महराजगंज में भुगतान घोटाले की जांच में देरी:स्थानांतरित अधिकारी को सौंपी गई, संशोधित आदेश में लगे पांच दिन

महराजगंज में भुगतान घोटाले की जांच में देरी:स्थानांतरित अधिकारी को सौंपी गई, संशोधित आदेश में लगे पांच दिन

महराजगंज के निचलौल ब्लॉक के भेड़िया गांव में पंचायत भवन निर्माण और मनरेगा पार्क से संबंधित ₹5.09 लाख के भुगतान घोटाले की जांच में देरी पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि सरकारी निर्माण कार्यों के लिए नियमों के विपरीत तीन अलग-अलग व्यक्तियों के निजी बैंक खातों में भुगतान किया गया। मामला सामने आने के बाद भी डीपीआरओ स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। भेड़िया गांव में राबिश, सेल्ट और मिट्टी भराई जैसे कार्यों के लिए कुल ₹5,09,580 का भुगतान निजी खातों में स्थानांतरित किया गया। पंचायत अधिनियम के अनुसार, सरकारी निर्माण कार्यों में भुगतान केवल फर्म पंजीकृत आपूर्तिकर्ता या अधिकृत एजेंसी के माध्यम से किया जाना चाहिए। उपलब्ध वाउचरों के अनुसार, यह राशि छह अलग-अलग भुगतानों के माध्यम से निजी खातों में स्थानांतरित की गई: इस मामले के उजागर होने के बाद, 31 दिसंबर को जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा ने दो सदस्यीय जांच समिति का गठन किया। इसमें डीसी मनरेगा गौरवेंद्र प्रताप सिंह और सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता संजय प्रताप मल्ल को शामिल किया गया। हालांकि, यह सामने आया कि सहायक अभियंता संजय प्रताप मल्ल महीनों पहले ही दूसरे जिले में स्थानांतरित हो चुके थे। यह तथ्य 1 जनवरी को सामने आने के बावजूद, संशोधित आदेश जारी करने में पूरे पांच दिन लग गए और अंततः 6 जनवरी को संशोधन हुआ। इससे भी अधिक हैरानी की बात यह है कि संशोधित आदेश जारी होने से पहले ही 5 जनवरी को डीसी मनरेगा के साथ सहायक अभियंता मन्नू चौधरी मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर चुके थे। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह केवल प्रशासनिक चूक थी या जांच को जानबूझकर टालने का प्रयास किया गया। संशोधित आदेश में कुछ दिनों के भीतर जांच पूरी करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन 10 जनवरी तक भी जांच पूरी नहीं हो सकी। इससे पंचायती राज विभाग, विशेषकर डीपीआरओ कार्यालय की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि जांच रिपोर्ट मिलते ही तथ्यों के आधार पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही या नियम उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। फिलहाल, सबसे बड़ा सवाल यही है कि जांच में देरी लापरवाही है या मिलीभगत। क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी या यह मामला फाइलों में दबकर रह जाएगा, इस पर सबकी निगाहें जांच समिति की रिपोर्ट और उस पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।

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