हाल ही में सोने की कीमतों में आई गिरावट ने निवेशकों का ध्यान खींचा है और बाजार में नई चर्चा शुरू हो गई है। बता दें कि वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की ताजा रिपोर्ट के अनुसार मार्च महीने में सोने की कीमतों में करीब 12 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो जून 2013 के बाद सबसे कमजोर प्रदर्शन माना जा रहा है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, सोना लगभग 4608 डॉलर प्रति औंस तक फिसल गया। हालांकि, साल की कुल स्थिति अभी भी सकारात्मक बनी हुई है, जिससे यह संकेत मिलता है कि लंबी अवधि में निवेशकों का भरोसा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
गौरतलब है कि इस गिरावट के पीछे कई अहम कारण सामने आए हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि वैश्विक स्तर पर सोने से जुड़े फंडों से बड़ी निकासी हुई, खासकर उत्तरी अमेरिका और यूरोप में। वहीं एशिया में कुछ निवेश बढ़ा, लेकिन वह गिरावट की भरपाई करने के लिए पर्याप्त नहीं रहा।
बता दें कि कमोडिटी एक्सचेंज जैसे कॉमेक्स में भी निवेशकों ने अपनी पोजिशन कम की, जिससे कीमतों पर दबाव बढ़ा। इसके अलावा बाजार में कीमतों के ट्रेंड में बदलाव और बड़े निवेशकों द्वारा जोखिम कम करने की रणनीति ने भी सोने को नीचे खींचा।
मौजूद रिपोर्ट के अनुसार, खुदरा निवेशकों और बड़े फंड दोनों ने एक साथ अपने निवेश घटाए, जिससे बिकवाली का दबाव और बढ़ गया। साथ ही, कुछ केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने को गिरवी रखने और नकदी जुटाने जैसे कदमों ने भी बाजार में नकारात्मक संकेत दिए।
बताया जाता है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, खासकर ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी और मुद्रास्फीति की चिंता ने भी निवेशकों को सतर्क कर दिया है। ऐसे में कई निवेशकों ने जोखिम कम करने के लिए सोने से दूरी बनाई।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट पूरी तरह स्थायी नहीं है। रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि अप्रैल की शुरुआत में फिर से निवेश बढ़ने के संकेत मिले हैं और मध्यम अवधि में सोना निवेशकों के लिए आकर्षक बना रह सकता है।


