Crime File: 355 किलो हीरोइन तस्करी में हो गया था बरी, एक किलो के फेर में हुआ एनकाउंटर

Crime File: 355 किलो हीरोइन तस्करी में हो गया था बरी, एक किलो के फेर में हुआ एनकाउंटर

आयशा कांधारी बला की खूबसूरत महिला थी। उसका शौहर जन्नत गुल कांधारी एक रईस पठान था। गुल रईस तो था, पर आयशा की तरह शातिर नहीं था। आयशा की खूबसूरती पर कोई भी मर-मिटने के लिए तैयार रहता था। नरेई खान उर्फ नरी खान उस समय देश का सबसे बड़ा ड्रग्स तस्कर था। पठानों की एक पार्टी में आयशा पर उसकी नजर पड़ी। उसे देखते ही वह आयशा पर फिदा हो चुका था।

आयशा की खूबसूरती का जादू और नरी खान का प्यार

खान की दौलत देख कर आयशा भी पति से बेवफाई करने के लिए तैयार हो गई। गुल ने पत्नी को रोकने के लिए अपनी सारी दौलत उसके नाम कर दी, लेकिन नरी खान की दौलत के आगे वह कुछ भी नहीं थी। आयशा नहीं मानी।

गुल का बर्बाद होना और दरगाह में पनाह

गुल का सब कुछ लुट चुका था। उसे अकोला के आगा मियां दरगाह में पनाह लेनी पड़ी। दिल टूटने का दर्द भूलने के लिए वह नशे में डूब गया। गुल तो बर्बाद हो चुका था, अब बारी नरी की थी।

1994 की ड्रग्स डील और नरी पर छापा

1994 के अंतिम महीने की बात है। नरी ड्रग्स का एक बड़ा सौदा करने वाला था। 355 किलो हीरोइन की डील थी। लेकिन उसका भांडा फूट गया। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की टीम ने उसके घर पर छापा मारा और ‘माल’ बरामद कर लिया। उस पर नारकोटिक्स ड्रग्स एंड सायकोट्रोपिक सब्सटैंसेस (एनडीपीएस) एक्ट के तहत मुकदमा हो गया।

कोर्ट में आयशा के साथ अय्याशी का खेल

उस समय साउथ मुंबई में फोर्ट के पास एक बिल्डिंग की पहली मंजिल पर एनडीपीएस की तीन अदालतें लगती थीं। मामलों की सुनवाई इन तीन में से दो ही अदालतों में होती थी। तीसरी अदालत खाली रहती थी।

उसमें अफसर खाना खा लिया करते थे, आरोपी बैठा करते थे या आरोपियों से मिलने आने वाले रिश्तेदार इंतजार किया करते थे।

नरी ने सिपाहियों को पैसे देकर इस अदालत को पूरी तरह अपने लिए इस्तेमाल करना शुरू कर दिया था। वह और आयशा अंदर बंद हो जाते थे, पुलिस बाहर से कमरा बंद कर पहरेदारी करती थी।

नरी को जब भी सुनवाई के लिए अदालत बुलाया जाता था वह बंद कमरे में आयशा के साथ अय्याशी करता था। कई महीने बाद एक वकील ने इसकी शिकायत की तो जज ने इसे रुकवाया।

आयशा का नया शिकार: खालिद उस्मान

अब तक आयशा ने पूरी तरह नरी का भरोसा जीत लिया था। उसने अपनी संपत्ति का पावर ऑफ अटॉर्नी भी उसे दे दिया था।
इस बीच आयशा बांद्रा के रईस खालिद उस्मान को अपने जाल में फंसा चुकी थी।

उस्मान दिल खोल कर उस पर पैसे लुटा रहा था। नरी के प्रति अब वह बेरुख हो चुकी थी। उसकी बेवफाई देख वह जेल में रोया करता था। आयशा उसकी ज़िंदगी से हमेशा के लिए जा चुकी थी।

सुपारी और पुलिस का बचाव प्लान

एक बार कोर्ट में सुनवाई के दौरान नरी की मुलाक़ात अमर नाईक गैंग के एक गुर्गे से हुए। उसने उसे वहीं आयशा और खालिद उस्मान की सुपारी दे दी। इसकी भनक पुलिस को लग गई। पुलिस ने उन्हें बचाने का रास्ता निकाला।

पुलिस ने आयशा से कहा कि खालिद को बचाने के लिए उसे एनडीपीएस के झूठे केस में फंसा कर जेल भेजना होगा। बाद में उसे रिहा कर दिया जाएगा। खालिद की हिफाजत तो हो गई थी, पर आयशा खुद के लिए डरी हुई थी। उसे भी पुलिस के एक बड़े अफसर का सहारा मिला और वह उनकी छत्र-छाया में रहने लगी। खालिद को कुछ महीने बाद उसके परिवार वाले ने रिहा करवाया।

नरी का गुस्सा और आयशा पर बदला लेने की योजना

नरी इस बात से बेहद परेशान था कि उसे धोखा देने वाली आयशा अभी भी ऐश कर रही है। उसने अपने लिए वकीलों की फौज खड़ी कर ली। वह जल्द से जल्द जेल से बाहर निकल कर आयशा को बुरी से बुरी मौत मारना चाहता था।

आयशा को अपने पुलिस अफसर बॉय फ्रेंड से नरी की खौफनाक योजना की खबर मिल गई। उसने नरी को सजा दिलवाने की चाल चली, लेकिन चाल नाकाम हो गई। नरी बरी हो गया। उसने आयशा का बलात्कार करने, चेहरा खराब करने और फिर कत्ल करने का फैसला किया। हालांकि, उसकी यह योजना मन में ही रह गई। कुछ ही समय बाद नरी खान को पुलिस ने विखरोली के पास ‘एक किलो हीरोइन’ ले जाने के आरोप में मुठभेड़ में ढेर कर दिया।

(एस. हुसैन जैदी की किताब ‘बायकुला टु बैंकॉक’ से ली गई कहानी)

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