Iran Civil Unrest 2026: ईरान इस वक्त अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। राजधानी तेहरान से शुरू हुए सरकार विरोधी प्रदर्शन अब देश के सभी 31 प्रांतों में फैल चुके हैं। एक तरफ देश के सभी 31 राज्यों में सरकार विरोधी प्रदर्शनों की आग भड़की हुई है, तो दूसरी तरफ इजरायल के साथ 12 दिनों तक चले सीधे युद्ध ने देश की नींव को हिला दी है। इन सबके केंद्र में हैं ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई। 36 सालों से ईरान की सत्ता संभाल रहे 86 वर्षीय खामेनेई के लिए यह उनकी साख और सत्ता बचाने का सबसे बड़ा इम्तिहान है।
Ali Khamenei Biography: गरीबी में बीता बचपन
अली खामेनेई का जन्म 19 अप्रैल, 1939 को ईरान के पवित्र शहर मशहद में हुआ था। खामेनेई के पिता, जवाद खामेनेई मूल रूप से अजरबैजानी (Azerbaijani) थे। वहीं उनकी मां, खदीजा मीरदमादी, यज्द शहर की रहने वाली और फारसी (Persian) मूल की थीं। आज भले ही वे ईरान के सबसे ताकतवर शख्स हों, लेकिन उनका बचपन बेहद तंगहाली में बीता।
खामेनेई अपने आठ भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर थे। वे बताते हैं कि, उनका परिवार एक कमरे के छोटे से घर में रहता था। कई बार तो हालात ऐसे होते थे कि रात के खाने में उनके पास केवल सूखी रोटी और किशमिश ही होती थी। उनके पिता एक सादगी पसंद धार्मिक विद्वान थे, जिन्हें दुनिया के ऐशो-आराम से कोई लगाव नहीं था।
Ali Khamenei Education: 4 साल की उम्र में शुरू हुई तालीम
शिक्षा की बात करें तो खामेनेई ने महज 4 साल की उम्र में मकतब से कुरान की तालीम लेना शुरू कर दिया था। इसके बाद उन्होंने मशहद के मदरसे में बड़े उस्तादों से पढ़ाई की। 1958 में वे ईरान के ‘कोम’ शहर चले गए, जहां उनकी मुलाकात अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी से हुई। यहीं से उनकी धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ राजनीति में दिलचस्पी बढ़ने लगी।
आर्थिक दिक्कतों के बावजूद खामेनेई का परिवार शिक्षा और संस्कारों के मामले में बहुत समृद्ध था। उनकी मां इतिहास, साहित्य और कविता की गहरी समझ रखती थीं। खामेनेई की शुरुआती परवरिश में उनकी मां का बड़ा हाथ रहा, जिन्होंने उन्हें इस्लाम और साहित्य से प्यार करना सिखाया। यही कारण है कि खामेनेई आज भी अपनी सादगी और कविता के प्रति लगाव के लिए जाने जाते हैं। आपको बता दें कि, पिछले 36 सालों से ईरान की सत्ता संभाल रहे खामेनेई मिडिल ईस्ट के सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले नेता बन चुके हैं।
Iran Politics And News: पढ़ाई से ज्यादा सियासत में रही रुचि
उस दौर के अन्य एक्टिव मौलवियों की तरह, खामेनेई का मन भी केवल धार्मिक किताबों तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने खुद को देश के राजनीतिक हालातों और शाह के खिलाफ आंदोलनों में सक्रिय रूप से शामिल कर लिया। यही वह दौर था जब उनकी पहचान एक विद्वान के साथ-साथ एक क्रांतिकारी नेता के रूप में बनने लगी। खामेनेई ने ईरान के शासक शाह मोहम्मद रज़ा पहलवी के खिलाफ आवाज उठाई। इस बगावत की वजह से उन्हें छह बार गिरफ्तार किया गया और तीन साल के लिए देश से निकाल दिया गया। 1979 की ईरानी क्रांति की सफलता के बाद वे नई सरकार का अहम हिस्सा बने। इस दौरान उन पर जानलेवा हमला भी हुआ, जिसमें उनका दाहिना हाथ हमेशा के लिए लकवाग्रस्त हो गया
Khomeini India Connection: भारत से जुड़ा है खास रिश्ता
ईरान के नेतृत्व का भारत के साथ एक दिलचस्प ऐतिहासिक जुड़ाव रहा है। अली खामेनेई के गुरु और फॉर्मर सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खुमैनी के पूर्वज भारत से ताल्लुक रखते थे।
- उत्तर प्रदेश से रिश्ता: अयातुल्ला खुमैनी के दादा, सैयद अहमद मुसवी हिंदी, उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के पास किंतूर गांव में पैदा हुए थे।
- पलायन का इतिहास: खुमैनी का परिवार 18वीं शताब्दी में ईरान से भारत के अवधी इलाके में आकर बसा था। बाद में उनके दादा 1830 के आसपास इराक होते हुए वापस ईरान के खोमेन शहर में बस गए।
- सरनेम ‘हिंदी’: भारत से अपनी जड़ों को याद रखने के लिए खुमैनी के दादा ने अपने नाम के साथ ‘हिंदी’ शब्द जोड़ा था। अयातुल्ला खुमैनी भी अपनी कविताओं में ‘हिंदी’ उपनाम का इस्तेमाल करते थे।
खामेनेई को जानने वाले उन्हें एक ऐसा नेता मानते हैं जो जरूरत पड़ने पर सख्त फैसले लेने से पीछे नहीं हटते, लेकिन मौजूदा हालात उनके लिए बड़ी चुनौती साबित हो रहे है। विदेशी दबाव और घर के भीतर बढ़ते विद्रोह के बीच अब दुनिया की नजरें 86 वर्षीय अली खामेनेई के अगले कदम पर टिकी हैं।


