समस्तीपुर जिला में भीषण गर्मी से पहले पीएचईडी विभाग अलर्ट मोड में हैं। शनिवार को चापाकल मरमती टीम को अलग-अलग प्रखंडों के लिए रवाना किया गया। कलेक्ट्रेट परिसर में डीएम रोशन कुशवाहा ने मरम्मती टीम को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस मौके पर डीएम ने कहा कि गर्मी के दिनों में पानी की किल्लत न हो, इसके लिए जिले के 20 प्रखंडों के लिए अलग-अलग 20 टीम चापाकल मरम्मती के लिए रवाना किया गया है। टीम में शामिल सदस्य खराब चापाकलों को ठीक करेंगे। नल-जल योजना के बावजूद अभी भी कई ऐसे इलाके हैं, जहां पर नल का पानी नहीं पहुंचा है। ऐसी जगह पर पानी के लिए चापाकल ही एक मात्र सहारा है। ऐसे चिन्हित किए गए सभी चापाकलों को ठीक करने का निर्देश दिया गया है। बारिश कम होने से पानी का लेयर गिरने की संभावना वहीं, पीएचईडी विभाग के इंजीनियर का कहना है कि पिछले साल जिले में कम बारिश हुई थी। ऐसी स्थिति में कई इलाकों में अभी से ही भूगर्भीय जल स्रोत का स्तर नीचे गिरने लगा है। ऐसे में विभाग की ओर से पूर्व से ही तैयारी शुरू कर दी गई है। ताकि गर्मी में लोगों को पेयजल के लिए संकट का सामना करना ना पड़े। समस्तीपुर जिला में भीषण गर्मी से पहले पीएचईडी विभाग अलर्ट मोड में हैं। शनिवार को चापाकल मरमती टीम को अलग-अलग प्रखंडों के लिए रवाना किया गया। कलेक्ट्रेट परिसर में डीएम रोशन कुशवाहा ने मरम्मती टीम को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस मौके पर डीएम ने कहा कि गर्मी के दिनों में पानी की किल्लत न हो, इसके लिए जिले के 20 प्रखंडों के लिए अलग-अलग 20 टीम चापाकल मरम्मती के लिए रवाना किया गया है। टीम में शामिल सदस्य खराब चापाकलों को ठीक करेंगे। नल-जल योजना के बावजूद अभी भी कई ऐसे इलाके हैं, जहां पर नल का पानी नहीं पहुंचा है। ऐसी जगह पर पानी के लिए चापाकल ही एक मात्र सहारा है। ऐसे चिन्हित किए गए सभी चापाकलों को ठीक करने का निर्देश दिया गया है। बारिश कम होने से पानी का लेयर गिरने की संभावना वहीं, पीएचईडी विभाग के इंजीनियर का कहना है कि पिछले साल जिले में कम बारिश हुई थी। ऐसी स्थिति में कई इलाकों में अभी से ही भूगर्भीय जल स्रोत का स्तर नीचे गिरने लगा है। ऐसे में विभाग की ओर से पूर्व से ही तैयारी शुरू कर दी गई है। ताकि गर्मी में लोगों को पेयजल के लिए संकट का सामना करना ना पड़े।


