छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) की अर्थशास्त्र शोधार्थी सोनाली निगम ने पर्यावरणीय, सामाजिक एवं प्रशासनिक (ईएसजी) ढांचे पर एक महत्वपूर्ण शोध प्रस्तुत किया है। यह शोध भारतीय अर्थव्यवस्था में सतत और समावेशी विकास की दिशा में एक उपयोगी प्रयास माना जा रहा है। इसका मुख्य विषय भारतीय अर्थव्यवस्था में ईएसजी ढांचे का समावेशन है। यह शोध डीएवी कॉलेज, कानपुर के अर्थशास्त्र विभाग के प्रो. मनोज श्रीवास्तव के निर्देशन में पूरा किया गया। शोध में बताया गया है कि यदि शासन व्यवस्था को सही ढंग से लागू किया जाए, तो आर्थिक विकास के साथ-साथ पर्यावरण की सुरक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी को भी संतुलित किया जा सकता है। ईएसजी ढांचा इसी संतुलन को स्थापित करने में सहायक है। भारत जैसे विकासशील देश के लिए ईएसजी सिद्धांत अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। देश में तेजी से आर्थिक विकास के साथ-साथ पर्यावरणीय चुनौतियां और सामाजिक असमानताएं भी बढ़ रही हैं। ऐसे में ईएसजी आधारित नीतियां अपनाने से जिम्मेदार विकास को बढ़ावा मिल सकता है, जो बेहतर शासन व्यवस्था को मजबूत करेगा और विदेशी निवेश आकर्षित करेगा। सोनाली निगम के शोध में यह भी उल्लेख किया गया है कि ईएसजी ढांचा “विकसित भारत मिशन” के लक्ष्यों के अनुरूप है। इसके माध्यम से भारत अपनी आर्थिक प्राथमिकताओं को अंतरराष्ट्रीय सतत विकास मानकों के साथ जोड़ सकता है, जिससे दीर्घकाल में देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। सीएसजेएमयू की डीन (रिसर्च) डॉ. नमिता तिवारी ने इस शोध की सराहना की। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में ऐसी नीतियों से जुड़े शोध की आवश्यकता है, जो समाज की वास्तविक समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करें। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों से जुड़े ऐसे शोध कार्यों को लगातार प्रोत्साहित करता है। सोनाली निगम ने सुझाव दिया कि ईएसजी से जुड़ी शिक्षा को शैक्षणिक पाठ्यक्रमों और कॉर्पोरेट प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शामिल किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि शिक्षा के माध्यम से ही समाज में सकारात्मक और स्थायी बदलाव लाया जा सकता है। अंत में उन्होंने अपने शोध कार्य के दौरान सहयोग और मार्गदर्शन देने के लिए अर्थशास्त्र विभाग, सीएसजेएमयू, अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ तथा डॉ. नमिता तिवारी के प्रति आभार व्यक्त किया। यह शोध वर्तमान समय में सतत विकास और उत्तरदायी शासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण योगदान माना जा रहा है।


