पुलिस लाइन में मिट्टी के चूल्हे पर बन रहा खाना:बेगूसराय में LPG की किल्लत, जीविका दीदी बोली- चूल्हा जलाने के लिए एक घंटा एक्स्ट्रा काम कर रहे

पुलिस लाइन में मिट्टी के चूल्हे पर बन रहा खाना:बेगूसराय में LPG की किल्लत, जीविका दीदी बोली- चूल्हा जलाने के लिए एक घंटा एक्स्ट्रा काम कर रहे

खाड़ी देशों में बढ़ते युद्ध के तनाव ने बेगूसराय में रसोई का बजट और मिजाज दोनों बिगाड़ दिया है। युद्ध का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। बेगूसराय पुलिस लाइन में 243 प्रशिक्षु सिपाही का खाना जीविका दीदी बनाती है। इनका कहना है कि लकड़ी का चूल्हा जलाने के लिए उन्हें एक घंटा पहले आना पड़ता है। क्योंकि, इसमें समय लगता है। पेट्रोलियम कंपनियों के तमाम दावों के बावजूद बाजार से कमर्शियल गैस सिलेंडर गायब हैं। हालत यह है कि जहां कभी गैस बर्नर की नीली लौ जलती थी, वहां अब मिट्टी के चूल्हे और कोयले का काला धुआं फैल रहा है। ​पेट्रोलियम कंपनियां लगातार विज्ञापन और बयानों के जरिए यह दावा कर रही हैं कि कमर्शियल (19 kg) गैस की आपूर्ति अनिवार्य जरूरत के हिसाब से चालू है। लेकिन बेगूसराय की जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। बाजार में कमर्शियल सिलेंडर के लिए हाहाकार मचा है। मेस चलाने वालों का कहना है कि स्टॉक होने के बावजूद पैनिक क्रिएट कर कालाबाजारी की जा रही है। कोयले पर खाना बना रही जीविका दीदी बेगूसराय पुलिस लाइन में सुरक्षाबलों का पेट भरने वाली जीविका दीदी कोयले की तपिश और धुएं के बीच खाना बनाने को मजबूर हैं। यहां पुलिसकर्मियों के लिए भोजन की व्यवस्था जीविका की ओर से संचालित रसोई में की जाती है। कुछ दिनों से कमर्शियल गैस की किल्लत इतनी बढ़ गई कि आज यहां गैस सिलेंडर पूरी तरह खत्म हो गए। जब एजेंसी से सिलेंडर नहीं मिले, तो मजबूरी में दीदियों को ईंट और मिट्टी का चूल्हा बनाना पड़ा। जिस रसोई में गैस चूल्हे होने चाहिए थे, वहां अब ईंटों को जोड़कर अस्थाई चूल्हे बनाए गए हैं। कोयला मंगवाया गया है और उसी पर सैकड़ों पुलिसकर्मियों का खाना तैयार हो रहा है। मार्च की बढ़ती गर्मी और ऊपर से कोयले की भीषण तपिश, जीविका दीदियों के लिए यह किसी दोहरी मार से कम नहीं है। गैस चूल्हे पर खाना बनाना न केवल आसान था बल्कि स्वच्छ भी था। स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता अब घंटों धुएं में रहने और कोयले की आग के सामने खड़े रहने से दीदियों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। कोयले की आग का तापमान गैस के मुकाबले सीधे चेहरे और शरीर पर पड़ता है। मिट्टी के चूल्हे पर खाना पकने में गैस की तुलना में दोगुना समय लग रहा है। कोयले का धुआं आंखों और फेफड़ों के लिए घातक साबित हो सकता है। रसोई में काम करने वाले शंभू पोद्दार ने बताया कि हम लोग गैस सिलेंडर से खाना बनाते थे। वह आना अब बंद हो गया है, जिसके कारण कोयला के चूल्हा पर खाना बनाना शुरू किए हैं। 243 प्रशिक्षु सिपाही खाना खाते हैं। जिनका खाना बनाने के लिए हम लोग पांच भट्टी बनाएं हैं। कोयला का पहुंच भट्टी बनाए हैं। यहां 31 जीविका दीदी दो शिफ्ट में काम करते हैं। पहला शिफ्ट सुबह 6 बजे से दोपहर 2 बजे तक का होता है। गर्मी होने के कारण होती परेशानी दूसरा शिफ्ट दोपहर 2 बजे से रात 9:30 बजे तक का होता है। गर्मी का समय है, इसलिए काफी परेशानी होगी। ऊपर चदरा का शेड है और नीचे कोयला का ताप रहेगा। इससे काफी परेशानी होगी, समय पर खाना नहीं बन पाएगा। कोयला का चूल्हा जलाने में एक घंटा समय लगता है, गैस पर तुरंत काम शुरू हो जाता था। एक घंटा में ताव आएगा तभी तो खाना बनेगा। लेकिन क्या करें जरुरी है, तो खाना बनाकर देना ही पड़ेगा। जीविका दीदी रानी देवी ने बताया कि गर्मी का समय है सभी सिपाहियों को समय पर खाना चाहिए। कोयला भट्ठी का चुल्हा जलाने में समय चाहिए। सुबह 5:30 बजे आते हैं, आखिर समय पर खाना कैसे देंगे। गैस खत्म हो गया है, कहा जा रहा है कि मिलता नहीं है, लेकिन सिपाहियों को किसी तरह खाना देना है, इसलिए भट्टी पर बनाना शुरू किए हैं। गर्मी में परेशानी हो रही है, लेकिन जरूरी है तो खाना तैयार करना ही पड़ेगा। खाड़ी देशों में बढ़ते युद्ध के तनाव ने बेगूसराय में रसोई का बजट और मिजाज दोनों बिगाड़ दिया है। युद्ध का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। बेगूसराय पुलिस लाइन में 243 प्रशिक्षु सिपाही का खाना जीविका दीदी बनाती है। इनका कहना है कि लकड़ी का चूल्हा जलाने के लिए उन्हें एक घंटा पहले आना पड़ता है। क्योंकि, इसमें समय लगता है। पेट्रोलियम कंपनियों के तमाम दावों के बावजूद बाजार से कमर्शियल गैस सिलेंडर गायब हैं। हालत यह है कि जहां कभी गैस बर्नर की नीली लौ जलती थी, वहां अब मिट्टी के चूल्हे और कोयले का काला धुआं फैल रहा है। ​पेट्रोलियम कंपनियां लगातार विज्ञापन और बयानों के जरिए यह दावा कर रही हैं कि कमर्शियल (19 kg) गैस की आपूर्ति अनिवार्य जरूरत के हिसाब से चालू है। लेकिन बेगूसराय की जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। बाजार में कमर्शियल सिलेंडर के लिए हाहाकार मचा है। मेस चलाने वालों का कहना है कि स्टॉक होने के बावजूद पैनिक क्रिएट कर कालाबाजारी की जा रही है। कोयले पर खाना बना रही जीविका दीदी बेगूसराय पुलिस लाइन में सुरक्षाबलों का पेट भरने वाली जीविका दीदी कोयले की तपिश और धुएं के बीच खाना बनाने को मजबूर हैं। यहां पुलिसकर्मियों के लिए भोजन की व्यवस्था जीविका की ओर से संचालित रसोई में की जाती है। कुछ दिनों से कमर्शियल गैस की किल्लत इतनी बढ़ गई कि आज यहां गैस सिलेंडर पूरी तरह खत्म हो गए। जब एजेंसी से सिलेंडर नहीं मिले, तो मजबूरी में दीदियों को ईंट और मिट्टी का चूल्हा बनाना पड़ा। जिस रसोई में गैस चूल्हे होने चाहिए थे, वहां अब ईंटों को जोड़कर अस्थाई चूल्हे बनाए गए हैं। कोयला मंगवाया गया है और उसी पर सैकड़ों पुलिसकर्मियों का खाना तैयार हो रहा है। मार्च की बढ़ती गर्मी और ऊपर से कोयले की भीषण तपिश, जीविका दीदियों के लिए यह किसी दोहरी मार से कम नहीं है। गैस चूल्हे पर खाना बनाना न केवल आसान था बल्कि स्वच्छ भी था। स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता अब घंटों धुएं में रहने और कोयले की आग के सामने खड़े रहने से दीदियों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। कोयले की आग का तापमान गैस के मुकाबले सीधे चेहरे और शरीर पर पड़ता है। मिट्टी के चूल्हे पर खाना पकने में गैस की तुलना में दोगुना समय लग रहा है। कोयले का धुआं आंखों और फेफड़ों के लिए घातक साबित हो सकता है। रसोई में काम करने वाले शंभू पोद्दार ने बताया कि हम लोग गैस सिलेंडर से खाना बनाते थे। वह आना अब बंद हो गया है, जिसके कारण कोयला के चूल्हा पर खाना बनाना शुरू किए हैं। 243 प्रशिक्षु सिपाही खाना खाते हैं। जिनका खाना बनाने के लिए हम लोग पांच भट्टी बनाएं हैं। कोयला का पहुंच भट्टी बनाए हैं। यहां 31 जीविका दीदी दो शिफ्ट में काम करते हैं। पहला शिफ्ट सुबह 6 बजे से दोपहर 2 बजे तक का होता है। गर्मी होने के कारण होती परेशानी दूसरा शिफ्ट दोपहर 2 बजे से रात 9:30 बजे तक का होता है। गर्मी का समय है, इसलिए काफी परेशानी होगी। ऊपर चदरा का शेड है और नीचे कोयला का ताप रहेगा। इससे काफी परेशानी होगी, समय पर खाना नहीं बन पाएगा। कोयला का चूल्हा जलाने में एक घंटा समय लगता है, गैस पर तुरंत काम शुरू हो जाता था। एक घंटा में ताव आएगा तभी तो खाना बनेगा। लेकिन क्या करें जरुरी है, तो खाना बनाकर देना ही पड़ेगा। जीविका दीदी रानी देवी ने बताया कि गर्मी का समय है सभी सिपाहियों को समय पर खाना चाहिए। कोयला भट्ठी का चुल्हा जलाने में समय चाहिए। सुबह 5:30 बजे आते हैं, आखिर समय पर खाना कैसे देंगे। गैस खत्म हो गया है, कहा जा रहा है कि मिलता नहीं है, लेकिन सिपाहियों को किसी तरह खाना देना है, इसलिए भट्टी पर बनाना शुरू किए हैं। गर्मी में परेशानी हो रही है, लेकिन जरूरी है तो खाना तैयार करना ही पड़ेगा।  

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