Gas Cylinder Crisis: वैश्विक स्तर पर अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के चलते ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है। इसका असर अब स्थानीय बाजारों में भी दिखने लगा है। रसोई गैस की बढ़ती कीमतों और किल्लत के बीच खानपुर सहित आसपास के क्षेत्रों में छोटे कारोबारियों ने नया विकल्प वेस्ट ऑयल (पुराना इंजन ऑयल) खोज लिया है। हलवाई, रेस्टोरेंट, नमकीन निर्माता और ढाबा संचालक इस सस्ते ईंधन को अपनाकर अपनी लागत में भारी कमी ला रहे हैं।

महंगाई ने बदली सोच, कचरे से कमाई
जो वेस्ट ऑयल पहले बेकार समझा जाता था और बड़े शहरों जैसे जयपुर भेज दिया जाता था, अब वही स्थानीय स्तर पर ‘कीमती ईंधन’ बन गया है। वर्कशॉप संचालक पुरुषोत्तम नागर बताते हैं कि अब कई व्यवसायी सीधे उनसे वेस्ट ऑयल की मांग कर रहे हैं।
दोगुनी कीमत, फिर भी मांग तेज
वेस्ट ऑयल की कीमतों में तेजी से उछाल आया है। पहले 25–28 रुपए प्रति लीटर मिलने वाला ऑयल अब 50 रुपए प्रति लीटर से ऊपर बिक रहा है। 200 लीटर का ड्रम करीब 11 हजार रुपए तक पहुंच गया है और कई जगह एडवांस बुकिंग करनी पड़ रही है।

डीजल भट्टी में हो रहा उपयोग
व्यवसायी वेस्ट ऑयल को डीजल भट्टी में जलाकर उपयोग कर रहे हैं। बेहतर परिणाम के लिए 70 प्रतिशत वेस्ट ऑयल में 30 प्रतिशत डीजल मिलाया जाता है, जिससे ईंधन की लागत काफी कम हो जाती है।
आधी लागत में तैयार हो रहा सामान
नमकीन व्यवसायी चेतन राठौर के अनुसार, जहां पहले डीजल से उत्पादन करने पर करीब 10 रुपए प्रति किलो खर्च आता था, वहीं वेस्ट ऑयल के उपयोग से यह लागत घटकर लगभग 5 रुपए प्रति किलो रह गई है। इससे मुनाफा बढ़ा है और कारोबार टिकाऊ बन रहा है। कुछ वर्षों पहले बेकार समझकर हटाई गई ऑयल भट्टियां अब फिर से बाजार में मांग में हैं। मैस संचालक मनोज जैन बताते हैं कि स्थानीय स्तर पर भट्टियां नहीं मिल रही हैं, इसलिए उन्हें भोपाल से मंगवाना पड़ा।
नई सप्लाई चेन
वर्कशॉप से निकलने वाला वेस्ट ऑयल अब सीधे खाद्य व्यवसायियों तक पहुंच रहा है। इससे स्थानीय स्तर पर नई सप्लाई चेन विकसित हो रही है, जहां बढ़ी कीमत के बावजूद व्यवसायी ऑयल खरीदने को तैयार हैं।


