बिहार के राजस्व कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर राज्यव्यापी आंदोलन तेज कर दिया है। बिहार राज्य भूमि सुधार कर्मचारी संघ संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर सोमवार (5 फरवरी) को किशनगंज सहित विभिन्न जिला मुख्यालयों पर एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। 2025 में हुए समझौते में 17 सूत्री मांगों को लिया था मान कर्मचारियों का आरोप है कि सरकार की दमनकारी नीतियों और विभाग द्वारा पूर्व में हुए समझौतों का कार्यान्वयन न होने से उनमें भारी आक्रोश है। किशनगंज के राजस्व कर्मचारी संघ के सचिव अभिषेक कुमार त्रिवेदी ने बताया कि वर्ष 2025 में विभाग के साथ हुए समझौते में 17 सूत्री मांगों को मान लिया गया था, लेकिन अब तक उन पर अमल नहीं किया गया है। कर्मचारी ग्रेड पे 1900 (लेवल-2) से बढ़ाकर 2800 (लेवल-5) की मांग प्रमुख लंबित मांगों में 2025 के समझौते का तत्काल कार्यान्वयन शामिल है। कर्मचारी ग्रेड पे 1900 (लेवल-2) से बढ़ाकर 2800 (लेवल-5) करने की मांग कर रहे हैं, जबकि उनकी योग्यता स्नातक होने के कारण इसे 4200 किया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त, नवनियुक्त कर्मचारियों को गृह जिले में पदस्थापना और 10 वर्ष की सेवा पूरी करने पर वरीयता आधारित पदोन्नति की मांग भी शामिल है, जो 15 वर्ष से अधिक समय बीतने के बावजूद नहीं मिली है। अन्य मांगों में एसीपी/एमएसीपी का समय पर लाभ, सेवा संपुष्टि में देरी को खत्म करना, और एक कर्मचारी पर कई हल्का/पंचायत का अतिरिक्त बोझ कम करना शामिल है। इंटरनेट, कार्यालय, फर्नीचर और प्रिंटर की सुविधाएं नहीं कर्मचारियों का कहना है कि इस अतिरिक्त कार्यभार से उनके स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। उन्हें लैपटॉप के अलावा इंटरनेट, कार्यालय, फर्नीचर, प्रिंटर जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिलतीं, जिससे उन्हें निजी संसाधनों से काम करना पड़ता है। अवकाश पर भी काम करवाने और लंबे कार्य समय की शिकायतें भी हैं। सहायक राजस्व पदाधिकारी के पद पर निर्णय भी लागू नहीं हुआ है। कर्मचारियों का आरोप है कि विभाग द्वारा लगातार नए असंवैधानिक फरमान जारी किए जा रहे हैं, जबकि वे ही राज्य सरकार के राजस्व संग्रह का आधार हैं। संघ की बैठक में चरणबद्ध आंदोलन का फैसला लिया गया। 9 फरवरी को पटना के गर्दनीबाग में एक दिवसीय धरना आंदोलन के तहत 3 फरवरी को पूरे बिहार में कर्मचारियों ने काला बिल्ला लगाकर कार्य किया था। 5 फरवरी को जिला मुख्यालयों पर धरना दिया गया। अगला चरण 9 फरवरी को पटना के गर्दनीबाग में एक दिवसीय धरना होगा। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो 11 फरवरी से अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और विभाग की होगी। इस आंदोलन से राजस्व संबंधी कार्य प्रभावित हो सकते हैं, जिससे आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। बिहार के राजस्व कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर राज्यव्यापी आंदोलन तेज कर दिया है। बिहार राज्य भूमि सुधार कर्मचारी संघ संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर सोमवार (5 फरवरी) को किशनगंज सहित विभिन्न जिला मुख्यालयों पर एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। 2025 में हुए समझौते में 17 सूत्री मांगों को लिया था मान कर्मचारियों का आरोप है कि सरकार की दमनकारी नीतियों और विभाग द्वारा पूर्व में हुए समझौतों का कार्यान्वयन न होने से उनमें भारी आक्रोश है। किशनगंज के राजस्व कर्मचारी संघ के सचिव अभिषेक कुमार त्रिवेदी ने बताया कि वर्ष 2025 में विभाग के साथ हुए समझौते में 17 सूत्री मांगों को मान लिया गया था, लेकिन अब तक उन पर अमल नहीं किया गया है। कर्मचारी ग्रेड पे 1900 (लेवल-2) से बढ़ाकर 2800 (लेवल-5) की मांग प्रमुख लंबित मांगों में 2025 के समझौते का तत्काल कार्यान्वयन शामिल है। कर्मचारी ग्रेड पे 1900 (लेवल-2) से बढ़ाकर 2800 (लेवल-5) करने की मांग कर रहे हैं, जबकि उनकी योग्यता स्नातक होने के कारण इसे 4200 किया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त, नवनियुक्त कर्मचारियों को गृह जिले में पदस्थापना और 10 वर्ष की सेवा पूरी करने पर वरीयता आधारित पदोन्नति की मांग भी शामिल है, जो 15 वर्ष से अधिक समय बीतने के बावजूद नहीं मिली है। अन्य मांगों में एसीपी/एमएसीपी का समय पर लाभ, सेवा संपुष्टि में देरी को खत्म करना, और एक कर्मचारी पर कई हल्का/पंचायत का अतिरिक्त बोझ कम करना शामिल है। इंटरनेट, कार्यालय, फर्नीचर और प्रिंटर की सुविधाएं नहीं कर्मचारियों का कहना है कि इस अतिरिक्त कार्यभार से उनके स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। उन्हें लैपटॉप के अलावा इंटरनेट, कार्यालय, फर्नीचर, प्रिंटर जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिलतीं, जिससे उन्हें निजी संसाधनों से काम करना पड़ता है। अवकाश पर भी काम करवाने और लंबे कार्य समय की शिकायतें भी हैं। सहायक राजस्व पदाधिकारी के पद पर निर्णय भी लागू नहीं हुआ है। कर्मचारियों का आरोप है कि विभाग द्वारा लगातार नए असंवैधानिक फरमान जारी किए जा रहे हैं, जबकि वे ही राज्य सरकार के राजस्व संग्रह का आधार हैं। संघ की बैठक में चरणबद्ध आंदोलन का फैसला लिया गया। 9 फरवरी को पटना के गर्दनीबाग में एक दिवसीय धरना आंदोलन के तहत 3 फरवरी को पूरे बिहार में कर्मचारियों ने काला बिल्ला लगाकर कार्य किया था। 5 फरवरी को जिला मुख्यालयों पर धरना दिया गया। अगला चरण 9 फरवरी को पटना के गर्दनीबाग में एक दिवसीय धरना होगा। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो 11 फरवरी से अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और विभाग की होगी। इस आंदोलन से राजस्व संबंधी कार्य प्रभावित हो सकते हैं, जिससे आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।


