Diabetes Reversal Episode 7- एक डायबिटीक पेशेंट हर महीने या हर तीन महीने में जांच करवाता है। रिपोर्ट आते ही नजर फास्टिंग और पीपी शुगर लेवल पर जाती है। लेकि क्या सिर्फ ये दो टेस्ट आपकी शुगर का सच बताते हैं? क्या आप सही तरीके से शुगर टेस्ट करवाते हैं? शुगर कंट्रोल की असली तस्वीर दिखाने वाला सबसे भरोसेमंद टेस्ट आखिर कौन सा है? कौन-कौन से टेस्ट बेहतर माने जाते हैं? इन्हें कराने का सही तरीका क्या है? शुगर या डायबिटीज से जुड़े हर टेस्य पर पत्रिका गहराई से जाना, पढ़ें संजना कुमार की विशेष रिपोर्ट..
सबसे पहले जानें शुगर के लिए प्रमुख टेस्ट
फास्टिंग ब्लड शुगर (FBS)
यह शुगर मरीजों के दिन की शुरुआत माना जाता है। कहा जाता है कि 8-10 घंटे की फास्टिंग के बाद यानी खाली पेट इसे टेस्ट को किया जाना है। आप कैसे करते हैं फास्टिंग और पीपी शुगर टेस्ट


ये दो उदाहरण काफी हैं ये जानने के लिए कि फास्टिंग और पीपी टेस्ट सही हैं या नहीं…. शुगर टेस्ट का ये सच जानने हमने की भोपाल एम्स के डायबिटीज एक्सपर्ट डॉ. अल्पेश से, हमने जाना कि क्या ये दोनों टेस्ट करने का तरीका सही है? अगर हां तो क्या दवाएं असर नहीं कर रहीं… या फिर मरीज दवाएं टाइम टू टाइम नहीं खा रहा.. जानें क्या मिला जवाब
डॉ. अल्पेश कहते हैं कि पहले केस में फास्टिंग से लेकर पीपी तक दोनों ही टेस्ट करने का तरीका गलत है। वहीं दूसरे केस में फास्टिंग सही लेकिन पीपी टेस्ट का तरीका गलत है।
यहां जानें क्या है फास्टिंग और पीपी शुगर टेस्ट का सही तरीका
फास्टिंग- इसके लिए जरूरी है कि आप 7-8 घंटे की नींद पूरी करें। इसके साथ ही आपकी फास्टिंग 6-7 घंटों की नहीं बल्कि 8-10 घंटे की होनी चाहिए। वहीं इस शुगर टेस्ट का सही तरीका है, आप शुगर टेस्ट किट बिस्तर के पास ही रखें, ताकि सुबह नींद खुलते ही बिस्तर पर ही इस टेस्ट को करें। क्यों कि नींद खुलते ही अगर आप बिस्तर से उतर जाएं और पहले चल-फिर लिए, फिर ब्रश किया और फिर करीब आधे घंटे एक घंटे बाद शुगर का टेस्ट करेंगे तो मानसिक तनाव, शारीरिक गतिविधि बढ़ने के कारण आपकी फास्टिंग शुगर ज्यादा आ सकती है। इसलिए इस तरीके को सुधारें और आंख खुलने के तुरंत बाद बिस्तर पर ही शुगर फास्टिंग टेस्ट कीजिए।
कहां होती है गलती
6-7 घंटे की अधूरी नींद
देर रात भारी भोजन करना
टेस्ट से पहले तनाव
पीपी शुगर टेस्ट (Post-Prandial)
पीपी शुगर टेस्ट के लिए 1 बजे खाना खाकर उठने के बाद 3 बजे टेस्ट करना सही तरीका नहीं है। इसका सही तरीका है अगर आप खाना खाने 1 बजे बैठ रहे हैं और पहली बाइट आपके मुंह में 1 बजकर 5 मिनट पर गई, तो आपको पहले कौर के टाइम से लेकर पूरे होने वाले 2 घंटे में ही शुगर का टेस्ट करना है। 1 बजकर 05 मिनट पर पहली बाइट आपने खाई तो अब आपको 3 बजकर 5 मिनट पर पीपी शुगर टेस्ट करना चाहिए। ना कि 1.30 बजे पूरा खाना खाकर उठने के दो घंटे बाद यानी 3.30 बजे। इस तरह पीपी शुगर टेस्ट करने से शुगर लेवल गड़बड़ आ सकता है।
कहां होती है गलती
-डेढ़ घंटे या 3 घंटे बाद टेस्ट करना
-टेस्ट के दिन रोजाना से अलग डाइट लेना
-खाने के तुरंत बाद तेज व्यायाम करना
जरूरी बात, जो आपको डॉक्टर्स कभी नहीं बता पाते
पूना के डायबिटीज एक्सपर्ट डॉ. प्रमोद त्रिपाठी के मुताबिक शुगर टेस्ट के समय निडल पंच के बाद यदि उंगली से ब्लड न निकले, तो कभी भी उंगली को प्रेस करके ब्लड निकालने की कोशिश बिल्कुल न करें। ऐसा करने से ब्लड के साथ आपके टिश्यूज भी ब्लड सैंपल में आ जाते हैं और इससे आपका शुगर लेवल हाई आ सकता है या गड़बड़ा सकता है।
HbA1c : ये टेस्ट है आपके तीन महीने का डायबिटीज या शुगर रिकॉर्ड
यह टेस्ट बताता है कि पिछले 90 दिनों में औसतन शुगर लेवल कितना रहा। इस टेस्ट को सबसे भरोसेमंद माना जाता है। क्योंकि ये किसी एक दिन की नहीं, बल्कि लंबे समय की तस्वीर दिखाता है। अगर फास्टिंग एक दिन बढ़ जाए, और HbA1c टेस्ट कंट्रोल्ड है तो आप डायबिटीक नहीं हैं। डायबिटीज को मॉनिटरिंग करने के लिए एमपी समेत देश और दुनिया में इस टेस्ट को अहम माना जाता है। वहीं इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन भी नियमित HbA1c मॉनिटरिंग की सलाह देता है।
रेंडम ब्लड शुगर (RBS)
ये ऐसा शुगर टेस्ट जो दिन में किसी भी समय किया जा सकता है। यह आपात स्थिति या अचानक दिखे लक्षणों में काम आता है। लेकिन शुगर की नियमित मॉनिटरिंग के लिए ये टेस्ट काफी नहीं है।
ओरल ग्लुकोज टॉलरेंस टेस्ट (OGTT)
ये शुगर टेस्ट उनके लिए होता है, जो पहली बार शुगर की आशंका के चलते टेस्ट करवा रहे हैं, खासतौर पर गर्भावस्था में इस टेस्ट को करवाया जाता है। यह छिपी हुई शुगर को पकड़ने में मदद करता है। इस टेस्ट के लिए आपको डॉक्टर सजेस्ट करते हैं। वो आपको एक निश्चित मात्रा में ग्लूकोज का बॉक्स या पैक्ड गिलास देते हैं। जिसे पीने के 2 घंटे बाद आपके शुगर लेवल की जांच की जाती है। अगर वह नॉर्मल आता है, तो आप डायबिटीज फ्री हैं।

HOMA-IR : शरीर की इंसुलिन रेजिस्टेंस (IR) कितनी है अंदाजा लगाया जाता है
यह खासकर प्री-डायबिटीज में भविष्य का जोखिम समझने के लिए के लिए लाभदायक होता है। ‘HOMA-IR’ टेस्ट शरीर में छिपी हुई इंसुलिन रेजिस्टेंस को पकड़ने का प्रारंभिक और उपयोगी साधन है, विशेषकर तब जब शुगर अभी सामान्य सीमा में हो।’
लंबे समय से है डायबिटीज तो सिर्फ शुगर नहीं ये जांचें भी हैं जरूरी
डायबिटीज ऐसी बीमारी है जो सिर्फ ग्लूकोज ही नहीं बल्कि आपकी किडनी, आंखें और दिल को भी प्रभावित कर सकती है। इसलिए डॉक्टर समय-समय पर सलाह देते हैं। डॉ. अल्पेश कहते हैं कि इन टेस्ट समय-समय पर जरूर करवाएं
1. किडनी फंक्शन टेस्ट
2. यूरिन माइक्रो एल्ब्यूमिन
3. लिपिड प्रोफाइल
4. आंखों की जांच
5. ब्लड प्रेशर मॉनिटरिंग
6. एमपी समेत भारत में डायबिटीज के बढ़ते मामलों पर Indian Council of Medical Research की रिपोर्ट भी चेतावनी देती रही हैं कि बड़ी संख्या में लोग जाने-अनजाने सही से मॉनिटरिंग नहीं कर रहे हैं।
दवा चलने के बाद भी क्यों गड़बड़ाती है रिपोर्ट
-दवा का समय बदल जाना
-भोजन का पैटर्न बिगड़ना
-वजन बढ़ना
-तनाव बढ़ना
-नींद की कमी
किसी अन्य संक्रमण या बीमारी का असर
कई बार ये भी देखा गया है कि कुछ मरीज टेस्ट करवाने से एक दो दिन पहले से ही सतर्क हो जाते हैं और अपनी लाइफ स्टाइल से लेकर खान-पान तक बदल लेते हैं। डॉ. अल्पेश कहते हैं कि ऐसा करना आपकी सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है।
किस रिपोर्ट पर भरोसा करें
आपकी फास्टिंग और पीपी में थोड़ा अंतर आ सकता है, ये उतार-चढ़ाव मामूली हो सकता है। लेकिन HbA1c लगातार 6.50 से ज्यादा रहता है, तो डॉक्टर से जरूर संपर्क करें। अपने खान-पान और लाइफ स्टाइल को लेकर डॉक्टर से चर्चा करें। अपनी दवाओं के बारे में जानें। यहां ध्यान ये रखना है कि रिपोर्ट आपकी सेहत का निर्णय नहीं है बल्कि ट्रैंड है आपकी डायबिटीज का। हां लेकिन डॉक्टर को जो भी जानकारी दें सही दें कुछ न तो छिपाएं और न ही गलत बताएं।
ध्यान दें क्या सही परिस्थितियों में होते हैं टेस्ट
डायबिटीज को डर से नहीं, समझ से मैनेज किया जा सकता है। सही टेस्ट, सही समय और सही तरीके से कराई गई जांच ही आपकी डायबिटीज रिपोर्ट का सच बताती है। अगर आप नियमित दवा ले रहे हैं फिर भी शुगर लेवल हाई आ रहा है, तो पहले जांच लें कि आपने जो टेस्ट किया है या करवाया है, क्या वह टेस्ट सही परिस्थितियों में किया गया है। टेस्ट के वक्त आप घबराहट या टेंशन में तो नहीं थे। क्योंकि आपकी जरा सी लापरवाही रिपोर्ट को बदल सकती है और आपका ट्रीटमेंट गलत शुरू हो सकता है।
भोपाल एम्स के डॉक्टर अल्पेश के मुताबिक अगर आपका शुगर लेवल कंट्रोल नहीं हो रहा है, लगातार हाई जा रहा है, तो अपने डॉक्टर से संपर्क जरूर करें। दवाएं टाइम से लें और डाइट पर ध्यान दें।
आज diabetes reversal सीरीज के एपिसोड 7 में इतना ही, अगले एपिसोड में हम जानेंगे इंसुलिन और लाइफ स्टाइल का सच, कितनी खतरनाक है शुगर कैसे कर देती है किडनी औऱ हार्ट को खराब… क्या आप जानना चाहेंगे डायबिटीज रिवर्सल का नया ट्रेंड अगर हां… तो सेहत के इस सफर में जुड़े रहें patrika.com के साथ।


