Europe को Diesel आपूर्ति में भारत की हिस्सेदारी 60% पहुंची, Vortexa रिपोर्ट में खुलासा

Europe को Diesel आपूर्ति में भारत की हिस्सेदारी 60% पहुंची, Vortexa रिपोर्ट में खुलासा

नयी दिल्ली, छह सितंबर रूस से डीजल की आपूर्ति में भारी गिरावट और अमेरिका से यूरोप जाने वाली ईंधन की खेप में कमी के बीच यूरोप के लिए भारत डीजल के एक महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में उभरा है। ऊर्जा और माल ढुलाई क्षेत्र के तत्काल आधार पर आंकड़े उपलब्ध कराने वाली कंपनी वॉर्टेक्सा के अनुसार, अगस्त में बाब-अल-मंदेब से यूरोप की ओर जाने वाले डीजल में करीब 60 प्रतिशत हिस्सेदारी भारत की रही। आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में करीब दो लाख बैरल प्रतिदिन डीजल बाब-अल-मंदेब से होकर यूरोप भेजा गया।

यह मात्रा एक साल पहले के स्तर के करीब है, जबकि मार्च और अप्रैल में इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से डीजल की आवाजाही लगभग ठप हो गई थी। भारत की रिफाइनरी इकाइयां अब यूरोप की डीजल आपूर्ति में बड़ी भूमिका निभा रही हैं। भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा तेल शोधन (रिफाइनिंग) करने वाला देश है।

उसकी स्थापित शोधन क्षमता 25.81 करोड़ टन सालाना है, जो घरेलू ईंधन मांग से अधिक है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने 6.15 करोड़ टन पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात किया था और वह दुनिया के प्रमुख शोधित पेट्रोलियम उत्पाद के निर्यातकों में शामिल है। भारतीय ईंधन की मांग अब यूरोप के साथ-साथ रूस में भी बढ़ रही है।

हालांकि, भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती कच्चे तेल की उपलब्धता हो सकती है। वॉर्टेक्सा के अनुसार, अगस्त में भारत में कच्चे तेल और कन्डनसेट की आवक लगातार दूसरे महीने घटकर करीब 38 लाख बैरल प्रतिदिन रह गई, जबकि एक साल पहले यह करीब 48 लाख बैरल प्रतिदिन थी। ऐसे में यदि कच्चे तेल की आपूर्ति पर दबाव बना रहता है तो भारतीय रिफाइनरी इकाइयों के पास निर्यात के लिए उपलब्ध अतिरिक्त डीजल की मात्रा भी प्रभावित हो सकती है।

दूसरी ओर, रूस से डीजल की आपूर्ति में भारी गिरावट बनी हुई है। अगस्त के पहले 25 दिन में रूस का समुद्री डीजल और गैसऑयल निर्यात औसतन केवल करीब 1.5 लाख बैरल प्रतिदिन रहा। यह एक साल पहले की तुलना में करीब 6.1 लाख बैरल प्रतिदिन कम और पांच साल के औसत से 81 प्रतिशत नीचे है।

एक सितंबर से रूस के डीजल निर्यात प्रतिबंध में आंशिक ढील की उम्मीद थी, लेकिन इससे आपूर्ति में तत्काल सुधार की संभावना कम है। यूक्रेन के ड्रोन हमलों ने रूस की रिफाइनरी इकाइयों और निर्यात ढांचे को लगातार प्रभावित किया है। जुलाई और अगस्त में रूस की रिफाइनरी पर 32 हमले दर्ज किए गए।

करीब 2.6 लाख बैरल प्रतिदिन की क्षमता वाली पर्म रिफाइनरी पर हुए हमले के बाद उसकी परिचालन क्षमता बुरी तरह प्रभावित हुई है। रूस के डीजल निर्यात में ‘ब्लैक सी’ क्षेत्र की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। पिछले साल रूस के कुल डीजल और गैसऑयल निर्यात का करीब 44 प्रतिशत यानी 3.8 लाख बैरल प्रतिदिन, इसी क्षेत्र से हुआ था।

लेकिन बंदरगाहों और रिफाइनरी में व्यवधान के कारण यहां से उपलब्ध आपूर्ति घट गई है। मई में हुए हमले के बाद से तुआप्से बंदरगाह से किसी डीजल खेप का निर्यात नहीं हुआ। यूरोप को रूस की कमी की भरपाई में अमेरिका से भी मदद मिली है, लेकिन अब वहां से आने वाली आपूर्ति भी कमजोर पड़ने लगी है।

अगस्त में यूरोप के क्षेत्र के बाहर से आने वाले समुद्री डीजल आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी करीब आधी रही। होर्मुज जलडमरूमध्य से भी साफ पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति में फिलहाल ज्यादा राहत नहीं मिल रही है। अगस्त के पहले 27 दिन में एमआर2 या उससे बड़े टैंकर से साफ पेट्रोलियम उत्पादों की केवल 37 आवाजाही दर्ज की गई, जबकि जुलाई में यह संख्या 55 और जून में 69 थी।

ओमान के तट के पास जहाज से जहाज में तेल स्थानांतरण जारी है, लेकिन इनमें ज्यादातर कच्चा तेल शामिल है। साफ पेट्रोलियम उत्पादों का यह कारोबार भी जून की तुलना में काफी घट गया है। ऐसे में यूरोप की डीजल आपूर्ति श्रृंखला पहले के मुकाबले अधिक सीमित स्रोतों पर निर्भर रह गई है।

रूस की आपूर्ति कमजोर बनी हुई है, अमेरिका से आने वाली खेप घट रही है और होर्मुज मार्ग से अतिरिक्त आपूर्ति सीमित है। इस स्थिति में यूरोप के लिए भारत डीजल की आपूर्ति बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *