बांका जिले के रजौन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में स्वास्थ्य विभाग की टीम के औचक निरीक्षण के दौरान प्रसूताओं से अवैध वसूली का मामला सामने आया है। जांच टीम ने आरोपों की पुष्टि होने के बाद संबंधित कर्मियों से पैसे वापस कराए, जिससे अस्पताल में हड़कंप मच गया। जानकारी के अनुसार, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी और डीपीएम बृजेश कुमार सिंह सहित स्वास्थ्य विभाग की एक टीम निरीक्षण के लिए रजौन सीएचसी पहुंची थी। टीम ने प्रसूता वार्ड में भर्ती महिलाओं से सीधे बातचीत की और उनसे किसी भी प्रकार की राशि लिए जाने के संबंध में पूछताछ की। डिलीवरी के बाद 1 हजार लेने का आरोप
इस दौरान नवादा थाना क्षेत्र के हरण बुजुर्ग गांव की प्रसूता करिश्मा कुमारी ने बताया कि डिलीवरी के बाद उनसे एक हजार रुपये लिए गए। वहीं, घुठिया गांव निवासी प्रसूता लक्ष्मी कुमारी ने 400 रुपये देने की बात कही, जबकि एक अन्य प्रसूता से 500 रुपये वसूले जाने की जानकारी मिली। टीका लगाने के नाम पर 50 रुपए लिए
जांच में यह भी सामने आया कि नवजात शिशुओं को बीसीजी टीका लगाने के नाम पर प्रत्येक बच्चे की मां से 50 रुपये लिए गए। इसके अतिरिक्त, प्रसूता कक्ष की सफाई के नाम पर भी सफाई कर्मियों द्वारा 50 रुपये की वसूली की जा रही थी। शिकायतों की पुष्टि होने के बाद जांच टीम ने तत्काल सभी पीड़ितों को उनकी राशि वापस दिलाई। अलग-अलग राशि लेकर आपस में बांट ली
मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब दैनिक भास्कर द्वारा की गई पड़ताल में खुलासा हुआ कि अस्पताल में तैनात कुछ एएनएम और जीएनएम मिलकर प्रसूताओं से अवैध वसूली कर रही थीं। आरोप है कि एएनएम रेखा कुमारी, रिंकू कुमारी और जीएनएम सुप्रिया कुमारी ने तीन प्रसूताओं से अलग-अलग राशि लेकर आपस में बांट ली थी। वहीं, एएनएम नीलम कुमारी पर बीसीजी टीकाकरण के नाम पर पैसे लेने का आरोप लगा है। बताया गया कि बिना पैसे लिए बीसीजी का टीका नहीं दिया जाता था और यह अवैध वसूली का खेल लंबे समय से चल रहा था। इस दौरान सफाई कर्मियों द्वारा भी वसूली का मामला उजागर हुआ। सीएस बोले- दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा
सीएस डॉ जितेंद्र कुमार ने बताया कि उक्त मामले में कार्रवाई की जा रही है, और जो भी दोषी पाए जाएंगे उसे बख्शा नहीं जाएगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में यह कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी कई बार गर्भवती महिलाओं से पैसे लेने की शिकायतें सामने आ चुकी हैं, लेकिन विभागीय चेतावनी के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ है। लोगों का आरोप है कि बिना पैसे दिए अस्पताल में कोई काम नहीं होता और कई बार जानबूझकर प्रसव में देरी कर मरीजों को रेफर करने की धमकी दी जाती है। पैसा नहीं देने पर प्रसूताओं को परेशान किया जाता
ग्रामीणों ने बताया कि डिलीवरी के बाद एएनएम द्वारा एक हजार रुपये तक की मांग की जाती है और पैसा नहीं देने पर प्रसूताओं को परेशान किया जाता है। इस कारण मजबूरी में परिजन पैसे देने को विवश हो जाते हैं।फिलहाल इस मामले के उजागर होने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। बांका जिले के रजौन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में स्वास्थ्य विभाग की टीम के औचक निरीक्षण के दौरान प्रसूताओं से अवैध वसूली का मामला सामने आया है। जांच टीम ने आरोपों की पुष्टि होने के बाद संबंधित कर्मियों से पैसे वापस कराए, जिससे अस्पताल में हड़कंप मच गया। जानकारी के अनुसार, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी और डीपीएम बृजेश कुमार सिंह सहित स्वास्थ्य विभाग की एक टीम निरीक्षण के लिए रजौन सीएचसी पहुंची थी। टीम ने प्रसूता वार्ड में भर्ती महिलाओं से सीधे बातचीत की और उनसे किसी भी प्रकार की राशि लिए जाने के संबंध में पूछताछ की। डिलीवरी के बाद 1 हजार लेने का आरोप
इस दौरान नवादा थाना क्षेत्र के हरण बुजुर्ग गांव की प्रसूता करिश्मा कुमारी ने बताया कि डिलीवरी के बाद उनसे एक हजार रुपये लिए गए। वहीं, घुठिया गांव निवासी प्रसूता लक्ष्मी कुमारी ने 400 रुपये देने की बात कही, जबकि एक अन्य प्रसूता से 500 रुपये वसूले जाने की जानकारी मिली। टीका लगाने के नाम पर 50 रुपए लिए
जांच में यह भी सामने आया कि नवजात शिशुओं को बीसीजी टीका लगाने के नाम पर प्रत्येक बच्चे की मां से 50 रुपये लिए गए। इसके अतिरिक्त, प्रसूता कक्ष की सफाई के नाम पर भी सफाई कर्मियों द्वारा 50 रुपये की वसूली की जा रही थी। शिकायतों की पुष्टि होने के बाद जांच टीम ने तत्काल सभी पीड़ितों को उनकी राशि वापस दिलाई। अलग-अलग राशि लेकर आपस में बांट ली
मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब दैनिक भास्कर द्वारा की गई पड़ताल में खुलासा हुआ कि अस्पताल में तैनात कुछ एएनएम और जीएनएम मिलकर प्रसूताओं से अवैध वसूली कर रही थीं। आरोप है कि एएनएम रेखा कुमारी, रिंकू कुमारी और जीएनएम सुप्रिया कुमारी ने तीन प्रसूताओं से अलग-अलग राशि लेकर आपस में बांट ली थी। वहीं, एएनएम नीलम कुमारी पर बीसीजी टीकाकरण के नाम पर पैसे लेने का आरोप लगा है। बताया गया कि बिना पैसे लिए बीसीजी का टीका नहीं दिया जाता था और यह अवैध वसूली का खेल लंबे समय से चल रहा था। इस दौरान सफाई कर्मियों द्वारा भी वसूली का मामला उजागर हुआ। सीएस बोले- दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा
सीएस डॉ जितेंद्र कुमार ने बताया कि उक्त मामले में कार्रवाई की जा रही है, और जो भी दोषी पाए जाएंगे उसे बख्शा नहीं जाएगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में यह कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी कई बार गर्भवती महिलाओं से पैसे लेने की शिकायतें सामने आ चुकी हैं, लेकिन विभागीय चेतावनी के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ है। लोगों का आरोप है कि बिना पैसे दिए अस्पताल में कोई काम नहीं होता और कई बार जानबूझकर प्रसव में देरी कर मरीजों को रेफर करने की धमकी दी जाती है। पैसा नहीं देने पर प्रसूताओं को परेशान किया जाता
ग्रामीणों ने बताया कि डिलीवरी के बाद एएनएम द्वारा एक हजार रुपये तक की मांग की जाती है और पैसा नहीं देने पर प्रसूताओं को परेशान किया जाता है। इस कारण मजबूरी में परिजन पैसे देने को विवश हो जाते हैं।फिलहाल इस मामले के उजागर होने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।


