भगवान काशी विश्वनाथ को नहीं सताएगी गर्मी:अक्षय तृतीया से लगेगी रजत जलधारी,गर्मी में सद‍ियों पुरानी है परंपरा

देवाधिदेव भगवान शिव की नगरी काशी में इस वर्ष भी सनातन परंपरा के अनुसार भव्य जलाभिषेक अनुष्ठान का शुभारंभ आगामी 20 अप्रैल को अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर होगा। यह अनुष्ठान विश्व प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर में प्रारंभ होकर श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा, अर्थात रक्षाबंधन तक निरंतर चलेगा। मान्यता है कि जहाँ भगवान विष्णु को अलंकार प्रिय हैं, वहीं भगवान शिव को जल की धारा अत्यंत प्रिय है। इसी आस्था के तहत हर वर्ष काशी में यह विशेष परंपरा निभाई जाती है, जिसमें भगवान विश्वनाथ का अभिषेक जल की अनवरत धारा से किया जाता है। सुबह से शाम तक होगा जलाभिषेक मंदिर के वरिष्ठ पुजारी श्रीकांत मिश्रा इस अवधि में प्रतिदिन प्रातः काल से सायंकाल तक फव्वारे के माध्यम से भगवान का सतत जलाभिषेक किया जाएगा। भीषण गर्मी को ध्यान में रखते हुए यह परंपरा विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि भगवान शिव को ‘जलाधिनाथ’ और ‘नीलकंठ’ के रूप में शीतलता प्रदान करने का यह एक प्रतीकात्मक और आध्यात्मिक प्रयास है। श्रद्धालुओं के लिए यह समय अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। देश-विदेश से लाखों भक्त इस दौरान काशी पहुंचकर बाबा विश्वनाथ के दर्शन एवं जलाभिषेक का पुण्य लाभ प्राप्त करते हैं।

​ 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *