FD Interest Rates: 1, 3 और 5 साल की एफडी पर क्या हैं सरकारी बैंकों की ब्याज दरें, देखिए लिस्ट

FD Interest Rates: 1, 3 और 5 साल की एफडी पर क्या हैं सरकारी बैंकों की ब्याज दरें, देखिए लिस्ट

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने अपनी बैठक में रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर स्थिर रखने का निर्णय लिया है। इस फैसले के बाद अब सबकी नजरें बैंकों की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) दरों पर टिक गई हैं। विशेषज्ञों का मानना ​​है कि फिलहाल FD दरों में वृद्धि की संभावना नहीं है। लेकिन कई ऐसे संकेत देखने को मिल रहे है, जो बताते है कि भविष्य में दरों में वृद्धि की संभावना है।

FD निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

साल 2025 में RBI ने रेपो रेट में कुल 125 बेसिस पॉइंट (bps)की कटौती की थी, जिससे साल के शुरुआती महीनों में FD की ब्याज दरों में काफी गिरावट देखी गई थी। हालांकि, पिछले कुछ समय से दरों को स्थिर रखा गया है, जिससे निवेशकों को थोड़ी राहत मिली है।

Date Repo Rate (%) Change (%)
07-Feb-25 6.25% -0.25%
09-Apr-25 6.00% -0.25%
06-Jun-25 5.50% -0.50%
06-Aug-25 5.50% 0.00%
05-Dec-25 5.25% 0.25%
06-Feb-26 5.25% 0.00%
08-Apr-26 5.25% 0.00%
इससे पहले रेपो रेट में हुए बदलाव।

बुधवार को ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं होना स्थिरता का संकेत देते हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बैंक FD दरों में तुरंत बढ़ोतरी शायद न करें, लेकिन आने वाले कुछ महीनों में ब्याज दरें बढ़ सकती हैं। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह इजरायल-ईरान संघर्ष के कारण बढ़ती वैश्विक अस्थिरता और इसके चलते बढ़ती महंगाई है।

सरकारी बैंकों की ब्याज दरें क्या है?

नीचे FD के टाइम पीरियड के हिसाब से पांच प्रमुख सरकारी बैंकों द्वारा दी जाने वाली ब्याज दरों को बताया गया है।

एफडी की अवधि बैंक 1 बैंक 2 बैंक 3 बैंक 4 बैंक 5
1 साल इंडियन ओवरसीज बैंक (6.50%) यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (6.30%) बैंक ऑफ इंडिया (6.25%) केनरा बैंक (6.25%) पंजाब नेशनल बैंक (6.25%)
3 साल पंजाब नेशनल बैंक (6.30%) स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (6.30%) बैंक ऑफ बड़ौदा (6.25%) बैंक ऑफ इंडिया (6.25%) केनरा बैंक (6.25%)
5 साल बैंक ऑफ बड़ौदा (6.30%) केनरा बैंक (6.25%) इंडियन ओवरसीज बैंक (6.10%) पंजाब नेशनल बैंक (6.10%) स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (6.05%)
अधिक जानकारी के लिए बैंक से संपर्क करें।

ये चीजें भी तय करती हैं FD की दरें

अक्सर लोग समझते हैं कि FD की दरें सिर्फ रेपो रेट पर टिकी होती हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। बैंकों की दरें इन 4 प्रमुख कारकों पर निर्भर करती हैं।

  1. लिक्विडिटी: बाजार में कैश की कितनी उपलब्धता है? यह एक जरूरी कारण है, जिसके चलते बैंक एफडी की ब्याज दरों को बदलते रहते हैं। यदि बाजार में कैश ज्यादा हो जाए तो बैंक ब्याज दरों में कटौती कर देता है।
  2. महंगाई की दर: अगर महंगाई बढ़ती है, तो ब्याज दरें बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है।
  3. सरकारी बॉन्ड (G-Sec): सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाला रिटर्न यदि ज्यादा होता है तो बैंक पर दबाव बढ़ता है कि वह निवेशको को आकर्षित करने के लिए एफडी की दरों में बढ़ोतरी करें।
  4. स्मॉल सेविंग स्कीम्स: पोस्ट ऑफिस जैसी छोटी बचत योजनाओं से मिलने वाली कड़ी टक्कर के कारण भी बैंकों को एफडी की ब्याज दरों को बढ़ाना पड़ता है।

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