राजस्थान हाईकोर्ट से रिटायरमेंट के 16 साल बाद एक सरकारी वकील को राहत मिली है। जस्टिस मुन्नूरी लक्ष्मण की एकलपीठ ने सरकारी वकील के खिलाफ दिए गए आरोप पत्र और उसके आधार पर की गई पूरी कार्रवाई को रद्द कर दिया है। अदालत ने घटना के 13 साल बाद शुरू की गई जांच को भी गलत मानते हुए सरकार पर 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। अदालत ने छोटी प्रकृति के मामलों में इतनी गंभीर कार्रवाई करने को गलत ठहराया। यह आदेश रिटायर अपर लोक अभियोजक (एपीपी) बृज बल्लभ शर्मा की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस मुन्नूरी लक्ष्मण की एकलपीठ ने दिया। कार्रवाई बदले की भावना को दर्शाती है
अदालत ने आदेश में कहा- सक्षम अधिकारी ने साल 1994 में हुई किसी लिपिकीय गलती को लेकर साल 2008 में 16 सीसीए के तहत कार्रवाई शुरू की। 2 साल बाद, एपीपी के रिटायरमेंट के तीन महीने पहले, मई 2010 में एपीपी को नोटिस जारी करके जांच को 17 सीसीए में बदल दिया गया। अगस्त माह में याचिकाकर्ता रिटायर हो गया, जिसके कारण उसे समय पर रिटायरमेंट परिलाभ भी नहीं मिले। अदालत ने कहा- हमारी नजर में यह पूरी कार्रवाई बदले की भावना से की गई थी। यह आदेश रिटायर अपर लोक अभियोजक (एपीपी) बृज बल्लभ शर्मा की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस मुन्नूरी लक्ष्मण की एकलपीठ ने दिया। अधिवक्ता हर्षवर्धन नंदवाना ने बताया- याचिकाकर्ता पर साल 1994 में झालावाड़ के अकलेरा में एपीपी रहने के दौरान चालान पेश करने की तिथियों का रजिस्टर में गलत उल्लेख करने सहित अन्य गलतियों के आरोप लगाए गए। जबकि इन कामों की जिम्मेदारी कार्यालय के क्लर्क पर थी, जिसे हमने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।


