98 यूनिवर्सिटियों में फैला था डॉ मनीष का नेटवर्क:टेलीकॉलिंग सेंटर से चलता था फर्जी डिग्री का धंधा, 6 बार आया था कानपुर

98 यूनिवर्सिटियों में फैला था डॉ मनीष का नेटवर्क:टेलीकॉलिंग सेंटर से चलता था फर्जी डिग्री का धंधा, 6 बार आया था कानपुर

फर्जी डिग्री, मार्कशीट सिंडिकेट के खुलासे के बाद सामने आया सरगना डॉ मनीष कुमार पहले भी 6 बार कानपुर आ चुका था। पुलिस को आरोपी के देश भर के 98 यूनिवर्सिटियों से संपर्क होने की जानकारी सामने आई, जिसके बाद पुलिस तेजी से डॉ मनीष कुमार के पीछे लग गई। 18 फरवरी को जिस वक्त गौशाला स्थित शैल ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट के कार्यालय में छापेमारी हुई तो वह दुबई में एक अवार्ड प्रीमियम लांच कराने के लिए गया था। जहां से वापसी के दौरान उसे शैलेंद्र ओझा व गिरोह के अन्य सदस्यों के गिरफ्तार होने की जानकारी मिली, जिसपर वह हैदराबाद से पुणे, मंबई, फरीदाबाद, दिल्ली समेत अन्य ठिकानों में 3 महीनों तक छिपा रहा। पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने बताया कि मनीष ने 2011 में अपनी मां रचना के नाम पर रचना अग्रवाल एजुकेशनल सोसाइटी नाम की फर्म भी हैदराबाद में बनाई थी। फेसबुक के जरिए शेखर के संपर्क में आया था मनीष मनीष फेसबुक के जरिए कानपुर के शेखर गुप्ता से जुड़ा, जिसके बाद 2019 में पहली बार कानपुर आया था। शेखर ही अलग-अलग राज्यों से ग्राहकों की डिमांड जुटाता था और वाट्सएप पर नाम, फोटो, विषय, रोल नंबर और यूनिवर्सिटी की जानकारी भेजता था। इसके बाद तैयार डाटा इंदौर निवासी संजय पंजानी तक पहुंचाया जाता था। कमिश्नर के मुताबिक संजय पंजानी के पास हाई क्वालिटी प्रिंटिंग सेटअप है, जहां प्रोफेशनल डिग्रियां, मार्कशीट और माइग्रेशन सर्टिफिकेट तैयार किए जाते थे। गिरोह केवल सामान्य अंकपत्र ही नहीं, बल्कि बीटेक, एमटेक, बीफार्मा, डीफार्मा और एलएलबी जैसे प्रोफेशनल कोर्स की डिग्रियां भी तैयार करता था। डॉ मनीष गिरोह में मिडिल मैन की तरह काम करता था, हाईस्कूल, इंटरमीडिएट में बच्चों को एडमिशन कराता था। बच्चों के फेल होने पर उन्हें पास कराने, नौकरी के लिए डिग्री, सर्टिफिकेट मुहैया कराने की मनीष ने शुरूआत कर दी। शैलेंद्र के कहने पर शेखर उसे डिग्री, मार्कशीट की डिमांड भेजता था, जिसके बाद मनीष इंदौर के संजय पंजानी को मार्कशीट तैयार करने को कहता था। संजय अपने प्रिंटिंग प्रेस में मार्कशीट व डिग्री छाप कर उसे मुहैया कराता था, हर डिग्री के एवज में उसे 15 हजार रुपए मिलते थे। इसके बाद कोविड महामारी के दौरान गिरोह का गोरखधंधा खूब फला फूला। गिरोह के मेंबर लोगों का एडमिशन कराकर उन्हें पास कराने का ठेका लेने के साथ फर्जी डिग्री भी मुहैया कराने के काम करने लगे थे। इस दौरान मनीष ने फर्जी डिग्री का रैकेट हैदराबाद, मुंबई, बैंगलौर, फरीदाबाद तक फैला लिया था। लंदन की संस्था ने खारिज कर दी थी फ्रेंचाइजी पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने बताया कि मनीष दो बार दुबई जा चुका है, उसने विदेशों तक अपने पांव पसारने के लिए 2022 में लंदन की संस्था ग्लोबल बुक ऑफ एक्सीलेंस अवॉर्ड से फ्रेंचाइजी हासिल की। इसके बाद उसने मुंबई, गोवा व बैंगलूरू में चार बार एक्सीलेंस अवार्ड समारोह आयोजित कराया, जिसके प्रमोशन के लिए वह कई सेलिब्रेटियों को बुलाता था, इसके साथ ही कला, समाज सेवा व साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वालों सेलेब्रेटियों को सम्मानित कराता था। वर्ष 2022 में उसने पहली बार मुंबई में अवार्ड फंक्शन कराया, जिसमें 30 से 35 लोगों को सम्मानित किया गया। यह अवार्ड समारोह मुंबई के गुजराती भवन में किया गया था, जिसमें मशहूर टेलीविजन प्रोग्राम तारक मेहता का उल्टा चश्मा के कलाकारों को भी सम्मानित किया गया था। इसके बाद वर्ष 2024 व 25 में गोवा और बैंगलौर में समारोह आयोजित किया गया था। पुलिस कमिश्नर ने बताया कि लंदन की संस्था ने वेरीफिकेशन के लिए मनीष से दस्तावेज मांगे, जिस पर उसने आधार कार्ड दिया था। आधार कार्ड संस्था ने खारिज कर दिया, जिसपर उसने पासपोर्ट बनाया, जिसे थी HMRC ने खारिज कर दिया था। टेलीकॉलर का इस्तेमाल करता था मनीष पूछताछ के दौरान मनीष ने बताया कि उसका हैदराबाद में इंस्टीट्यूट के साथ कॉलिंग सेंटर बना रखा था। कॉलिंग सेंटर में मनीष ने करीब 20 युवक युवतियों को टेली कॉलिंग के लिए बकायादा 25 से 30 हजार रुपए की सैलरी पर रखा था। जिनका काम फेल होने वाले छात्र–छात्राओं, नौकरी के लिए डिग्री व सर्टिफिकेट तैयार कराने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करने का था।

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