिरता का सीधा मतलब है कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल। दुनिया भर के देश, विशेषकर भारत जैसे तेल आयात पर निर्भर राष्ट्र, इस स्थिति को लेकर बेहद चिंतित हैं। अगर अमेरिका और ईरान के बीच यह कूटनीतिक विवाद जल्दी नहीं सुलझा, तो इसके परिणाम पूरी दुनिया के लिए भयावह हो सकते हैं। अब देखना यह है कि क्या कूटनीति से कोई शांतिपूर्ण रास्ता निकलेगा या दुनिया को एक नए महायुद्ध का सामना करना पड़ेगा।
यूरोपीय देशों ने दोनों पक्षों से शांति और संयम बरतने की अपील की
अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस तनाव से बेहद चिंतित है। संयुक्त राष्ट्र (UN) और कई यूरोपीय देशों ने दोनों पक्षों से शांति और संयम बरतने की अपील की है। चीन और रूस ने अमेरिकी घेराबंदी की आलोचना करते हुए इसे उकसावे वाली कार्रवाई बताया है, जबकि अमेरिकी सहयोगी देश सुरक्षा स्थिति का जायजा ले रहे हैं।
इस विवाद का सबसे बड़ा पहलू वैश्विक महंगाई और कच्चे तेल का बाजार
अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या डोनाल्ड ट्रंप कोई आधिकारिक सैन्य प्रस्ताव पेश करेंगे। इसके साथ ही, यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा कि क्या ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने जैसा कोई चरम कदम उठाता है, जिससे दुनिया भर का तेल व्यापार ठप हो सकता है। इस विवाद का सबसे बड़ा पहलू वैश्विक महंगाई और कच्चे तेल का बाजार है। अगर खाड़ी में युद्ध छिड़ता है, तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी, जिसका सीधा असर विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जेब पर पड़ेगा।


