भारत–नेपाल सीमा पर स्थित जोगबनी इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट (आईसीपी) को और अधिक प्रभावी, सुव्यवस्थित एवं व्यापार-अनुकूल बनाने के उद्देश्य से रविवार को एक अहम समीक्षा बैठक आयोजित की गई। यह बैठक इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट जोगबनी के सभागार में हुई, जिसकी संयुक्त अध्यक्षता अररिया जिला पदाधिकारी विनोद दूहन एवं लैंड पोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एलपीएआई) के चेयरमैन जयंत सिंह ने की। बैठक में सीमा प्रबंधन, व्यापारिक गतिविधियों, सुरक्षा व्यवस्था और भविष्य की योजनाओं को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। व्यापार और आवाजाही का प्रमुख केंद्र है जोगबनी आईसीपी बैठक के दौरान इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट के प्रबंधक रत्नाकर यादव ने जोगबनी आईसीपी की कार्यप्रणाली पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि जोगबनी इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट भारत और नेपाल के बीच व्यापार का एक प्रमुख केंद्र है। यहां से प्रतिदिन सैकड़ों टन आयात-निर्यात सामग्री का आवाजाही होता है, वहीं हजारों नागरिक सीमा पार करते हैं। उन्होंने निर्यात-आयात प्रक्रिया, विभिन्न वस्तुओं के आवाजाही की स्थिति, यात्रियों की आवाजाही, सुरक्षा प्रोटोकॉल और लैंड पोर्ट से जुड़ी भविष्य की योजनाओं की जानकारी भी साझा की। आपसी समन्वय बढ़ाने पर जोर जिला पदाधिकारी विनोद दूहन ने बैठक में मौजूद सभी संबंधित एजेंसियों को आपसी समन्वय को और मजबूत करने का सख्त निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि कस्टम, लैंड पोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया, एसएसबी, पुलिस और अन्य विभागों के बीच बेहतर तालमेल से न सिर्फ व्यापार को सुगम बनाया जा सकता है, बल्कि तस्करी, अवैध गतिविधियों और सीमा पार अपराधों पर भी प्रभावी नियंत्रण संभव है। डीएम ने स्पष्ट किया कि प्रशासन की प्राथमिकता है कि वैध व्यापार और यात्रियों को किसी तरह की असुविधा न हो, जबकि अवैध गतिविधियों पर पूरी सख्ती से कार्रवाई की जाए। व्यापार-अनुकूल वातावरण बनाने की पहल एलपीएआई के चेयरमैन जयंत सिंह ने कहा कि इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट का उद्देश्य केवल सीमा पर जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच व्यापार और आपसी संबंधों को मजबूत करने का माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि जोगबनी आईसीपी की आधारभूत संरचना को लगातार बेहतर किया जा रहा है, ताकि व्यापारियों और यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं मिल सकें। आने वाले समय में तकनीक आधारित प्रक्रियाओं को और सुदृढ़ किया जाएगा, जिससे समय की बचत होगी और पारदर्शिता बढ़ेगी। सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था की समीक्षा बैठक में सीमा सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि एसएसबी, कस्टम और पुलिस की संयुक्त निगरानी से सीमा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत बनी हुई है। डीएम ने निर्देश दिया कि संदिग्ध गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जाए और किसी भी तरह की चूक न हो। उन्होंने यह भी कहा कि सुरक्षा के साथ-साथ मानवीय दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है, ताकि आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी न झेलनी पड़े। स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल अधिकारियों का मानना है कि जोगबनी इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट की कार्यक्षमता बढ़ने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ मिलेगा। व्यापार बढ़ने से रोजगार के अवसर सृजित होंगे और सीमावर्ती क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी। डीएम विनोद दूहन ने कहा कि सीमा क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और विकास—तीनों एक-दूसरे से जुड़े हैं और प्रशासन इन सभी पहलुओं पर समान रूप से काम कर रहा है। वरिष्ठ अधिकारियों की रही मौजूदगी बैठक में अनुमंडल पदाधिकारी फारबिसगंज, एसएसबी कंपनी कमांडेंट सहित लैंड पोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया, कस्टम, एसएसबी, पुलिस एवं अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने अपने-अपने विभाग से जुड़ी समस्याओं और सुझावों को साझा किया तथा उन्हें दूर करने के लिए ठोस कदम उठाने पर सहमति बनी। नियमित समीक्षा से बढ़ेगी क्षमता अधिकारियों ने कहा कि इस तरह की नियमित समीक्षा बैठकों से जोगबनी इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट की क्षमता में निरंतर वृद्धि होगी। इससे भारत–नेपाल के बीच व्यापारिक संबंध और मजबूत होंगे तथा सीमा प्रबंधन अधिक प्रभावी बन सकेगा। बैठक के अंत में डीएम और एलपीएआई चेयरमैन ने सभी एजेंसियों को निर्देश दिया कि तय बिंदुओं पर शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। भारत–नेपाल सीमा पर स्थित जोगबनी इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट (आईसीपी) को और अधिक प्रभावी, सुव्यवस्थित एवं व्यापार-अनुकूल बनाने के उद्देश्य से रविवार को एक अहम समीक्षा बैठक आयोजित की गई। यह बैठक इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट जोगबनी के सभागार में हुई, जिसकी संयुक्त अध्यक्षता अररिया जिला पदाधिकारी विनोद दूहन एवं लैंड पोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एलपीएआई) के चेयरमैन जयंत सिंह ने की। बैठक में सीमा प्रबंधन, व्यापारिक गतिविधियों, सुरक्षा व्यवस्था और भविष्य की योजनाओं को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। व्यापार और आवाजाही का प्रमुख केंद्र है जोगबनी आईसीपी बैठक के दौरान इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट के प्रबंधक रत्नाकर यादव ने जोगबनी आईसीपी की कार्यप्रणाली पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि जोगबनी इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट भारत और नेपाल के बीच व्यापार का एक प्रमुख केंद्र है। यहां से प्रतिदिन सैकड़ों टन आयात-निर्यात सामग्री का आवाजाही होता है, वहीं हजारों नागरिक सीमा पार करते हैं। उन्होंने निर्यात-आयात प्रक्रिया, विभिन्न वस्तुओं के आवाजाही की स्थिति, यात्रियों की आवाजाही, सुरक्षा प्रोटोकॉल और लैंड पोर्ट से जुड़ी भविष्य की योजनाओं की जानकारी भी साझा की। आपसी समन्वय बढ़ाने पर जोर जिला पदाधिकारी विनोद दूहन ने बैठक में मौजूद सभी संबंधित एजेंसियों को आपसी समन्वय को और मजबूत करने का सख्त निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि कस्टम, लैंड पोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया, एसएसबी, पुलिस और अन्य विभागों के बीच बेहतर तालमेल से न सिर्फ व्यापार को सुगम बनाया जा सकता है, बल्कि तस्करी, अवैध गतिविधियों और सीमा पार अपराधों पर भी प्रभावी नियंत्रण संभव है। डीएम ने स्पष्ट किया कि प्रशासन की प्राथमिकता है कि वैध व्यापार और यात्रियों को किसी तरह की असुविधा न हो, जबकि अवैध गतिविधियों पर पूरी सख्ती से कार्रवाई की जाए। व्यापार-अनुकूल वातावरण बनाने की पहल एलपीएआई के चेयरमैन जयंत सिंह ने कहा कि इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट का उद्देश्य केवल सीमा पर जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच व्यापार और आपसी संबंधों को मजबूत करने का माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि जोगबनी आईसीपी की आधारभूत संरचना को लगातार बेहतर किया जा रहा है, ताकि व्यापारियों और यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं मिल सकें। आने वाले समय में तकनीक आधारित प्रक्रियाओं को और सुदृढ़ किया जाएगा, जिससे समय की बचत होगी और पारदर्शिता बढ़ेगी। सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था की समीक्षा बैठक में सीमा सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि एसएसबी, कस्टम और पुलिस की संयुक्त निगरानी से सीमा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत बनी हुई है। डीएम ने निर्देश दिया कि संदिग्ध गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जाए और किसी भी तरह की चूक न हो। उन्होंने यह भी कहा कि सुरक्षा के साथ-साथ मानवीय दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है, ताकि आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी न झेलनी पड़े। स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल अधिकारियों का मानना है कि जोगबनी इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट की कार्यक्षमता बढ़ने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ मिलेगा। व्यापार बढ़ने से रोजगार के अवसर सृजित होंगे और सीमावर्ती क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी। डीएम विनोद दूहन ने कहा कि सीमा क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और विकास—तीनों एक-दूसरे से जुड़े हैं और प्रशासन इन सभी पहलुओं पर समान रूप से काम कर रहा है। वरिष्ठ अधिकारियों की रही मौजूदगी बैठक में अनुमंडल पदाधिकारी फारबिसगंज, एसएसबी कंपनी कमांडेंट सहित लैंड पोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया, कस्टम, एसएसबी, पुलिस एवं अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने अपने-अपने विभाग से जुड़ी समस्याओं और सुझावों को साझा किया तथा उन्हें दूर करने के लिए ठोस कदम उठाने पर सहमति बनी। नियमित समीक्षा से बढ़ेगी क्षमता अधिकारियों ने कहा कि इस तरह की नियमित समीक्षा बैठकों से जोगबनी इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट की क्षमता में निरंतर वृद्धि होगी। इससे भारत–नेपाल के बीच व्यापारिक संबंध और मजबूत होंगे तथा सीमा प्रबंधन अधिक प्रभावी बन सकेगा। बैठक के अंत में डीएम और एलपीएआई चेयरमैन ने सभी एजेंसियों को निर्देश दिया कि तय बिंदुओं पर शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।


