प्रदेश के सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने और ड्रॉप आउट बच्चों को मुख्यधारा में वापस लाने के लिए शिक्षा विभाग ने कमर कस ली है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने प्रवेशोत्सव-2026 के लिए विस्तृत गाइडलाइन जारी कर दी है। इस बार अभियान को स्मार्ट बनाते हुए डेटा एंट्री के लिए डिजिटल मॉड्यूल का उपयोग किया जाएगा। 25 मार्च से शुरू होने वाले इस सर्वे के तहत शिक्षक और अधिकारी तपती धूप में घर-घर जाकर यह सुनिश्चित करेंगे कि ढाणी से लेकर वार्ड तक कोई भी बच्चा शिक्षा की दहलीज से दूर न रहे। आंगनबाड़ी और स्थानीय निकायों के साथ तालमेल इस अभियान की सफलता की मुख्य कड़ी साबित होगा।
अभियान की 5 बड़ी बातें
इस बार सर्वे की एंट्री शिक्षक ऐप के डिजिटल प्रवेशोत्सव मॉड्यूल में रियल-टाइम की जाएगी। इससे डेटा में हेरफेर की गुंजाइश खत्म होगी। शिक्षकों को चार समूहों में बांटा गया है। हर चरण में एक नया समूह घर-घर जाएगा, ताकि स्कूल का नियमित कार्य भी प्रभावित न हो। संयुक्त निदेशक से लेकर पीईईओ तक के अधिकारियों को फील्ड में उतरना होगा। निरीक्षण की रिपोर्ट निर्धारित प्रारूप-2 में ईमेल करनी होगी। यदि कोई घर सर्वे से वंचित रह जाता है, तो संबंधित कार्मिक को अगले 5 दिनों में दोबारा संपर्क करना अनिवार्य होगा।
कोई भी बच्चा विद्यालय से वंचित न रहे
जिला शिक्षा अधिकारी मुख्यालय माध्यमिक राजेन्द्र गग्गड ने कहा कि यह अभियान केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि हर बच्चे को शिक्षा के अधिकार से जोड़ने का संकल्प है।
प्रवेशोत्सव’ का पूरा गणित
अभियान को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के लिए विभाग ने इसे डेटा-आधारित बनाया है। इसकी मुख्य सांख्यिकी इस प्रकार है।
विवरण महत्वपूर्ण जानकारी
- लक्ष्य आयु वर्ग- 3 वर्ष से 18 वर्ष तक के सभी बालक-बालिकाएं
- सर्वे की शुरुआत – 25 मार्च 2026 से
- अभियान की तारीखें- 27 मार्च, 06 अप्रेल, 10 अप्रेल और 15 अप्रेल
- कार्मिकों का विभाजन – प्रत्येक तिथि पर 25 प्रतिशत कार्मिक क्षेत्र में, 75 प्रतिशत स्कूल में
- निरीक्षण लक्ष्य – अधिकारियों के लिए 100 प्रतिशत निरीक्षण का लक्ष्य अनिवार्य


