दुनिया में तनाव का माहौल और गर्म हो गया है। उत्तर कोरिया ने अपने संविधान में बड़ा बदलाव किया है। अब अगर उत्तर कोरियाई तानाशाह किम जोंग उन की हत्या हो जाती है या उनके न्यूक्लियर हथियारों पर कोई खतरा मंडराता है तो बिना किसी आदेश के न्यूक्लियर हमला हो जाएगा।
यह कदम इरान में अमेरिका-इजराइल के हमलों के बाद उठया गया है, जहां सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद इरान ने भी अपने न्यूक्लियर कमांड में बदलाव किए। ये दोनों घटनाएं दुनिया के लिए चेतावनी बन गई हैं।
किम की सुरक्षा को लेकर नया कानून
उत्तर कोरिया ने हाल ही में अपने संविधान में संशोधन किया। दक्षिण कोरिया की खुफिया एजेंसी के मुताबिक, अब अगर विदेशी हमले में किम जोंग उन मारे जाते हैं या न्यूक्लियर कमांड सिस्टम पर खतरा होता है तो फौरन न्यूक्लियर हमला लॉन्च हो जाएगा। यह बदलाव मार्च में हुआ था, लेकिन अब सार्वजनिक हो रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इरान के सुप्रीम लीडर की मौत ने प्योंगयांग को बहुत डरा दिया है। अमेरिका-इजराइल के हमलों में इरान के कई बड़े नेता मारे गए। इसके बाद उत्तर कोरिया ने सोचा कि ऐसी स्ट्राइक उस पर भी हो सकती है। इसलिए उन्होंने यह ‘ऑटोमैटिक रिटेलिएशन’ नीति बना ली।
इरान का सबक और न्यूक्लियर कमांड बदलाव
इरान में अमेरिका-इजराइल के हमलों के बाद वहां के न्यूक्लियर कमांड सिस्टम में बड़े बदलाव किए गए। अब कमांड को ज्यादा डिस्पर्स्ड और सुरक्षित बनाया गया है ताकि लीडरशिप चली जाए तो भी हमला रुक न जाए। ये बदलाव अब दूसरे देशों के लिए सबक बन गए हैं।
उत्तर कोरिया इरान वाले मामले को करीब से देख रहा था। सुप्रीम लीडर की मौत के बाद प्योंगयांग ने तुरंत कदम उठाया। अब उनका नया नियम साफ कहता है- लीडर चला गया तो भी न्यूक्लियर बटन दब जाएगा।
दुनिया पर क्या असर पड़ेगा?
उत्तर कोरिया के फैसले को लेकर अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान चिंतित हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि यह ‘डेकैपिटेशन स्ट्राइक’ यानी लीडरशिप को निशाना बनाने की रणनीति को बेकार बना देता है।
अब कोई भी देश सोचेगा कि अगर किम पर हमला किया तो पूरा इलाका तबाह हो सकता है। उत्तर कोरिया पहले से ही न्यूक्लियर पावर है। अब संविधान में इसे और मजबूत कर दिया गया है।


