इन्हें उठाओ… जल्दी बाहर लेकर चलो… कोई एंबुलेंस वाले को कॉल करो। इतने लोगों की यहां मौत हो गई… ये कहते हैं वीडियो मत बनाओ… यह दर्द और गुस्सा गुरुवार को देवास में पटाखा फैक्ट्री में ब्लास्ट के बाद दिखने को मिला। धमाके में 3 मजदूरों की मौत हो गई। वहीं, 25 मजदूर घायल हो गए। घटना के बाद प्रशासन ने फैक्ट्री को सील कर दिया और फैक्ट्री मालिक अनिल मालवीय को हिरासत में ले लिया। सरकार ने मृतकों के परिजन को 4-4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता और घायलों के मुफ्त इलाज की घोषणा की। हादसे के बाद दैनिक भास्कर की टीम मौके पर पहुंची, मृतक और घायलों की हालत डराने वाली थी। साथियों ने कहा– मदद के लिए 72 कॉल किए, तब जाकर एंबुलेंस आई। पढ़िए रिपोर्ट… हादसे में तीन लोगों की मौत
देवास जिले के टोंककलां इलाके में गुरुवार सुबह करीब 11:30 बजे पटाखा फैक्ट्री में जोरदार धमाका हुआ। हादसे में फैक्ट्री मजदूर धीरज, सनी और सुमित की मौत हो गई। 25 लोगों में 13 की हालत गंभीर है, जिन्हें देवास और इंदौर में अलग–अलग अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। 2 किमी दूर गांव तक सुनाई दी धमाके की आवाज
दैनिक भास्कर की टीम जब आगरा–मुंबई हाईवे किनारे स्थिति पटाखा फैक्ट्री में पहुंची तो यहां धुआं उठ रहा था। बारूद से झुलसे लोगों को एंबुलेंस से अस्पताल भिजवाया जा रहा था। जिस फैक्ट्री में 500 लोग प्रतिदिन काम के लिए पहुंचते थे, कोई नजर नहीं आ रहा था। चारों तरफ सिर्फ पुलिस–प्रशासन, निगम और बड़ी संख्या में ग्रामीण ही थे। ब्लास्ट के बाद घायलों के शरीर से कपड़े गायब थे, जो बचे थे, वे चमड़ी से चिपक चुके थे। बिना कपड़ों के तपती जमीन पर पड़े घायलों का पूरा शरीर जला हुआ था और सिर्फ दर्द से उनकी चीख सुनाई दे रही थी। दर्द से राहत मिले, इसके लिए मजदूर साथी खत्ते से हवा कर रहे थे। एंबुलेंस अंदर तक नहीं आई तो घायलों को साथी पैदल ही हाईवे तक लेकर आ गए। टीन शेड उड़कर हाईवे पर पहुंचा
वहीं, फैक्ट्री का टीन शेड उड़कर हाईवे पर पड़ा हुआ था। विस्फोट के बाद फैक्ट्री की दीवारें ढह चुकी हैं। हादसे वाले ब्लॉक में सिर्फ लोहे के पाइप ही खड़े नजर आए, बाकी स्ट्रक्चर जमींदोज हो चुका था। यहां मलबे का ढेर लगा है, जिसके नीचे बारूद और केमिकल दबा हुआ है। मौके पर मौजूद कुछ ग्रामीणों से बात की तो उन्होंने बताया कि ब्लास्ट की आवाज 2 किमी दूर गाव तक सुनाई दी। हादसे के बाद शवों के टुकड़े 20 से 25 फीट दूर तक जा बिखरे हुए थे। कुछ अंश हाईवे पर तो कुछ फैक्ट्री के आसपास पड़े थे, जिन्हें टीम ने समेटकर बोरे में भरा। जहां बनता था बारूद, मलबे में तब्दील
दैनिक टीम जब फैक्टी के भीतर दाखिल हुई तो यहां 6 से ज्यादा ब्लॉक नजर आए। सभी में अलग–अलग काम होता था। जहां ब्लास्ट हुआ, वहां पर केमिकल से बारूद बनाने का काम होता था। यह अब मलबे में तब्दील हो चुका है। पास में ही दो ब्लॉक छोड़कर माचिस पटाखा बनाने का काम होता था। हादसे के बाद यहां बड़ी संख्या में बिखरे हुए माचिस पटाखे मिले। पानी की बोतल, मजदूरों की चप्पलें पड़ी थीं, जिनमें ज्यादातर महिलाओं की थीं, यानी ज्यादातर महिलाएं पटाखा पैकिंग का काम करती थीं। फैक्ट्री में पिछले हिस्से में 20 बाय 20 का एक हॉल है, जिसमें 25 से ज्यादा गद्दे बिछे हुए थे। यह हिस्सा फैक्ट्री प्रबंधन ने बाहर आए मजदूरों के रहने लिए बनाया है। यहां पर चारों ओर रोटी–सब्जी पड़ी थी। यहां का दृश्य बता रहा था कि लोग यहां खाने की तैयारी में थे। ब्लास्ट के बाद खाना छोड़कर भागे हैं। यहां मौजूद ग्रामीण गौतम ने बताया कि मजदूरों की भोजन की गाड़ी आ गई थी और लंच होने वाला था। इसी दौरान ब्लास्ट हो गया। कुछ लोगों ने गाड़ी से खाना ले भी लिया था, लेकिन खा नहीं पाए। उन्होंने बताया कि कुछ मजदूर बिहार के थे और स्थाई रूप से तीन शेड के अंदर ही रह रहे थे। इसी हिस्से से सटकर एक बड़ा हॉल है, जिसमें 200 से ज्यादा छोटी–बड़ी मशीनें रखी थींं, इनमें ज्यादातर पैकिंग मशीनें थीं, जिसकी मदद से बारूद को थैली में पैक किया जाता था। धमाके के बाद बाहर आकर देखा तो धुंआ नजर आया
मौके पर मौजूद प्रत्यदर्शी ने राकेश मंडलोई ने बताया कि फैक्ट्र्री के कुछ दूर ही मेरा घर है। सुबह करीब 11 अचानक से धमाके की आवाज सुनाई दी। बाहर देखा तो फैक्ट्री से धुआं उठ रहा था। टीन शेड हवा में उड़ते दिखे। पास आकर देखा तो शवों के टुकड़े हाईवे पर दिखे। लोग भाग रहे थे। कुछ मदद में लगे हुए थे। अन्य प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि पटाखा फैक्ट्री गांव से करीब दो मीटर दूर हाईवे से लगी है। टोंककला के साथ ही कलमा गांव फैक्ट्री के सबसे पास हैं। धमका इतना जोरदार था कि गांव में घरों के बर्तन तक हिल गए। हाईवे से 25 फीट दूर उड़कर गिरे शवों के अंश
हादसा आगरा–मुंबई नेशनल हाईवे पर हुआ है। फैक्ट्री हाईवे से लगी हुई है। हादसे के बाद टीन शेड हाईवे पर आकर गिरा। वहीं, ब्लास्ट की चपेट में आने से शवों के अंश हाईवे पर गिरे। इनमें सिर के बाल से लेकर मांस के टुकड़े तक थे। 72 बार कॉल किया, जब एक एंबुलेंस आई
बिहार के रहने वाले मजदूर शशिकुमार पासवान 2 साल से पटाखा फैक्ट्री में काम कर रहे हैं। ढाई महीने पहले ही उन्होंने इस फैक्ट्री में काम करना शुरू किया है। वे बताते हैं कि यहां 24 घंटे काम होता है और 500 से 600 लोग यहां रोज जुटते हैं। सुबह करीब 11 बजे की बात होगी। मैं अपने ब्लॉक में काम कर रहा था। पास वाले ब्लॉक में करीब 25 लोग थे। अचानक से ब्लॉस्ट की आवाज सुनाई दी। भागकर बाहर आया तो देखा कई लोग जले हुए थे। हम उनकी मदद में जुट गए। शशिकुमार का कहना है कि पटाखा बनाने का बारूद, जिस 99 कहते हैं… इसी में गर्मी के कारण ब्लास्ट हुआ। हादसे के बाद हमने एंबुलेंस को कॉल करना शुरू किया। अलग–अलग लोगों ने करीब 72 बार कॉल किया होगा, तब जाकर एंबुलेंस आई। पुरुषों को 400, महिलाओं को प्रतिदिन 250 रुपए दिहाड़ी
यहां काम करने वालों का कहना है कि फैक्टी में बारूद से लेकर फटाखा निर्माण तक होता है। अलग–अलग जगह से लोग आकर यहां काम कर रहे हैं। बाहर से आए 30 से ज्यादा लोग फैक्ट्री के ही पिछले हिस्से में रह रहे थे, जो हादसे के बाद यहां से भाग गए। कंपनी की ओर से ही इनके रहने–खाने की व्यवस्था की गई थी। हादसे के वक्त वो लोग खाना खाने वाले थे। इन्होंने बताया कि पुरुषों को प्रतिदिन ₹400 और महिलाओं को 250 रुपए दहाड़ी मिलती थी। मजदूरों को हर सप्ताह पेमेंट होता था। फैक्ट्री कर्मी – गर्मी बढ़ी, यही हादसे की वजह बनी
फैक्ट्री में काम करने वाले मोहम्मद नासिर ने बताया कि कुछ लड़के काम से फ्री होकर खाना खाने गए थे, तभी एल्युमीनियम पाउडर में ब्लास्ट हो गया। पानी की सुविधा नहीं होने से तापमान बढ़ा और ब्लास्ट का यही कारण बना। । नासिर का कहना है कि यहां पर यूपी–बिहार के साथ ही बड़ी संख्या में स्थानीय लोग काम करते हैं। उनका कहना है कि उन्हें एमडी नामक सुपरवाइजर बिहार से काम दिलाने का कहकर यहां लाया था। यहां काम के हिसाब से सभी को अलग–अलग पेमेंट मिलती है। मुझे 18000 रुपए महीना मिलते हैं। किसी को 16000 तो किसी को 17000 रुपए महीना बंटता है। 3 बीघा से ज्यादा में फैली है फैक्ट्री
हादसे के बाद बड़ी संख्या में लोग फैक्ट्री के बाहर जमा हो गए। उन्होंने यहां प्रशासिक अधिकरियों का भी घेराव किया। उन्होंने यहां पर सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया यहां पटाखा बनाता ही नहीं, प्रतिदिन सप्लाई भी होता है। 3 बीघा से ज्यादा एरिया में फैली इस फैक्ट्री में पिछले 8 महीने से यह काम हो रहा है। अभी तो फैक्ट्री पूरी बनी भी नहीं और पटाखे बनने लगे। पहले भी हादसे हुए, पर जनहानि नहीं हुई तो किसी ने ध्यान नहीं दिया। नेता प्रतिपक्ष बोले– हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लारपरवाही
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का कहना है कि देवास की पटाखा फैक्ट्री में हुआ भीषण विस्फोट सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्ट सिस्टम की भयावह सच्चाई है। 3 मजदूरों की दर्दनाक मौत, कई लोग गंभीर रूप से घायल, महिलाओं के लापता होने की खबरें और शवों के टुकड़े 20-25 फीट दूर तक बिखर जाना… यह दृश्य बेहद विचलित करने वाला है। ग्रामीण लगातार आरोप लगा रहे हैं कि फैक्ट्री अवैध रूप से संचालित हो रही थी और शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। आखिर किसके संरक्षण में मौत का यह कारोबार चल रहा था? गरीब मजदूर ₹250-400 की दिहाड़ी के लिए अपनी जान जोखिम में डालें और सत्ता-प्रशासन आंखें बंद करके बैठा रहे, यह बेहद शर्मनाक और अमानवीय है। मुख्यमंत्री जी, सिर्फ जांच और मुआवजे की घोषणा से जिम्मेदारी खत्म नहीं होगी। दोषी फैक्ट्री संचालकों, जिम्मेदार अधिकारियों और संरक्षण देने वालों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। यह खबर भी पढ़ें
एमपी में पटाखा फैक्ट्री में ब्लास्ट, 3 की मौत मध्य प्रदेश के देवास जिले के टोंक कलां इलाके में गुरुवार सुबह करीब 11:30 बजे पटाखा फैक्ट्री में जोरदार धमाका हुआ। हादसे में धीरज, सनी और सुमित नाम के 3 मजदूरों की मौत हो गई, जबकि 25 लोग घायल हुए। इनमें 13 गंभीर घायलों को अलग-अलग अस्पतालों में रेफर किया गया। पूरी खबर पढ़ें…


