79000 की अवैध उगाही में पूर्व थानाध्यक्ष ने किया सरेंडर:सहरसा में झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देने का आरोप

79000 की अवैध उगाही में पूर्व थानाध्यक्ष ने किया सरेंडर:सहरसा में झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देने का आरोप

सहरसा के बैजनाथपुर थाना के पूर्व थानाध्यक्ष अमर ज्योति ने मंगलवार को सहरसा व्यवहार न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया। उन पर मधेपुरा जिले के एक निर्दोष युवक से 79 हजार रुपये की अवैध उगाही और उसे झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देने का आरोप है। यह मामला बैजनाथपुर थाना कांड संख्या 62/25 से संबंधित है। जानकारी के अनुसार, मधेपुरा के घलाढ थाना क्षेत्र के पथराहा गांव निवासी अविनाश कुमार और उनके पिता राम बहादुर रमन ने 7 मई 2025 को सहरसा के पुलिस अधीक्षक से शिकायत की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि तत्कालीन थानाध्यक्ष अमर ज्योति ने अविनाश को पटना से घर लौटते समय सहरसा रेलवे स्टेशन से उठाया और थाने ले गए। झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी गई थाने में एक सुनसान जगह पर अविनाश को थर्ड डिग्री का प्रयोग कर मादक पदार्थ तस्करी के झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी गई। इसके बाद उससे 79 हजार रुपये की मांग की गई। पिता से रकम मिलने के बाद ही युवक को छोड़ा गया। शिकायत के साथ पे-फोन के माध्यम से ली गई रिश्वत के साक्ष्य भी पुलिस को सौंपे गए थे। विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया मामले की गंभीरता को देखते हुए सहरसा पुलिस अधीक्षक हिमांशु ने एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। जांच की जिम्मेदारी सिमरी बख्तियारपुर के एसडीपीओ मुकेश ठाकुर को सौंपी गई। जांच के बाद आरोपी थानाध्यक्ष अमर ज्योति को निलंबित कर लाइन हाजिर किया गया, जिसके बाद से वह फरार चल रहे थे। घर की कुर्की-जब्ती का आदेश भी प्राप्त कर लिया था उनकी गिरफ्तारी नहीं होने पर सहरसा पुलिस ने न्यायालय से उनके घर की कुर्की-जब्ती का आदेश भी प्राप्त कर लिया था। आरोपी ने पटना हाईकोर्ट से जमानत लेने का प्रयास किया, लेकिन उसकी याचिका खारिज कर दी गई। इसके बाद मंगलवार को उन्होंने सहरसा कोर्ट में आत्मसमर्पण किया। यह सहरसा जिले का पहला मामला है, जब किसी थानाध्यक्ष पर उसी के थाने में आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। सहरसा के बैजनाथपुर थाना के पूर्व थानाध्यक्ष अमर ज्योति ने मंगलवार को सहरसा व्यवहार न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया। उन पर मधेपुरा जिले के एक निर्दोष युवक से 79 हजार रुपये की अवैध उगाही और उसे झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देने का आरोप है। यह मामला बैजनाथपुर थाना कांड संख्या 62/25 से संबंधित है। जानकारी के अनुसार, मधेपुरा के घलाढ थाना क्षेत्र के पथराहा गांव निवासी अविनाश कुमार और उनके पिता राम बहादुर रमन ने 7 मई 2025 को सहरसा के पुलिस अधीक्षक से शिकायत की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि तत्कालीन थानाध्यक्ष अमर ज्योति ने अविनाश को पटना से घर लौटते समय सहरसा रेलवे स्टेशन से उठाया और थाने ले गए। झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी गई थाने में एक सुनसान जगह पर अविनाश को थर्ड डिग्री का प्रयोग कर मादक पदार्थ तस्करी के झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी गई। इसके बाद उससे 79 हजार रुपये की मांग की गई। पिता से रकम मिलने के बाद ही युवक को छोड़ा गया। शिकायत के साथ पे-फोन के माध्यम से ली गई रिश्वत के साक्ष्य भी पुलिस को सौंपे गए थे। विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया मामले की गंभीरता को देखते हुए सहरसा पुलिस अधीक्षक हिमांशु ने एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। जांच की जिम्मेदारी सिमरी बख्तियारपुर के एसडीपीओ मुकेश ठाकुर को सौंपी गई। जांच के बाद आरोपी थानाध्यक्ष अमर ज्योति को निलंबित कर लाइन हाजिर किया गया, जिसके बाद से वह फरार चल रहे थे। घर की कुर्की-जब्ती का आदेश भी प्राप्त कर लिया था उनकी गिरफ्तारी नहीं होने पर सहरसा पुलिस ने न्यायालय से उनके घर की कुर्की-जब्ती का आदेश भी प्राप्त कर लिया था। आरोपी ने पटना हाईकोर्ट से जमानत लेने का प्रयास किया, लेकिन उसकी याचिका खारिज कर दी गई। इसके बाद मंगलवार को उन्होंने सहरसा कोर्ट में आत्मसमर्पण किया। यह सहरसा जिले का पहला मामला है, जब किसी थानाध्यक्ष पर उसी के थाने में आपराधिक मामला दर्ज किया गया है।  

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