जींद जिले के जुलाना के शादीपुर गांव में अंतरराष्ट्रीय वेटलिफ्टर दीपक लाठर के घर उनकी गाय के निधन पर परिवार ने हवन कर तेरहवीं की रस्म पूरी की। इस दौरान परिवार ने गाय को श्रद्धांजलि अर्पित की और उसकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। दीपक लाठर ने बताया कि 13 मार्च को अचानक हृदय गति रुकने से उनकी गाय का निधन हो गया था। इस घटना से परिवार को गहरा सदमा पहुंचा है। उन्होंने कहा कि उनके घर में गाय को केवल एक पशु नहीं, बल्कि माता के रूप में पूजा जाता था। परिवार के सभी सदस्य उससे गहरा लगाव रखते थे। परिवार के लिए सदस्य जैसी थी गाय दीपक के पिता ने बताया कि पिछले दो वर्षों से यह गाय उनके परिवार का हिस्सा थी। वह घर के हर सदस्य के लिए बेहद खास थी। उन्होंने कहा कि गाय उनके लिए सिर्फ दूध देने वाली नहीं, बल्कि परिवार की सदस्य की तरह थी, जिसकी सेवा करना उनका कर्तव्य था। गाय के निधन से घर में खालीपन महसूस हो रहा है। प्राकृतिक आहार पर भरोसा रखते हैं दीपक दीपक लाठर ने बताया कि वह अपने खेल जीवन में कृत्रिम सप्लीमेंट्स की बजाय प्राकृतिक चीजों पर भरोसा करते हैं। उनका मानना है कि गाय का दूध और घी शरीर के लिए बेहद लाभकारी होता है। उन्होंने कहा कि गाय का घी शरीर को ताकत देने के साथ-साथ चोटों से उबरने में भी मदद करता है, इसलिए वह इसे अपनी दिनचर्या का अहम हिस्सा मानते हैं। वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ हुआ हवन हवन कार्यक्रम के दौरान वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पूजा-अर्चना की गई। परिवार ने गाय की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। सदस्यों ने बताया कि गाय के साथ उनकी कई भावनात्मक यादें जुड़ी हुई हैं, जिन्हें वे कभी नहीं भूल पाएंगे।


