बिलबोर्ड इंडिया चार्ट पर दूसरे नंबर पर भी हरियाणवी गीत:नेपाली सिंगर ने गाया शीशा सॉन्ग; क्लब में गाने वाली करनाल की लड़की की कहानी

हरियाणा के करनाल के असंध की एक साधारण परिवार की बेटी आज देश के सबसे बड़े म्यूजिक प्लेटफॉर्म पर अपनी आवाज का परचम लहरा रही है। स्वरा वर्मा का ‘शीशा’ गीत बिलबोर्ड इंडिया पर लगातार दूसरे स्थान पर बना हुआ है, लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने की कहानी उतनी ही कठिन, दर्दभरी और प्रेरणादायक है। कभी उसके घर की आर्थिक हालत ऐसी थी कि उसे पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी, कभी स्टूडियो जाने के लिए मां और दोस्तों से 200 रुपये उधार लेने पड़े, तो कभी लोगों के तानों ने मन तोड़ने की कोशिश की। लेकिन इन सबके बीच स्वरा ने अपने सपनों को टूटने नहीं दिया। क्लबों में छोटी-छोटी रकम पर गाना गाने वाली यह बेटी आज लाखों युवाओं के लिए उम्मीद और हौसले की मिसाल बन चुकी है। सबसे पहले ‘शीशा’ सॉन्ग के बारे में जानिए… बिलबोर्ड इंडिया चार्ट तक पहुंचने वाले ‘शीशा’ गाने के पीछे भी एक दिलचस्प और प्रेरणादायक कहानी है। स्वरा वर्मा बताती हैं कि इस गाने के लेखक मीता रोड, जो मूल रूप से करनाल के ही रहने वाले हैं और इन दिनों अमेरिका में जॉब कर रहे हैं, ने साल 2025 में सोशल मीडिया के जरिए उनसे संपर्क किया था। मीता पहले से ही शायरी और कंटेंट क्रिएशन में एक्टिव थे और उन्होंने स्वरा की आवाज और उनके संघर्ष को देखकर इस गाने के लिए कोलैबोरेशन का प्रस्ताव रखा। शुरुआत में स्वरा को यह एक सामान्य ऑफर लगा, लेकिन जब मीता ने गाने की थीम, बोल और विजन विस्तार से समझाया, तो उन्हें महसूस हुआ कि यह कुछ बड़ा हो सकता है। इसके बाद “शीशा” गाने की ऑडियो करनाल के विक्की तरावड़ी के स्टूडियो में रिकॉर्ड की गई। गाना रिलीज होते ही इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर तेजी से ट्रेंड करने लगा।पहले दिल्ली में और फिर पूरे भारत में यह लोगों की जुबान पर चढ़ गया। गाने की लोकप्रियता को देखते हुए 2026 में इसकी फीचरिंग और वीडियो सोनी म्यूजिक इंडिया द्वारा रिलीज किया गया, जिसके बाद यह सीधा बिलबोर्ड इंडिया चार्ट में पहुंच गया और लगातार दूसरे स्थान पर बना हुआ है। स्वरा के मुताबिक, इस गाने की सफलता में मीता रोड का कॉन्सेप्ट, बोल और इंटरनेशनल सोच के साथ उनकी आवाज का मेल ही सबसे बड़ी ताकत साबित हुआ। अब जानिए कौन है नेपाली सिंगर स्वरा वर्मा की कहानी… नेपाल से हरियाणा तक की संघर्ष भरी कहानी स्वरा वर्मा का परिवार मूल रूप से काठमांडू, नेपाल का रहने वाला है। बेहतर भविष्य की तलाश में उनके माता-पिता हरियाणा के करनाल जिले के असंध में आकर बस गए। साल 2004 में यहीं स्वरा का जन्म हुआ। एक छोटे से घर में सीमित संसाधनों के बीच पली-बढ़ी स्वरा ने बचपन से ही अभावों को करीब से देखा। घर की हालत ऐसी थी कि हर दिन एक नई चिंता सामने खड़ी रहती थी। गरीबी के कारण छोड़ी पढ़ाई, लेकिन नहीं छिना हौसला परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि स्वरा अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर सकीं। घर चलाने की जिम्मेदारी धीरे-धीरे उनके कंधों पर भी आने लगी। मां घर-घर जाकर खाना बनाती थीं और पिता भी कुकिंग का काम करके जैसे-तैसे परिवार का पेट भरते थे। कई बार ऐसा भी समय आता था जब खर्च और जरूरतों के बीच संतुलन बैठाना मुश्किल हो जाता था। ऐसे में स्वरा ने पढ़ाई छोड़कर परिवार का सहारा बनने का फैसला किया- यह फैसला आसान नहीं था, लेकिन हालात ने उन्हें समय से पहले बड़ा बना दिया। स्वरा की जुबानी, उनके संघर्ष की कहानी… पहली बार मिले 5000 रुपए तो रो पड़ीं
स्वरा बताती हैं कि जब उन्हें पहली बार 5000 रुपये मिले, तो वह पल उनके लिए बेहद खास था। पहले जहां वह 1000-1500 रुपये में काम करती थीं, वहीं यह रकम उनके लिए किसी सपने से कम नहीं थी। उस दिन उन्हें लगा कि उनकी मेहनत अब रंग लाने लगी है।
इसके बाद स्वरा ने ‘लोफर’, ‘चंबल के डाकू’, ‘वार्निंग’, ‘महाशय जी’, ‘चार-पांच पिस्तौल’ और ‘ब्लडर’ जैसे कई हिट गानों में अपनी आवाज दी। उन्होंने केडी और खासा आला चहर जैसे कलाकारों के साथ भी काम किया, जिससे उनकी पहचान हरियाणा ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों तक पहुंच गई। ‘शीशा’ ने दिलाई देशभर में पहचान करनाल के मीता रोड द्वारा लिखे गए ‘शीशा’ गाने ने स्वरा की किस्मत बदल दी। यह गाना पहले सोशल मीडिया पर ट्रेंड हुआ, फिर धीरे-धीरे पूरे देश में छा गया। आज यह Billboard India पर दूसरे स्थान पर बना हुआ है। इस गाने ने स्वरा को एक नई पहचान और बड़ा मंच दिया। ‘शीशा’ की सफलता के बाद स्वरा को हरियाणा, पंजाब और मुंबई से ऑफर मिल रहे हैं। फिलहाल वह पंजाबी इंडस्ट्री में काम करना चाहती हैं, लेकिन उनका सपना बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाने का है। परिवार बना सबसे बड़ा सहारा आज स्वरा के पिता और भाई असंध में फूड कैफे चला रहे हैं, जबकि उनका दूसरा भाई उनके काम को मैनेज करता है। जो परिवार कभी उन्हें बाहर भेजने से डरता था, आज वही उनकी सबसे बड़ी ताकत बन चुका है।

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