मधेपुरा में 70 प्रतिभागियों के लिए ड्रामा वर्कशॉप शुरू:पटना के कोच 12 दिनों तक देंगे ट्रेनिंग, एक्टिंग की बारीकी से अवगत होंगे पार्टिसिपेंट

मधेपुरा में 70 प्रतिभागियों के लिए ड्रामा वर्कशॉप शुरू:पटना के कोच 12 दिनों तक देंगे ट्रेनिंग, एक्टिंग की बारीकी से अवगत होंगे पार्टिसिपेंट

मधेपुरा में कला, संस्कृति विभाग और जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में मकर संक्रांति महोत्सव एवं वसंत पंचमी महोत्सव-2026 के अवसर पर शनिवार को बीएन मंडल स्टेडियम में नाटक कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। यह कार्यशाला 10 से 21 जनवरी तक आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम का उद्घाटन जिला शिक्षा पदाधिकारी संजय कुमार, कला संस्कृति पदाधिकारी आम्रपाली कुमारी, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी अनंत कुमार, मुख्य प्रशिक्षक कुमार सुमित एवं प्रसिद्ध नाटककार सुरेश कुमार ‘शशि’ द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। लोक संस्कृति को सहेजने का प्रभावी जरिया भी नाटक उद्घाटन अवसर पर अतिथियों ने नाटक एवं रंगमंच की सामाजिक भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि नाटक न केवल मनोरंजन का सशक्त माध्यम है, बल्कि यह समाज को जागरूक करने, संवेदनशील विषयों पर विमर्श स्थापित करने तथा लोक संस्कृति को सहेजने का प्रभावी जरिया भी है। व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा जिला शिक्षा पदाधिकारी संजय कुमार ने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम युवाओं में रचनात्मकता के विकास के साथ-साथ आत्मविश्वास बढ़ाने में सहायक सिद्ध होते हैं। कला संस्कृति पदाधिकारी आम्रपाली कुमारी ने बताया कि नाटक कार्यशाला के माध्यम से जिले के उभरते कलाकारों को मंचीय अभिनय, संवाद अदायगी, शारीरिक अभिव्यक्ति और नाट्य अनुशासन का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कला एवं संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयासरत डीपीआरओ अनंत कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन कला एवं संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयासरत है, ताकि स्थानीय प्रतिभाओं को उचित मंच मिल सके। मुख्य प्रशिक्षक कुमार सुमित ने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को अभिनय की बारीकियों, चरित्र निर्माण, मंच सज्जा, प्रकाश व्यवस्था एवं निर्देशन की मूलभूत तकनीकों से अवगत कराया जाएगा। नाटककार सुरेश कुमार शशि ने कहा कि रंगमंच समाज का दर्पण होता है और युवा कलाकारों की सक्रिय भागीदारी से ही इसकी परंपरा जीवंत रहती है। इस नाटक कार्यशाला में कुल 70 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। ”जीवन में जितनी कलाएं हैं, वह नाटक में समाहित” राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय सिक्किम के छात्र रह चुके रिसर्च स्कॉलर प्रशिक्षक कुमार सुमित ने कहा कि जीवन में जितनी कलाएं हैं, वह नाटक में समाहित है। कार्यक्रम के अंत में अतिथियों ने सभी प्रतिभागियों को सफल प्रशिक्षण के लिए शुभकामनाएं दीं और भविष्य में ऐसे और कार्यक्रम आयोजित किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। मधेपुरा में कला, संस्कृति विभाग और जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में मकर संक्रांति महोत्सव एवं वसंत पंचमी महोत्सव-2026 के अवसर पर शनिवार को बीएन मंडल स्टेडियम में नाटक कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। यह कार्यशाला 10 से 21 जनवरी तक आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम का उद्घाटन जिला शिक्षा पदाधिकारी संजय कुमार, कला संस्कृति पदाधिकारी आम्रपाली कुमारी, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी अनंत कुमार, मुख्य प्रशिक्षक कुमार सुमित एवं प्रसिद्ध नाटककार सुरेश कुमार ‘शशि’ द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। लोक संस्कृति को सहेजने का प्रभावी जरिया भी नाटक उद्घाटन अवसर पर अतिथियों ने नाटक एवं रंगमंच की सामाजिक भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि नाटक न केवल मनोरंजन का सशक्त माध्यम है, बल्कि यह समाज को जागरूक करने, संवेदनशील विषयों पर विमर्श स्थापित करने तथा लोक संस्कृति को सहेजने का प्रभावी जरिया भी है। व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा जिला शिक्षा पदाधिकारी संजय कुमार ने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम युवाओं में रचनात्मकता के विकास के साथ-साथ आत्मविश्वास बढ़ाने में सहायक सिद्ध होते हैं। कला संस्कृति पदाधिकारी आम्रपाली कुमारी ने बताया कि नाटक कार्यशाला के माध्यम से जिले के उभरते कलाकारों को मंचीय अभिनय, संवाद अदायगी, शारीरिक अभिव्यक्ति और नाट्य अनुशासन का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कला एवं संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयासरत डीपीआरओ अनंत कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन कला एवं संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयासरत है, ताकि स्थानीय प्रतिभाओं को उचित मंच मिल सके। मुख्य प्रशिक्षक कुमार सुमित ने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को अभिनय की बारीकियों, चरित्र निर्माण, मंच सज्जा, प्रकाश व्यवस्था एवं निर्देशन की मूलभूत तकनीकों से अवगत कराया जाएगा। नाटककार सुरेश कुमार शशि ने कहा कि रंगमंच समाज का दर्पण होता है और युवा कलाकारों की सक्रिय भागीदारी से ही इसकी परंपरा जीवंत रहती है। इस नाटक कार्यशाला में कुल 70 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। ”जीवन में जितनी कलाएं हैं, वह नाटक में समाहित” राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय सिक्किम के छात्र रह चुके रिसर्च स्कॉलर प्रशिक्षक कुमार सुमित ने कहा कि जीवन में जितनी कलाएं हैं, वह नाटक में समाहित है। कार्यक्रम के अंत में अतिथियों ने सभी प्रतिभागियों को सफल प्रशिक्षण के लिए शुभकामनाएं दीं और भविष्य में ऐसे और कार्यक्रम आयोजित किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *