गयाजी में 40 देशों के भक्त जुटे:बोधगया से विश्व शांति का संदेश, विधानसभा अध्यक्ष बोले- भारत की ताकत को मिल रही वैश्विक पहचान

गयाजी में 40 देशों के भक्त जुटे:बोधगया से विश्व शांति का संदेश, विधानसभा अध्यक्ष बोले- भारत की ताकत को मिल रही वैश्विक पहचान

विश्व शांति, आध्यात्मिक एकता और धार्मिक समन्वय का बड़ा संदेश आज बोधगया की पावन धरती से पूरी दुनिया तक पहुंचा। अंतरराष्ट्रीय पर्यटक स्थल बोधगया स्थित वाट थाई मगध बौद्ध विपश्यना मठ में अंतर्राष्ट्रीय आंतरिक शांति सम्मेलन आयोजित हुआ। इसमें 40 देशों के श्रद्धालुओं, साधकों और धर्मगुरुओं की मौजूदगी ने इसे वैश्विक आध्यात्मिक संगम बना दिया। बुद्ध वंदना के साथ शुरू हुए इस भव्य आयोजन में भारत सहित अमेरिका, रूस, आयरलैंड, जर्मनी और नेपाल समेत कई देशों से आए प्रतिनिधियों ने शांति, सद्भाव और आध्यात्मिक मूल्यों पर मंथन किया। स्थानीय स्कूली बच्चों ने दी प्रस्तुति सम्मेलन का माहौल पूरी तरह आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर दिखा। स्थानीय स्कूली बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए भारतीय संस्कृति, बौद्ध परंपरा और सनातन मूल्यों की सुंदर झलक पेश की। कार्यक्रम में बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि बोधगया की धरती सिर्फ बिहार या भारत के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए शांति और ज्ञान का केंद्र है। यहां इस तरह के अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों से भारत की आध्यात्मिक विरासत को वैश्विक पहचान मिल रही है और दुनिया तक शांति का मजबूत संदेश पहुंच रहा है। साधु-संतों और श्रद्धालुओं को धन्यवाद दिया डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि आज जब दुनिया अशांति और तनाव के दौर से गुजर रही है, तब बोधगया जैसे पवित्र स्थल से आंतरिक शांति का संदेश और भी प्रासंगिक हो जाता है। उन्होंने आयोजन में शामिल साधु-संतों और श्रद्धालुओं को धन्यवाद देते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज को जोड़ने और मानवता को दिशा देने का काम करते हैं। विदेश से आईं आध्यात्मिक गुरु साईं लक्ष्मी देवी की अगुवाई में आयोजित इस सम्मेलन में हिंदू और बौद्ध धर्म के संतों, विद्वानों और साधकों ने धार्मिक समन्वय पर विशेष जोर दिया। अंतरराष्ट्रीय योग गुरु स्वामी संतोषानंद ने बताया कि 40 देशों के करीब 90 साधकों की भागीदारी इस आयोजन को विशेष बनाती है। बोधगया से विश्व शांति का संदेश देना केवल आध्यात्मिक आयोजन नहीं, बल्कि वैश्विक सद्भाव की दिशा में बड़ा प्रयास है। विश्व शांति, आध्यात्मिक एकता और धार्मिक समन्वय का बड़ा संदेश आज बोधगया की पावन धरती से पूरी दुनिया तक पहुंचा। अंतरराष्ट्रीय पर्यटक स्थल बोधगया स्थित वाट थाई मगध बौद्ध विपश्यना मठ में अंतर्राष्ट्रीय आंतरिक शांति सम्मेलन आयोजित हुआ। इसमें 40 देशों के श्रद्धालुओं, साधकों और धर्मगुरुओं की मौजूदगी ने इसे वैश्विक आध्यात्मिक संगम बना दिया। बुद्ध वंदना के साथ शुरू हुए इस भव्य आयोजन में भारत सहित अमेरिका, रूस, आयरलैंड, जर्मनी और नेपाल समेत कई देशों से आए प्रतिनिधियों ने शांति, सद्भाव और आध्यात्मिक मूल्यों पर मंथन किया। स्थानीय स्कूली बच्चों ने दी प्रस्तुति सम्मेलन का माहौल पूरी तरह आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर दिखा। स्थानीय स्कूली बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए भारतीय संस्कृति, बौद्ध परंपरा और सनातन मूल्यों की सुंदर झलक पेश की। कार्यक्रम में बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि बोधगया की धरती सिर्फ बिहार या भारत के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए शांति और ज्ञान का केंद्र है। यहां इस तरह के अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों से भारत की आध्यात्मिक विरासत को वैश्विक पहचान मिल रही है और दुनिया तक शांति का मजबूत संदेश पहुंच रहा है। साधु-संतों और श्रद्धालुओं को धन्यवाद दिया डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि आज जब दुनिया अशांति और तनाव के दौर से गुजर रही है, तब बोधगया जैसे पवित्र स्थल से आंतरिक शांति का संदेश और भी प्रासंगिक हो जाता है। उन्होंने आयोजन में शामिल साधु-संतों और श्रद्धालुओं को धन्यवाद देते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज को जोड़ने और मानवता को दिशा देने का काम करते हैं। विदेश से आईं आध्यात्मिक गुरु साईं लक्ष्मी देवी की अगुवाई में आयोजित इस सम्मेलन में हिंदू और बौद्ध धर्म के संतों, विद्वानों और साधकों ने धार्मिक समन्वय पर विशेष जोर दिया। अंतरराष्ट्रीय योग गुरु स्वामी संतोषानंद ने बताया कि 40 देशों के करीब 90 साधकों की भागीदारी इस आयोजन को विशेष बनाती है। बोधगया से विश्व शांति का संदेश देना केवल आध्यात्मिक आयोजन नहीं, बल्कि वैश्विक सद्भाव की दिशा में बड़ा प्रयास है।  

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