ग्राउंड रिपोर्ट- हेमंत जाट
Tribal School Dhar मध्यप्रदेश के धार जिले के ग्रामीण अंचल में शिक्षा का स्तर बेहतर बनाने के लिए सरकार करोड़ों रुपए खर्च कर रही है, लेकिन दावों के उलट जमीनी हकीकत अलग है। आदिवासी बाहुल्य धार जिले के तिरला ब्लॉक में पर्वतपुरा हाईस्कूल की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। जिला मुख्यालय से तकरीबन 30 किमी दूर सतीपुरा ग्राम पंचायत के अंतर्गत पर्वतपुरा में पहली से दसवीं तक की कक्षाएं महज तीन कमरों में संचालित हो रही हैं। कमरों की कमी के कारण शिक्षकों ने जुगाड़ से कक्षाओं के बीच पर्दे लगा रखे हैं, जो ही दीवार का काम कर रहे हैं। इस ग्राउंड रिपोर्ट के बाद शिक्षा विभाग एक्शन में आया और अधिकारियों ने निरीक्षण किया…। इसके बाद कई फैसले लिए गए…।
एक तरफ पहली कक्षा के बच्चे वर्णमाला सीख रहे हैं, तो पर्दे के दूसरी तरफ दसवीं के छात्र बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। शोर-शराबे में न तो छोटे बच्चे ठीक से पढ़ पाते हैं और न ही बड़े बच्चों की एकाग्रता बन पाती है। एक कमरे में पहली से पांचवी तो दूसरे कमरे में 6 से 8 तथा तीसरे कमरे में 9 वीं और 10 वीं की कक्षाएं साथ-साथ लग र ही है। प्रायमरी में 45, छटी से 8 वीं तक 22 और हाईस्कूल में 35 विद्यार्थी अध्यनरत है। स्कूल में बच्चों की समस्या को ग्रामीणों द्वारा कई बार जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों को आवेदन-ज्ञापन भी सौंपे गए। लेकिन सुनवाई तो दूर कोई झांकने नहीं आया। पिछले साल ट्राइबल विभाग से तत्कालीन सहायक आयुक्त नरोत्तम वरकड़े ने दौरा किया था। तब स्कूल भवन निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजने की बात कही थी।

गर्दन घुमाते ही बदल जाती है क्लास
स्कूल में पर्याप्त बैठक व्यवस्था नहीं होने से शिक्षकों द्वारा परर्दे लगाए गए हैं। साथ ही यहां बच्चों को अलग-अलग दिशा में मुंह कर बैठना पड़ रहा है। गलती से अगर कोई बच्चा गर्दन घुमाए तो सामने दूसरी कक्षा का बोर्ड दिखाई देने लगता है। यह स्थित एक दिन की नहीं बल्कि रोज की है। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई का सपना कैसे पूरा होगा और कैसे भविष्य संवार पाएगा यह अपने आप में सवाल है।
बेटी पढ़ाओ और स्कूल चले हम अभियान जैसे नारे चिढ़ा रहे मुंह
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ और स्कूल चले हम जैसे नारे मुंह चिढ़ाते हैं, जब एक ही छत के नीचे प्रायमरी, मिडिल और हाईकूल चल रही हो। शिक्षा का अधिकार अधिनियम की भी यहां धज्जियां उड़ रही है। पर्वतपुरा संकुल केंद्र है और उसके अंतर्गत 45 छोटे-बड़े अन्य स्कूल आते हैं। जब संकुल स्कूल की ऐसी हालत है, तो फिर अन्य स्कूलों का अंदाजा खुद लगाया जा सकता है।
बच्चे अंदर तो स्टॉफ बैठता है बाहर
पर्वतपुरा स्कूल में स्टॉफ में पांच स्थाई शिक्षक और पांच अतिथि है। छठवीं से 10वीं तक बच्चों को पढ़ाने के लिए स्थाई टीचर के रूप में एकमात्र शिक्षक मुकुंद वास्केल है, जो प्रभारी प्राचार्य भी हैं। जब कक्षा लगती है, तो पूरा स्टॉफ बाहर खुले में कुर्सी लगाकर बैठता है। जगह ही इतनी नहीं है कि स्टॉफ भी अंदर बैठ सके। धूप, गर्मी और बारिश तीनों ही मौसम में स्टॉफ को बाहर रहना पड़ता है। स्कूल में शौचालय भी नहीं है। तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद स्कूल 2002 से जर्जर भवन में चल रहा है। संकुल की बैठक के लिए भी उमरबन के उकालाखेड़ी जाना पड़ता है, जो लगभग 30 किमी दूर है।
ये है समस्या
-2002 से पर्वतपुरा में हाईस्कूल का संचालन। इसके पहले 8 वीं तक स्कूल थी।
-वर्तमान भवन में बच्चों के बैठने के लिए पर्याप्त जगह नहीं।
-खिड़किया कला, सेमलीपुरा, बेडिय़ा, अजनाई, कामता, सतीपुरा, कच्छावदा आदि गांव के बच्चे पढऩे आते हैं।
-पर्वतपुरा के अलावा आसपास तिरला, उमरबन, अमझेरा और जीराबाद हाईस्कूल है। ये सभी जगह गांव से 15 से 20 किमी दूर है।
-पहाड़ी गांव होने से बस सुविधा नहीं।
कई बार आवेदन दिए…उम्मीद छोड़ दी…
गांव में स्कूल की हालत बेहद खराब है। जर्जर बिल्डिंग में तीन कमरों में स्कूल लग रही है। इस समस्या को लेकर कई बार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से मिलकर व्यक्तिगत आवेदन देकर मांग कर चुका हूं। लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं। हमने तो हम उम्मीद छोड़ दी है।
-राजेंद्र बघेल, सरपंच सतीपुरा ग्राम पंचायत
बड़े अधिकारियों को अवगत कराया है
स्कूल में बच्चों सहित स्टॉफ के बैठने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। जैसे-तैसे पढ़ाई करा रहे हैं। वरिष्ठ अधिकारियों को भी पत्राचार के माध्यम से अवगत करा दिया है।
-मुकुंद वास्केल, प्रभारी प्राचार्य
पत्रिका इम्पैक्ट…पर्दे वाली पाठशाला की बदलेगी तस्वीर…

चार साल से पत्राचार के बावजूद नवीन भवन की मंजूरी का इंतजार कर रहे पर्वतपुरा हाईस्कूल के विद्यार्थियों के लिए अब कुछ राहत की उम्मीद जगी है। ‘पत्रिका’ में स्कूल की बदहाल व्यवस्था और पर्दों के सहारे चल रही कक्षाओं की खबर प्रकाशित होने के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आया है। मंगलवार को तिरला बीईओ डॉ. शैलेंद्र त्रिवेदी पर्वतपुरा पहुंचे और स्कूल का निरीक्षण कर स्टॉफ व ग्रामीणों से चर्चा की। एक ही भवन में पहली से दसवीं तक की कक्षाएं संचालित होने से पैदा हो रही परेशानी को देखते हुए अब 27 अगस्त से स्कूल दो पाली में संचालित करने का निर्णय लिया गया है। नई व्यवस्था के तहत पहली से पांचवीं तक की कक्षाएं सुबह 8 से 11 बजे तक और छठी से दसवीं तक की कक्षाएं सुबह 11 से शाम 5 बजे तक संचालित होंगी। इससे एक साथ सभी कक्षाओं के बैठने की समस्या कुछ हद तक कम होगी।
पत्रिका ने उठाई आवाज, विभाग ने लिया संज्ञान
पर्वतपुरा और आसपास के 20 से 30 किलोमीटर क्षेत्र में विद्यार्थियों के लिए कोई दूसरा हाईस्कूल नहीं है। ऐसे में गांव के इसी स्कूल पर बड़ी संख्या में बच्चे निर्भर हैं। जर्जर भवन और सीमित कमरों के कारण विद्यार्थी और शिक्षक लंबे समय से परेशानी झेल रहे थे। स्कूल की स्थिति सामने आने के बाद ‘पत्रिका’ ने विद्यार्थियों की समस्या को प्रमुखता से उठाया। खबर प्रकाशित होने के बाद जनजातीय विकास विभाग की सहायक आयुक्त पारुल जैन के निर्देश पर तिरला बीईओ को मौके पर भेजा गया। मंगलवार को बीईओ ने स्कूल पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और सुधार की संभावनाओं पर चर्चा की।
दो पाली में स्कूल, नए भवन की रिपोर्ट भेजी जाएगी
धार के तिरला बीईओ डॉ. शैलेंद्र त्रिवेदी वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर स्कूल पहुंचकर निरीक्षण किया है। भवन की समस्या है। विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर विभाग को सौंपी जाएगी। दो पाली में स्कूल संचालन का निर्णय लिया गया है, जिससे कुछ हद तक समस्या हल हो सकती है।
टीनशेड के नीचे भी बनेगी वैकल्पिक व्यवस्था
निरीक्षण के दौरान स्कूल में एक साथ सभी विद्यार्थियों के बैठने की समस्या सामने आई। अधिकारियों ने स्कूल के बाहरी परिसर में मौजूद टीनशेड के नीचे भी वैकल्पिक बैठक व्यवस्था बनाने पर विचार किया। इसके लिए आवश्यक व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि दो पाली में संचालन से तत्काल समस्या कम होने की उम्मीद है, लेकिन स्थायी समाधान अभी भी नए भवन की मंजूरी पर निर्भर है।
चार साल से सिर्फ पत्राचार, भवन की मंजूरी का इंतजार
पर्वतपुरा में वर्ष 2002 से हाईस्कूल संचालित हो रहा है। इससे पहले यहां मिडिल स्कूल था। संस्था का उन्नयन होने के बाद गांव के बच्चों को दसवीं तक की पढ़ाई की सुविधा तो मिल गई, लेकिन भवन की समस्या लगातार बनी रही। स्कूल प्राचार्य और बीईओ कार्यालय की ओर से वर्ष 2022 से लगातार नवीन भवन के लिए पत्राचार किया जा रहा है। पिछले चार वर्षों से हर साल प्रस्ताव भेजे जा रहे हैं, लेकिन अब तक भवन की स्वीकृति नहीं मिल सकी है। नतीजा यह है कि सिर्फ तीन कमरों में पहली से दसवीं तक की कक्षाएं संचालित करनी पड़ रही हैं। एक ही छत के नीचे अलग-अलग कक्षाओं की पढ़ाई होने से शैक्षणिक वातावरण प्रभावित होता है। व्यवस्था संभालने के लिए कक्षाओं के बीच पर्दे लगाए गए हैं, जिससे एक कमरे में अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों को बैठाकर पढ़ाया जा रहा है।
20-30 किमी तक नहीं दूसरा हाईस्कूल
पर्वतपुरा पहाड़ी क्षेत्र का गांव है। आसपास 20 से 30 किलोमीटर के दायरे में दूसरा हाईस्कूल नहीं होने के कारण यहां की शिक्षा व्यवस्था और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। ऐसे में यदि स्कूल का भवन नहीं सुधरा तो विद्यार्थियों को आगे भी सीमित संसाधनों में पढ़ाई करने की मजबूरी बनी रहेगी। दो पाली की व्यवस्था से फिलहाल कक्षाओं के संचालन में राहत मिलेगी, लेकिन ग्रामीणों और विद्यार्थियों की नजर अब नवीन भवन की स्वीकृति पर है।

