धरहरा प्रखंड क्षेत्र में मूंग की बुआई का उपयुक्त समय शुरू हो गया है, लेकिन सरकारी स्तर पर बीज उपलब्ध न होने से किसान परेशान हैं। गेहूं, मसूर, सरसों और चना की कटाई पूरी होने के बाद खेत खाली पड़े हैं, और बीज की अनुपलब्धता से खेती की पूरी योजना प्रभावित हो रही है। किसानों के अनुसार, अप्रैल माह मूंग की खेती के लिए सबसे बेहतर समय होता है। इस दौरान खेतों में प्राकृतिक नमी बनी रहती है, जिससे बिना अतिरिक्त सिंचाई के ही बीजों का अंकुरण आसानी से हो जाता है। बीज की कमी के कारण किसान इस महत्वपूर्ण अवसर का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। खुदीवन गांव के किसान रंजीत राम, घटवारी के मनोज राय, हिरालाल राय, अभिनंदन राय तथा बंगलवा और गोरैया गांव के अन्य किसानों ने बताया कि उनके खेत बुआई के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उनका कहना है कि यदि समय पर बीज मिल जाता, तो बिना पटवन के ही खेती हो जाती, जिससे लागत कम रहती और फसल समय पर तैयार हो जाती। किसानों का यह भी कहना है कि अप्रैल में बोई गई मूंग की फसल जून के अंत या जुलाई की शुरुआत तक तैयार हो जाती है, जिससे धान की रोपाई भी समय पर संभव होती है। बीज मिलने में देरी होने पर उन्हें पहले खेत की सिंचाई करनी पड़ेगी, जिससे लागत बढ़ेगी और फसल भी देर से तैयार होगी। इसका सीधा असर किसानों की आमदनी पर पड़ेगा। किसानों ने प्रशासन और कृषि विभाग से जल्द से जल्द मूंग का बीज उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि समय रहते बुआई शुरू की जा सके और संभावित नुकसान से बचा जा सके। इस संबंध में प्रखंड कृषि पदाधिकारी अशोक प्रियदर्शी ने बताया कि फिलहाल मूंग के बीज की आपूर्ति को लेकर कोई स्पष्ट सूचना नहीं है, लेकिन जल्द ही बीज आने की उम्मीद है। धरहरा प्रखंड क्षेत्र में मूंग की बुआई का उपयुक्त समय शुरू हो गया है, लेकिन सरकारी स्तर पर बीज उपलब्ध न होने से किसान परेशान हैं। गेहूं, मसूर, सरसों और चना की कटाई पूरी होने के बाद खेत खाली पड़े हैं, और बीज की अनुपलब्धता से खेती की पूरी योजना प्रभावित हो रही है। किसानों के अनुसार, अप्रैल माह मूंग की खेती के लिए सबसे बेहतर समय होता है। इस दौरान खेतों में प्राकृतिक नमी बनी रहती है, जिससे बिना अतिरिक्त सिंचाई के ही बीजों का अंकुरण आसानी से हो जाता है। बीज की कमी के कारण किसान इस महत्वपूर्ण अवसर का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। खुदीवन गांव के किसान रंजीत राम, घटवारी के मनोज राय, हिरालाल राय, अभिनंदन राय तथा बंगलवा और गोरैया गांव के अन्य किसानों ने बताया कि उनके खेत बुआई के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उनका कहना है कि यदि समय पर बीज मिल जाता, तो बिना पटवन के ही खेती हो जाती, जिससे लागत कम रहती और फसल समय पर तैयार हो जाती। किसानों का यह भी कहना है कि अप्रैल में बोई गई मूंग की फसल जून के अंत या जुलाई की शुरुआत तक तैयार हो जाती है, जिससे धान की रोपाई भी समय पर संभव होती है। बीज मिलने में देरी होने पर उन्हें पहले खेत की सिंचाई करनी पड़ेगी, जिससे लागत बढ़ेगी और फसल भी देर से तैयार होगी। इसका सीधा असर किसानों की आमदनी पर पड़ेगा। किसानों ने प्रशासन और कृषि विभाग से जल्द से जल्द मूंग का बीज उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि समय रहते बुआई शुरू की जा सके और संभावित नुकसान से बचा जा सके। इस संबंध में प्रखंड कृषि पदाधिकारी अशोक प्रियदर्शी ने बताया कि फिलहाल मूंग के बीज की आपूर्ति को लेकर कोई स्पष्ट सूचना नहीं है, लेकिन जल्द ही बीज आने की उम्मीद है।


