Iran Israel War: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध अब सिर्फ मिसाइलों और सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि इसका असर समुद्री व्यापार और ऊर्जा मार्गों पर भी गहराता जा रहा है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिका और इजरायल की क्षेत्रीय मौजूदगी को खत्म करने की बात कही है। दूसरी ओर, अमेरिका परमाणु मुद्दे पर अपने रुख से पीछे हटने को तैयार नहीं है। ऐसे में बातचीत की संभावना और तनाव दोनों साथ-साथ दिखाई दे रहे हैं।
तेहरान का सख्त संदेश, वॉशिंगटन की अलग शर्त
ईरान के IRGC ने कहा है कि अमेरिका और इजरायल को अंततः क्षेत्र से अपनी मौजूदगी हटानी होगी। यह बयान ईरान के राष्ट्रीय रक्षा सप्ताह के दौरान सामने आया और इसे ईरानी समाचार एजेंसी Fars News Agency ने प्रकाशित किया। गार्ड्स के मुताबिक मौजूदा संघर्ष ने क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को बदल दिया है और विदेशी सैन्य मौजूदगी को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
इसके उलट अमेरिका ने परमाणु कार्यक्रम को लेकर अपनी प्राथमिकता स्पष्ट रखी है। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी दूत माइक वॉल्ट्ज ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि ईरान परमाणु हथियार हासिल न कर सके। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ईरान गंभीरता और सद्भावना के साथ बातचीत की मेज पर लौटता है तो कूटनीति का रास्ता खुला है।
सऊदी अरब को ब्रिटेन की सैन्य मदद
क्षेत्रीय तनाव का असर खाड़ी देशों पर भी पड़ रहा है। ब्रिटेन ने सऊदी अरब के अनुरोध पर सीमित अवधि के लिए रक्षात्मक हवा से हवा में ईंधन भरने की सुविधा देने पर सहमति जताई है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम के अनुसार इसका उद्देश्य क्षेत्र को स्थिर करने और सऊदी सुरक्षा में मदद करना है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इसके लिए एक Voyager विमान तैनात किया जाएगा।
होर्मुज में जहाज पर फिर हमला
सबसे बड़ी चिंता दुनिया के अहम ऊर्जा मार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर है। ब्रिटिश समुद्री सुरक्षा एजेंसी UKMTO के अनुसार सोमवार को एक टैंकर अज्ञात प्रोजेक्टाइल की चपेट में आया, जिससे दो चालक दल के सदस्य मामूली रूप से घायल हुए। कुछ ही समय बाद दूसरे पोत को भी अज्ञात प्रोजेक्टाइल के मलबे से नुकसान पहुंचने की सूचना मिली। जहाजों ने अपनी यात्रा जारी रखी।
इस जलमार्ग से युद्ध से पहले प्रतिदिन बड़ी संख्या में जहाज गुजरते थे। हालिया संघर्ष के बीच यहां समुद्री आवाजाही में तेज गिरावट दर्ज की गई है। सप्ताहांत में केवल 17 कमोडिटी जहाजों ने होर्मुज पार किया, जबकि युद्ध से पहले औसत दैनिक आवाजाही करीब 125 जहाजों की थी।
यमन और इराक तक पहुंचा असर
यमन में हूती लड़ाकों और सऊदी समर्थित बलों के बीच भी संघर्ष तेज हुआ है। इसी पृष्ठभूमि में सऊदी ऊर्जा ढांचे की सुरक्षा चिंता का विषय बनी हुई है। उधर इराक भी होर्मुज संकट से प्रभावित है और तेल निर्यात के वैकल्पिक रास्तों की तलाश कर रहा है। प्रधानमंत्री अली अल-जैदी की सरकार ने समुद्री व्यवधान के बीच ऊर्जा निर्यात को बनाए रखने के लिए कदम उठाए हैं।
फिलहाल तस्वीर साफ है एक तरफ तेहरान अमेरिकी-इजरायली मौजूदगी को चुनौती दे रहा है, तो दूसरी ओर वॉशिंगटन परमाणु मुद्दे पर दबाव बनाए हुए है। इन दोनों रुखों के बीच कूटनीति, होर्मुज की सुरक्षा और क्षेत्रीय सैन्य गतिविधियां आने वाले दिनों में सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम बने रहेंगे।


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