जीवाजी यूनिवर्सिटी कैंपस में प्रधानमंत्री उषा योजना के तहत 6 करोड़ की लागत से बन रहे गर्ल्स हॉस्टल के निर्माण को नगर निगम के अमले ने दबिश देकर रुकवाया और सामान जब्त कर लिया। इसका भूमिपूजन विगत दिनों प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किया था। मदाखलत अमला सामान जब्त कर निकल पाता, इससे पहले ही जेयू के गार्ड व वहां मौजूद कर्मचारियों ने गेट पर ताला डाल दिया। निगम अमले को जेयू कैंपस में बंधक बनाने पर अमले ने अधिकारियों को सूचना दी। इस पर निगम के अपर आयुक्त सहित अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे, लेकिन फिर भी ताला खोलकर अमले को नहीं निकलने दिया, तब निगम के अधिकारी कर्मचारी ताला तोड़कर वहां से बाहर निकले। निगम के भवन अधिकारी वीरेंद्र शाक्य का कहना है कि हॉस्टल निर्माण के लिए नगर निगम से भवन अनुज्ञा (स्वीकृति) नहीं ली गई। निगम ने काम रोकने के लिए 31 दिसंबर को नोटिस दिया था। तब भी काम नहीं रोका गया। अंत में शुक्रवार को भवन शाखा और मदाखलत की टीम जेयू कैंपस में निर्माण स्थल पर सामान जब्त करने पहुंची और सामान को जब्त कर निगम के वाहन में भर लिया। इस बीच राजमाता चौराहा की तरफ के मुख्य गेट (जेयू) पर गार्ड ने ताला लगा दिया। मदाखलत की मदद से ताले को खोला गया, तब वाहन निकल पाए। मौके पर अपर आयुक्त टी प्रतीक राव, जेडओ अनिल श्रीवास्तव और मदाखलत अधिकारी सतेंद्र भदौरिया आदि शामिल थे। ज्ञात रहे जेयू कैंपस के अंदर पीएम उषा योजना के तहत 100 छात्राओं की क्षमता का गर्ल्स हॉस्टल बनाया जा रहा है। इस पर करीब 6 करोड़ रुपए की राशि खर्च हो रही है। जेयू को उक्त काम मार्च तक पूरा करके देना है। निगम को 12 करोड़ रुपए सेवाकर नहीं देने का मामला निगम का जेयू पर 12 करोड़ रुपए के करीब सेवाकर बकाया है। 29 दिसंबर 2024 को निगम के तत्कालीन आयुक्त अमन वैष्णव ने जेयू कैंपस में बने अटल सभागार को बिना परमिशन के निर्माण का कारण बताकर अवैध घोषित कर दिया था। निगम इससे पहले भी साल 2022 से सेवाकर देने के लिए जेयू को नोटिस देती रही है। ज्ञात रहे निगम ने आईआईटीएम संस्थान में तालाबंदी भी की थी। उस पर 2.9 करोड़ रुपए की राशि बकाया थी। निगम ने चार दिन पहले भी किया था सामान जब्त निगम ने जेयू के अंदर चल रहे निर्माण कार्य को लेकर 31 दिसंबर को नोटिस भेजा था। उसमें कहा गया था कि बिना स्वीकृति के अवैधानिक कार्य किया जा रहा है। यदि कोई स्वीकृति के कागजात है तो एक दिन में प्रस्तुत करने के लिए कहा गया था। एक दिन बाद जब कोई कागजात नहीं आए, उसके बाद निगम की टीम 5 जनवरी को जेयू कैंपस के निर्माण स्थल पर पहुंची थी। तब वहां से ठेकेदार का सामान उठाकर लाई थी। साथ ही काम बंद करने के लिए कहा था। निगम के अधिकारियों का कहना है कि काम बंद नहीं करने पर फिर कार्रवाई की गई। अब जेयू की 38 करोड़ रु. की इमारतों पर अटका निगम की मंजूरी का पेंच नैक से ए++ ग्रेड प्राप्त जीवाजी यूनिवर्सिटी में पीएम उषा योजना के तहत 38 करोड़ रुपए की लागत से प्रस्तावित तीन प्रमुख भवनों का निर्माण प्रशासनिक लापरवाही के चलते संकट में आ गया है। इन बिल्डिंग पर नगर निगम ने अब मंजूरी न होने का अड़ंगा लगा दिया है। गर्ल्स हॉस्टल, इंजीनियरिंग संस्थान और आर्कियोलॉजी भवन के निर्माण को लेकर नगर निगम की अनुमति नहीं ली गई, जिसके चलते शुक्रवार को निगम का अमला कार्रवाई के लिए विश्वविद्यालय परिसर पहुंचा। इस दौरान विश्वविद्यालय और भवन विकास निगम के अफसर पूरी तरह मौन नजर आए। ज्ञात रहे एक दिन पहले ही कुलसचिव डॉ. राजीव मिश्रा ने मप्र भवन विकास निगम के डीजीएम को पत्र लिखकर अवगत कराया था कि नगर निगम के क्षेत्रीय कार्यालय क्रमांक-11 ने निर्माण से जुड़े दस्तावेज मांगे हैं। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि यदि अनुमति ली गई है तो दस्तावेज तत्काल प्रस्तुत किए जाएं, अन्यथा शीघ्र स्वीकृति प्राप्त की जाए। इसके बावजूद भवन विकास निगम ने कोई ठोस पहल नहीं की, जिसका परिणाम नगर निगम की कार्रवाई के रूप में सामने आया। नगर निगम का पक्ष बिल्डिंग परमिशन नहीं ली, बंधक नहीं बनाया जेयू कैंपस के अंदर बिल्डिंग बन रही है। उसकी नगर निगम से कोई परमिशन नहीं ली गई है। पिछले दिनों काम रोकने का नोटिस दिया था। फिर से मौके पर काम शुरू था। इसलिए नगर निगम अमले ने जाकर काम को रोककर सामान जब्त किया है। नगर निगम के अमले को कोई बंधक नहीं बनाया है। हमारी टीम सामान जब्त करके निकल रही थी। शायद गेट बंद कर लिया था। उसे खोलकर बाहर आ गए। -टी प्रतीक राव, अपर आयुक्त नगर निगम जीवाजी विश्वविद्यालय का पक्ष भवन विकास निगम से पहले मांगे थे दस्तावेज ^जेयू परिसर में हो रहे निर्माण भवन विकास निगम द्वारा कराए जा रहे हैं। इस संबंध में मैंने निगम के अफसरों को पत्र लिखकर स्पष्ट किया था कि नगर निगम की स्वीकृति ली गई है या नहीं, इसके दस्तावेज उपलब्ध कराएं। – डॉ. राजीव मिश्रा, कुलसचिव, जेयू ^पीएम उषा के तहत जेयू परिसर में बन रहे सभी भवनों की नगर निगम से विधिवत स्वीकृति ली जा चुकी है। निगम की कार्रवाई गलत है। कार्यालय खुलते ही स्वीकृति से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत किए जाएंगे। -मतेंद्र शाक्य, डीजीएम, मप्र भवन विकास निगम


