साइबर लिटरेसी- जनगणना के नाम पर हो सकता है स्कैम:जानें सही प्रक्रिया, अगर कोई ये 11 सवाल पूछे तो वो फ्रॉड है, 9 गलतियां न करें

साइबर लिटरेसी- जनगणना के नाम पर हो सकता है स्कैम:जानें सही प्रक्रिया, अगर कोई ये 11 सवाल पूछे तो वो फ्रॉड है, 9 गलतियां न करें

1 अप्रैल 2026 से देश के कई राज्यों में जनगणना शुरू हो चुकी है। इसका पहला फेज 30 सितंबर 2026 तक चलेगा। इस दौरान हाउस लिस्टिंग, सेल्फ एन्यूमरेशन (ऑनलाइन जनगणना) और घर-घर जाकर डेटा कलेक्ट किया जाएगा। इसके लिए जनगणनाकर्मी (एन्यूमरेटर) आपके घर आएंगे और उनके पास सवालों की लंबी लिस्ट होगी। साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स ऐसी आशंका जता रहे हैं कि स्कैमर्स जनगणना के नाम पर ठगी कर सकते हैं। इसलिए जनगणना की सही प्रक्रिया समझना जरूरी है। आज ‘साइबर लिटरेसी’ कॉलम में हम जनगणना का सही प्रोसेस समझेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: राहुल मिश्रा, साइबर सिक्योरिटी एडवाइजर, उत्तर प्रदेश पुलिस सवाल- जनगणना के नाम पर स्कैम कैसे हो सकता है? जवाब- जनगणना प्रक्रिया का फायदा उठाकर साइबर ठग लोगों को निशाना बना सकते हैं। वे खुद को सरकारी कर्मचारी बताकर कॉल, मैसेज या फर्जी लिंक से पर्सनल डिटेल्स चुरा सकते हैं। नीचे दिए ग्राफिक में देखिए ठग कौन-से तरीके अपना सकते हैं- सवाल- जनगणनाकर्मी घर आकर क्या सवाल पूछेंगे? जवाब- गृह मंत्रालय ने जनगणना में पूछे जाने वाले सभी सवालों की लिस्ट जारी की है। इसे नीचे देखिए- मकान से जुड़े सवाल परिवार से जुड़े सवाल सुविधाओं से जुड़े सवाल डिजिटल और सामान से जुड़े सवाल वाहन और अन्य जानकारी सवाल- जनगणनाकर्मी कौन से सवाल नहीं पूछ सकते? जवाब- जनगणनाकर्मी आपकी फाइनेंशियल, बैंकिंग और पर्सनल डिटेल्स नहीं मांग सकते हैं। नीचे ग्राफिक में देखिए जनगणनाकर्मी कौन सी डिटेल्स नहीं पूछ सकते हैं- सवाल- किस प्रदेश में कब से जनगणना शुरू होगी? जवाब- अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच देश के अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जनगणना का पहला चरण आयोजित किया जाएगा। इसमें पहले सेल्फ एन्यूमरेशन और फिर घर-घर जाकर डेटा कलेक्शन किया जाएगा। नीचे ग्राफिक में प्रमुख राज्यों की तारीखें देखिए- सवाल- अगर कोई व्यक्ति घर आकर खुद को जनगणनाकर्मी बताए तो उसकी पहचान कन्फर्म कैसे करें? जवाब- इसके लिए कुछ बातों का खास ख्याल रखें। जैसेकि- ऐसे करें स्कैमर का पहचान सवाल- अगर जनगणनाकर्मी पर्सनल-फाइनेंशियल सवाल पूछे और उसकी पहचान संदिग्ध लगे तो तुरंत क्या कदम उठाएं? जवाब- ऐसी स्थिति में- सवाल- जनगणना के दौरान लोग क्या गलतियां कर सकते हैं? जवाब- जनगणना के समय छोटी लापरवाहियां ठगी का शिकार बना सकती हैं। नीचे कॉमन गलतियां देखिए- गलती-1 बिना वेरिफिकेशन के जनगणनाकर्मी पर भरोसा करना। क्या करें- सिर्फ सरकारी ID दिखाने वाले कर्मचारी को ही जानकारी दें। गलती-2 ये मानना कि जनगणनाकर्मी के हर सवाल का जवाब देना है। क्या करें- केवल जनगणना से जुड़े सवालों के ही जवाब दें। गलती-3 ‘डेटा अपडेट’ या ‘वेरिफिकेशन के नाम पर OTP देना। क्या करें- OTP, PIN या पासवर्ड किसी से शेयर न करें। गलती-4 ‘रजिस्ट्रेशन फीस’ या ‘चार्ज’ के नाम पर पैसे देना। क्या करें- जनगणना पूरी तरह मुफ्त है, भुगतान न करें। गलती-5 फर्जी लिंक पर क्लिक करना/एप डाउनलोड करना। क्या करें- केवल आधिकारिक पोर्टल पर ही जानकारी भरें। अनजान लिंक और एप पर क्लिक न करें। गलती-6 असली प्रक्रिया और नियम की जानकारी न होना। क्या करें- आधिकारिक सोर्सेस से जनगणना की प्रक्रिया और सभी सवालों की जानकारी लें। गलती-7 बिना जांचे किसी को घर के अंदर आने देना। क्या करें- पहचान वेरिफाई करने के बाद ही उसके सवालों के जवाब दें। गलती-8 जल्दबाजी या दबाव में आकर जानकारी देना। क्या करें- आराम से सोचकर जवाब दें, दबाव में न आएं। गलती-9 संदिग्ध गतिविधि को नजरअंदाज करना। क्या करें- शक होने पर तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करें। सवाल- जनगणना में दी गई जानकारी किसलिए होती है? क्या यह सुरक्षित रहती है? जवाब- देश की जनसंख्या, बुनियादी सुविधाओं और रोजगार की सही तस्वीर समझने के लिए सरकार इन जानकारियों का इस्तेमाल करती है। सवाल- क्या जनगणना में ऑनलाइन हिस्सा ले सकते हैं? इसका सही तरीका क्या है? जवाब- हां, जनगणना 2027 में ऑनलाइन हिस्सा ले सकते हैं। इसे ‘सेल्फ एन्यूमरेशन’ कहा जाता है। यह वैकल्पिक सुविधा है, जिससे आप घर बैठे जानकारी भर सकते हैं। इसका सही तरीका समझिए- सवाल- अगर जनगणना के नाम पर स्कैम का शक हो तो क्या करें? जवाब- ऐसी स्थिति में तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। ……………………….. साइबर लिटरेसी से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… साइबर लिटरेसी- ‘चारधाम यात्रा 2026’ के नाम पर स्कैम: रजिस्ट्रेशन, होटल, हेलिकॉप्टर बुकिंग में बरतें सावधानी, न करें ये 9 गलतियां ठग चारधाम यात्रा के नाम से फर्जी वेबसाइट बनाते हैं। ये एकदम ऑफिशियल पोर्टल जैसी दिखती है। लोग बिना जांचे इन साइट्स पर अपनी डिटेल्स भरते हैं और ‘रजिस्ट्रेशन फीस’ के नाम पर पैसे गंवा देते हैं। पूरी खबर पढ़िए…

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