रतलाम। इस वर्ष 16 मई को आने वाली शनि जयंती विशिष्ट योग और संयोग के साथ आ रही है। इस दिन अमावस्या, शनिवार और वट सावित्री व्रत का संयुक्त संयोग बन रहा है, जिसे जातकों के लिए शनि संबंधी पीड़ा व विकारों को दूर करने में विशेष सहायक माना जा रहा है।
इस दौरान किए गए दान, धर्म, पुण्य और साधना से शनि का विशेष अनुग्रह प्राप्त होता है, जिससे समस्त व्याधियां व पीड़ाएं दूर होकर कार्य सिद्ध होते हैं। शनि देव की प्रसन्नता के लिए इस दिन विशेष तौर पर सरसों के तेल का अभिषेक, शनि बीज मंत्र “ओम प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम:” या “ओम शं शनैश्चराय नम:” का जाप, शनि स्तोत्र व शनि कवच का पाठ लाभकारी होता है। काला तिल, वस्त्र, उड़द, नया स्टील पात्र, तेल और पक्षियों के लिए जल पात्र का दान भी विशेष पुण्यकारी माना गया है।
राशियों पर प्रभाव
श्री सिध्दविजय पंचांङ्ग के अनुसार, शनिदेव ने 29 मार्च 2025 को मीन राशि में प्रवेश किया है और वे आगामी 3 जून 2027 तक इसी राशि में रहेंगे। इस अवधि में मेष, कुंभ एवं मीन राशि वाले जातकों को शनि की साढ़ेसाती रहेगी, जबकि सिंह और धनु राशि वालों को शनि की ढैया का प्रभाव रहेगा। अन्य सात राशियों को शनि का सामान्य शुभाशुभ फल प्राप्त होगा।
शनि दोष निवारण में सहायक
पं. नरेश शर्मा ने बताया कि शनि की साढ़े साती व ढैय्या से राहत के लिए काले तिल, सरसों का तेल, काले वस्त्र, जूते-चप्पल या लोहे की वस्तुओं का दान उत्तम माना गया है। शनिवार की शाम को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक लगाकर ‘ ओम शं शनैश्चराय नम:’ मंत्र का जाप भी अत्यंत लाभकारी होता है। राशि अनुसार विशिष्ट दान का भी विधान है, जो शनि दोष निवारण में सहायक है।
राशि अनुसार शनि दान
मेष-लाल रंग के मौसमी फल या वस्त्र, पक्षियों को दाना।
वृषभ-चावल, चीनी और दूध।
मिथुन-नीले रंग के वस्त्र या उड़द की दाल।
कर्क-चावल, सफेद वस्त्र या दूध।
सिंह-लाल रंग के वस्त्र या गुड़।
कन्या-हरा चारा गौशाला में या हरी मूंग दाल।
तुला-राहगीरों को पानी/शर्बत या नीले वस्त्र।
वृश्चिक-गन्ने का रस या मसूर की दाल, पौधा लगाने का ट्री गार्ड।
धनु-मोरपंख या बेसन के लड्डू , शर्बत।
मकर-डमरू शिव मंदिर में, काले कपड़े या कंबल, काली मटकी का प्याऊ पर दान।
कुंभ-चमड़े के जूते, छाता या काले तिल, पानी की नान का प्याऊ पर दान।
मीन-पके केले, बेसन या हल्दी,पुस्तक, कॉपी।
सागरेश्वर शनिधाम पर मनेगा दो दिन उत्सव
शनिदेव का जन्मोत्सव 16 मई शनिश्चरी अमावस्या के दिन धूमधाम मनाया जाएगा। इसकी तैयारी शहर के शनि मंदिरों पर की जा रही है। प्राचीन चिंगीपुरा के साथ ही, अलकापुरी, महेश नगर, गांधीनगर, अमृतसागर तालाब, ऑफिसर कॉलोनी आदि प्रमुख शनिदेव मंदिर पर ती-चार तो कहीं पांच दिवसीय उत्सव मनाया जाएगा।
नित्यानंद गौशाला आश्रम अमलेटा फंटा अवधुत विश्वानंद के सान्निध्य में सागरेश्वर महादेव शनि धाम मंदिर अमृतसागर तालाब पर शनिश्चरी अमावस्या पर दो दिवसीय शनि जयंती उत्सव मनाया जाएगा। 15 मई सुबह 7 बजे से रामायण पाठ की शुरुआत होगी। 16 मई को ब्रह्ममुहूर्त में तेलांग अभिषेक किया जाएगा। दोपहर 2 बजे पूर्णाहुति के बाद महिला मंडल 3 से 5 बजे तक भजन करेंगी। अध्यक्ष शंकर स्वामी ने बताया कि शाम 5 बजे आरती की जाएगी। 6.30 बजे शनिदेव की आरती कर प्रसादी का आयोजन होगा। रात्रि 8 बजे से सुंदरकांड का आयोजन बालाजी भक्त मंडल की ओर से किया जाएगा। सागरेश्वर महादेव शनि सेवा समिति ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने भक्तों से धर्मलाभ लेने का आग्रह किया हैं।
दक्षिणमुखी शनिधाम पर पांच दिनी मनेगा उत्सव
दक्षिणमुखी शनि धाम अलकापुरी इंद्रलोक नगर पर 16 मई को जन्मोत्सव मनाया जाएगा। 13 मई को सुबह 10 बजे गणेश अम्बिका पूजन, 14 मई को महिलाओं की भजन संध्या शाम 7 बजे से होगी। 15 मई को शनि महाराज की पालकी यात्रा शाम 5 बजे मंदिर से निकाली जाएगी। 16 मई को शनिदेव का तेलांग अभिषेक एवं नवग्रह शांति हवन का आयोजन होगा। रात्रि 10 बजे से सुंदरकांड पाठ किया जाएगा। 17 मई को मंदिर पर भंडारे का आयोजन शाम 6 बजे से होगा। शनिदेव भक्त मंडल ने आयोजन शामिल होकर धर्मालुओं से लेने का आग्रह किया हैं।


