नयी दिल्ली, आठ अक्टूबर विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के नेताओं ने निर्वाचन आयोग के मामले को लेकर बृहस्पतिवार को लगातार तीसरे दिन अपना प्रदर्शन जारी रखा और महात्मा गांधी की समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद कहा कि उन्होंने ‘‘सरकार को सद्बुद्धि देने’’ और ‘‘वोट चोरी बंद होने’’ के लिए प्रार्थना की है। विपक्षी दलों ने यह भी कहा कि ‘वोट चोरी’ के खिलाफ और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर उनका अभियान जारी रहेगा। उन्होंने इस पूरे प्रकरण को लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी मिलने का समय मांगा है और राष्ट्रपति भवन से जवाब का इंतजार कर रहे हैं।
‘इंडिया’ गठबंधन के नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की मेजबानी में यहां ‘मोएट्स’ रेस्तरां में दोपहर का भोजन किया और अपराह्नन करीब तीन बजकर 15 मिनट पर तीन बसों में सवार होकर राजघाट रवाना हुए। राजघाट पहुंचने के बाद वे कुछ देर मौन बैठ रहे और फिर बापू की समाधि पर पुष्प अर्पित किए। कनॉट प्लेस से राजघाट तक की यात्रा के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता नारे लगाते और ढोल बजाते हुए आगे चल रहे थे।
कुछ स्थानों पर वामपंथी छात्र संगठन आइसा और एआईएसएफ के कार्यकर्ता भी नारे लगाते तथा डफली बजाते नजर आए। कनॉट प्लेस में आयोजित दोपहर के भोज में खरगे के अलावा लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, तृणमूल कांग्रेस के अभिषेक बनर्जी, समाजवादी पार्टी के राजीव राय तथा मोहिबुल्ला नदवी एवं कई अन्य विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए। समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधियों की मौजूदगी अहम थी क्योंकि विपक्ष के बुधवार के प्रदर्शन में पार्टी का कोई नेता शामिल नहीं हुआ था।
सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) और शिवसेना (उबाठा) का कोई भी सांसद बृहस्पतिवार को भोज में शामिल नहीं हो सका क्योंकि इन दलों का कोई सांसद दिल्ली में नहीं था। विपक्षी दल मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के साथ-साथ निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार और आयोग पर लगातार निशाना साध रहे हैं। गठबंधन के नेता इन मुद्दों पर सरकार और निर्वाचन आयोग से जवाब मांग रहे हैं।
राजघाट पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद खरगे ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘ये तीसरा दिन है। हमने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया है और जनता के मुद्दे उठाए हैं। हमने यहां आकर प्रार्थना की कि इस सरकार को सद्बुद्धि दे।
वोट की चोरी बंद होनी चाहिए, जिन्होंने गलतियां की हैं उन्हें इस्तीफा देना चाहिए और देश के नागरिकों का वोट देने का अधिकार सुरक्षित रहना चाहिए। राजघाट की ओर विपक्षी नेताओं के रवाना होने से पहले राहुल गांधी ने कहा कि करीब 300 सांसद शांतिपूर्ण धरना देना चाहते हैं, लेकिन उन्हें प्रदर्शन के लिए आगे बढ़ने से रोका जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के पहले दिन उन्हें निर्वाचन आयोग के कार्यालय के पास रोक दिया गया, जबकि दूसरे दिन जंतर-मंतर जाने से रोका गया और ‘‘हमारे लोगों को मारा-पीटा गया।’’
गांधी ने आरोप लगाया, ‘‘सच्चाई ये है कि नरेन्द्र मोदी, अमित शाह, मोहन भागवत और ज्ञानेश कुमार ने आपराधिक साजिश करके देश को हाईजैक किया है।
संविधान को नष्ट किया और वोट चोरी की।’’
उन्होंने कहा, ‘‘उन्हें न्याय के कटघरे में लाया जाएगा। यह हमारी गारंटी है और आप ऐसा होते हुए देखेंगे।’’
राजघाट पर जाने से पहले खरगे ने कहा कि ‘इंडिया’ गठबंधन के सभी सांसद गांधी स्मारक जा रहे हैं, जहां वह धरना देंगे और शांतिपूर्वक प्रार्थना करेंगे कि मोदी और शाह को ‘‘सद्बुद्धि’’ मिले। कांग्रेस नेता राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि मोदी सरकार को सद्बुद्धि नहीं आती है तो फिर उसे जाना होगा।
उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफा देने और चुनाव प्रणाली के दुरुस्त होने तक विपक्ष का यह प्रदर्शन जारी रहेगा। इससे एक दिन पहले बुधवार को विपक्षी सांसदों ने जनपथ स्थित ‘सागर रत्ना’ रेस्तरां में दोपहर का भोजन किया था। इसके बाद वे तीन बसों में सवार होकर जंतर-मंतर की ओर रवाना हुए थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया था।
प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया गया था, जिन्हें बाद में रिहा कर दिया गया। ‘इंडिया’ गठबंधन के सांसदों ने मंगलवार को संसद से निर्वाचन आयोग के कार्यालय की ओर भी मार्च किया था। पुलिस ने संसद मार्ग के पास अवरोधक लगाकर उनका मार्च रोक दिया था, जिसके बाद कई विपक्षी नेता और सांसद वहीं धरने पर बैठ गए थे।
कांग्रेस के संगठन महासचिव वेणुगोपाल ने बुधवार को कहा था कि ‘इंडिया’ गठबंधन के नेताओं ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के लिए समय मांगा है, लेकिन राष्ट्रपति भवन की ओर से अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है। बुधवार को आयोजित दोपहर के भोज में समाजवादी पार्टी, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) का कोई प्रतिनिधि शामिल नहीं हुआ था। इस पर कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश का कहना था कि दोपहर के भोज का फैसला मंगलवार देर रात लिया गया और उसी समय इसकी जानकारी दे दी गई थी।
रमेश के अनुसार इसलिए कुछ दलों के प्रतिनिधियों का भोज में शामिल नहीं हो पाना स्वाभाविक था।

