आगरा में पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष शिवराज सिंह चौधरी हत्याकांड में अदालत ने 16 साल बाद फैसला सुनाते हुए दो आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। एडीजे-15 राजीव कुमार पालीवाल की अदालत ने गुड्डू चाहर उर्फ जोगेंद्र और अशोक चाहर को हत्या व आयुध अधिनियम के तहत दोषी मानते हुए उम्रकैद और 2.10 लाख रुपए के अर्थदंड से दंडित किया। वहीं बसंत को आयुध अधिनियम के मामले में दोषी पाते हुए तीन वर्ष के कारावास और 5 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई गई। साक्ष्यों के अभाव में अन्य आरोपियों को बरी कर दिया गया। अभियोजन के अनुसार, हाथरस के सादाबाद क्षेत्र के बिसावर निवासी राकेश कुमार ने थाना न्यू आगरा में मुकदमा दर्ज कराया था। उन्होंने बताया कि 21 मार्च 2010 को अपने भाई शिवराज सिंह चौधरी के मकान के उद्घाटन समारोह की तैयारियां चल रही थीं। सुबह करीब 9:15 बजे शिवराज सिंह चौधरी अपने साथियों के साथ निर्माणाधीन मार्केट में मौजूद थे। तभी मोटरसाइकिल और कार से पहुंचे आरोपियों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। गंभीर रूप से घायल शिवराज सिंह चौधरी को पुष्पांजलि अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मामले की विवेचना के बाद पुलिस ने गुड्डू चाहर उर्फ जोगेंद्र, अशोक चाहर समेत नौ आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया था। सुनवाई के दौरान वादी राकेश कुमार, प्रत्यक्षदर्शियों तथा पुलिस अधिकारियों समेत कुल 14 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। अदालत ने गवाहों की गवाही, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद गुड्डू चाहर उर्फ जोगेंद्र और अशोक चाहर को दोषी ठहराया। वहीं बसंत को आयुध अधिनियम के तहत दोषी मानते हुए सजा सुनाई गई। अन्य आरोपियों को पर्याप्त साक्ष्य न मिलने पर बरी कर दिया गया।


