महाराष्ट्र की राजनीति में विधान परिषद चुनावों (Maharashtra MLC Election) को लेकर हलचल तेज हो गई है। भाजपा (BJP) द्वारा अपने 6 उम्मीदवारों की घोषणा के बाद अब उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) ने भी अपने पत्ते खोल दिए हैं। उद्धव ठाकरे ने गठबंधन सहयोगियों के आग्रह के बावजूद खुद चुनाव लड़ने के बजाय पूर्व नेता प्रतिपक्ष अंबादास दानवे को उम्मीदवार बनाया है। दानवे को दूसरी बार विधानपरिषद की उम्मीदवारी दी गई है, लेकिन ठाकरे के इस फैसले से महाविकास आघाडी (MVA) के भीतर असंतोष की स्थिति बनती नजर आ रही है।
कांग्रेस नाराज, अलग उम्मीदवार की तैयारी
उद्धव ठाकरे के इस फैसले से महाविकास आघाड़ी के भीतर असंतोष की स्थिति बनती नजर आ रही है। कांग्रेस नेतृत्व इस निर्णय से नाराज है और अब वह महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव में अपना अलग उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रही है।
बताया जा रहा है कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल इस समय दिल्ली में हैं और पार्टी आलाकमान से चर्चा के बाद उम्मीदवार के नाम का ऐलान आज किया जाएगा।
महाराष्ट्र विधान परिषद के 9 सदस्यों का कार्यकाल 13 मई को पूरा हो रहा है, जिनमें शिवसेना (उबाठा) प्रमुख उद्धव ठाकरे भी शामिल हैं। हालांकि, राज्य विधानसभा के मौजूदा संख्याबल के अनुसार विपक्षी गठबंधन एमवीए केवल एक सीट जीतने में सक्षम है। राज्य के विपक्षी गठबंधन एमवीए में कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव ठाकरे) और एनसीपी (शरद पवार) शामिल है।
सहयोगियों की मांग को किया दरकिनार!
महाराष्ट्र विधान परिषद चुनावों के लिए महाविकास आघाडी की ओर से लगातार यह मांग की जा रही थी कि उद्धव ठाकरे खुद उम्मीदवार बनें। शरद पवार की एनसीपी और कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने ठाकरे से राज्य के ऊपरी सदन में फिर आने का आग्रह किया था ताकि विपक्ष को मजबूती मिल सके। जबकि कांग्रेस ने साफ तौर पर कहा था कि उद्धव उम्मीदवार होते हैं तो कांग्रेस समर्थन देगी। लेकिन सबसे बड़ा ट्विस्ट तब आया जब खुद उद्धव ने चुनाव लड़ने से पीछे हटते हुए बुधवार को पार्टी के वरिष्ठ नेता अंबादास दानवे को उम्मीदवार घोषित कर दिया।
महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर के रहने वाले दानवे 2022 से 2025 तक विधान परिषद में विपक्ष के नेता (LoP) रह चुके हैं। जबकि उद्धव ठाकरे का विधान परिषद सदस्य के रूप में कार्यकाल 12 मई को समाप्त हो जाएगा।
कांग्रेस ने कहा- उद्धव सेना ने हमसे बात किए बिना लिया फैसला
उद्धव ठाकरे के इस फैसले को कांग्रेस ने एकतरफा बताया और नाराजगी जताई हैं। कांग्रेस इस बात से खफा है कि गठबंधन में पर्याप्त चर्चा किए बिना दानवे के नाम की घोषणा कर दी गई। इसके जवाब में कांग्रेस ने भी अपनी अलग राह चुनने के संकेत दिए हैं। कांग्रेस जल्द ही अपना स्वतंत्र उम्मीदवार उतार सकती है, जिससे विधान परिषद की जंग और भी दिलचस्प हो जाएगी।
अंबदास दानवे को एमवीए के एमएलसी उम्मीदवार के रूप में नामित किए जाने पर कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने कहा, “हमने कहा था कि अगर उद्धव जी खुद एमवीए से उम्मीदवार बनते हैं, तो हम सभी उनका समर्थन करेंगे और हमने इस पर पहले ही चर्चा कर ली थी। किसी भी नए नाम के बारे में हमसे बातचीत नहीं की गई, हमसे बिना चर्चा किये घोषणा कर दी गई… अब हम (कांग्रेस) भी अपनी उम्मीदवारी दाखिल करेंगे और बाद में इस पर चर्चा करेंगे।”
इससे पहले महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा था कि उनकी पार्टी भी एक उम्मीदवार उतारेगी। हालांकि, उन्होंने किसी नाम की घोषणा नहीं की।
दरअसल कांग्रेस महाराष्ट्र एमएलसी चुनाव लड़ना चाहती थी, लेकिन उसने उद्धव ठाकरे के चुनाव लड़ने की स्थिति में अपने कदम पीछे खींचने पर सहमति जताई थी। कांग्रेस पिछले महीने महाराष्ट्र से राज्यसभा की एकमात्र सीट चाहती थी, तब एमवीए की ओर से एनसीपी (एसपी) अध्यक्ष शरद पवार उम्मीदवार बने, जिस वजह से कांग्रेस ने उनका समर्थन किया।
वडेट्टीवार ने कहा कि राज्यसभा की सीट एनसीपी (शरद पवार) ले गई और अब विधान परिषद की सीट शिवसेना (उद्धव ठाकरे) चाहती है, तो ऐसे में कांग्रेस को क्या मिला। यह निर्णय हमें विश्वास में लिए बिना लिया गया है, इसलिए हम अपना स्वतंत्र उम्मीदवार खड़ा करेंगे। संजय राउत क्या कहते हैं उससे हमारा कोई लेना-देना नहीं है।


