Idiopathic Guttate Hypomelanosis: त्वचा पर दिखने लगे छोटे-छोटे सफेद दाग, हो सकता है इडियोपैथिक गुटेट जानें लक्षण और कारण

Idiopathic Guttate Hypomelanosis: त्वचा पर दिखने लगे छोटे-छोटे सफेद दाग, हो सकता है इडियोपैथिक गुटेट जानें लक्षण और कारण

Idiopathic Guttate Hypomelanosis Symptoms: क्या आपने कभी अपने हाथों या पैरों पर गौर किया है कि वहां छोटे-छोटे, बिल्कुल चावल के दाने या पानी की बूंद जैसे सफेद धब्बे से बन गए हैं? अक्सर जब लोग पहली बार इन्हें देखते हैं, तो घबरा जाते हैं। मन में सबसे पहला ख्याल यही आता है कि कहीं यह सफेद दाग वाली बीमारी (विटिलिगो) तो नहीं है? लेकिन आपको घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। हर सफेद दाग कोई बीमारी नहीं होता। डॉक्टरी भाषा में इन्हें इडियोपैथिक गुटेट हाइपोमेलेनोसिस (Idiopathic Guttate Hypomelanosis) कहते हैं। नाम सुनने में भले ही बहुत बड़ा और मुश्किल लगे, लेकिन सच यह है कि ये बिल्कुल बेअसर और बेहानिकारक धब्बे होते हैं। इनसे आपकी सेहत को कोई खतरा नहीं होता। आइए समझते हैं कि ये छोटे-छोटे निशान क्यों पड़ जाते हैं और इनके लक्षण क्या हैं।

इडियोपैथिक गुटेट हाइपोमेलेनोसिस नाम का मतलब क्या है?

क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, इस बीमारी का नाम थोड़ा लंबा और मुश्किल लगता है, लेकिन इसका अर्थ बहुत ही सरल है। इडियोपैथिक (Idiopathic) का मतलब सटीक कारण पूरी तरह से ज्ञात न हो। गुटेट (Guttate) यानी पानी की बूंदों के आकार जैसे दिखने वाले निशान। हाइपोमेलेनोसिस (Hypomelanosis), त्वचा में मेलेनिन (पिगमेंट जो हमारी स्किन को रंग देता है) की कमी होना। यानी, जब त्वचा के किसी छोटे हिस्से में रंग बनाने वाला पिगमेंट कम हो जाता है, तो वहाँ पानी की बूंद जैसे छोटे-छोटे हल्के या सफेद रंग के धब्बे बनने लगते हैं।

इडियोपैथिक गुटेट के मुख्य लक्षण

डर्मनेट के अनुसार, इस स्थिति को पहचानना बहुत आसान है क्योंकि इसमें त्वचा पर कोई बड़ा बदलाव या तकलीफ नहीं होती। इसके मुख्य लक्षण निम्नलिखित हैं;

  • छोटे-छोटे निशान।
  • शरीर के खास हिस्सों पर होना।
  • इन निशानों में कोई खुजली, दर्द, जलन या सूजन नहीं होती।
  • इन सफेद धब्बों की सतह बिल्कुल चिकनी (Smooth) होती है।

आखिर त्वचा पर ये सफेद दाग बनते क्यों हैं?

हालांकि इसका कोई एक अकेला कारण नहीं है, लेकिन डॉक्टर्स का मानना है कि इसके पीछे ये कुछ आम वजहें होती हैं;

  • सालों की धूप का असर- जब हम सालों तक धूप में आते-जाते हैं, तो सूरज की किरणें त्वचा में रंग बनाने वाली कोशिकाओं को धीरे-धीरे कमजोर कर देती हैं। इसी वजह से जो हिस्से धूप में खुले रहते हैं, वहां ये धब्बे बनने लगते हैं।
  • उम्र का बढ़ना- जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है (खासकर 40 साल के बाद), हमारी स्किन में रंग बनाने की क्षमता थोड़ी कम होने लगती है। 40 की उम्र पार कर चुके ज्यादातर लोगों में ये छोटे-छोटे निशान दिखना बहुत आम बात है।
  • जीन्स या आनुवंशिकता- अगर आपके घर में माता-पिता या किसी बड़े को यह समस्या रही है, तो हो सकता है कि आपको भी यह ज्यादा आसानी से हो जाए।
  • त्वचा पर रगड़ या हल्की चोट- बार-बार कठोर स्क्रबर से त्वचा को रगड़ने या कोई हल्की-फुल्की चोट लगने से भी उस जगह का रंग हल्का पड़ सकता है।

क्या इनसे डरने की कोई बात है?

बिल्कुल नहीं! ये निशान किसी भी तरह का स्किन कैंसर नहीं हैं और न ही ये छुआछूत की बीमारी हैं जो एक इंसान से दूसरे में फैले। ये पूरी तरह से सुरक्षित हैं।हां, कुछ लोगों को बस यह सोचकर खराब लगता है कि हाथों-पैरों पर ये दाग दिखने में अच्छे नहीं लग रहे।

क्या इनका इलाज जरूरी है?

ये कोई बीमारी नहीं हैं, इसलिए डॉक्टरी हिसाब से इनके इलाज की कोई खास जरूरत नहीं होती। फिर भी, अगर आप इन्हें कम करना चाहते हैं तो कुछ बातें ध्यान में रख सकते हैं;

  • धूप से बचाव (सनस्क्रीन)।
  • इन्हें हटाना ही चाहते हैं, तो स्किन के डॉक्टर (डर्मेटोलॉजिस्ट) आपको कुछ खास क्रीम या हल्की लेजर थेरेपी बता सकते हैं, जिससे त्वचा का रंग वापस आने में मदद मिलती है।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

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