Commerce Secretary राजेश अग्रवाल का एलान, FTA के सही इस्तेमाल के लिए बना स्पेशल Cell

Commerce Secretary राजेश अग्रवाल का एलान, FTA के सही इस्तेमाल के लिए बना स्पेशल Cell

कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने बुधवार को कहा कि कॉमर्स डिपार्टमेंट ने देश भर के उद्यमियों को फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के फायदों और मौकों के बारे में बताने के लिए एक ‘FTA यूटिलाइज़ेशन सेल’ बनाया है। उन्होंने कहा कि यह सेल इंडस्ट्री एसोसिएशन, एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (EPC) और राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम करेगा ताकि बिज़नेस FTA का फ़ायदा उठा सकें, नए मार्केट के मौकों की पहचान कर सकें और इन समझौतों का ज़्यादा से ज़्यादा इस्तेमाल कर सकें। उन्होंने आगे कहा, “हमारा फ़ोकस सभी EPC के साथ मिलकर FTA के इस्तेमाल को बेहतर बनाने और यह पक्का करने पर होगा कि भारतीय बिज़नेस इन समझौतों से मिलने वाले मार्केट एक्सेस का ज़्यादा से ज़्यादा फ़ायदा उठा सकें। दूसरे इंडिया-EFTA प्रॉस्पेरिटी समिट में बोलते हुए, जो इंडिया-EFTA ट्रेड एंड इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (TEPA) के पहले साल के मौके पर आयोजित किया गया था, अग्रवाल ने चेतावनी दी कि समझौते तब तक सिर्फ़ “बहस” ही बने रहते हैं जब तक उनसे मापने लायक नतीजे न मिलें। भारत ने अब 32 देशों के साथ समझौते पूरे कर लिए हैं, जिनमें चार EFTA देश, 27 सदस्यों वाला यूरोपीय संघ और यूनाइटेड किंगडम शामिल हैं। उन्होंने कहा कि UK के साथ समझौता 15 जुलाई से लागू हो गया है, जबकि EU के साथ समझौता अगले साल से लागू होने की उम्मीद है। 

इसे भी पढ़ें: PM Modi और स्विस राष्ट्रपति की बैठक, भारत-Switzerland के बीच पांच अहम समझौते हुए

अग्रवाल ने कहा कि EFTA देशों के साथ भारत के व्यापार मूल्य का 99 प्रतिशत से ज़्यादा हिस्सा अब ज़ीरो टैरिफ पर आता है। लेकिन उन्होंने तर्क दिया कि असली फ़ायदा कम ड्यूटी के बजाय निश्चितता है। उन्होंने कहा कि अब बिज़नेस निवेश की योजना बना सकते हैं और सप्लाई चेन बना सकते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि टैरिफ स्थिर रहेंगे, और उनके पास ज़्यादा कमिटमेंट, ज़्यादा भरोसे और कम जोखिम वाले पार्टनर चुनने का ज़्यादा विकल्प है। उन्होंने इन 32 देशों को ज़्यादा आय और ज़्यादा खपत वाले बाज़ार बताया, जो क्वालिटी की मांग करते हैं लेकिन उसके लिए अच्छा दाम भी देते हैं। उन्होंने बताया कि कई भारतीय एक्सपोर्टर को वहां पहले से ही दूसरी जगहों की तुलना में दोगुना दाम मिल रहा है। उन्होंने कहा कि उन स्टैंडर्ड्स को पूरा करने से भारतीय कंपनियाँ किसी भी दूसरे बाज़ार के लिए तैयार हो जाएँगी। अग्रवाल ने कहा कि खेती के क्षेत्र में बहुत बड़ा मौका है, क्योंकि यूरोपीय बाज़ार खरबों डॉलर के खेती के सामान का आयात करते हैं।

इसे भी पढ़ें: Switzerland के साथ रिश्तों को नई ऊंचाई देकर Modi ने Europe में चली बड़ी कूटनीतिक चाल

 
हर खेती के उत्पाद पर टैरिफ ज़ीरो नहीं हुआ है, लेकिन कई ऐसे उत्पाद जिनमें भारत मज़बूत है, उन्हें ज़ीरो-ड्यूटी या प्राथमिकता वाली पहुँच मिली है, और इस सेक्टर को इनकी पहचान करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस ब्लॉक में भारत का मौजूदा एक्सपोर्ट लगभग 500 बिलियन डॉलर के आयात बास्केट का एक छोटा सा हिस्सा है। उन्होंने हर EPC से कहा कि वे इस अंतर को कम करने के लिए बाज़ार के हिसाब से गेम प्लान तैयार करें। अग्रवाल ने हर EPC से कहा कि वे हर समझौते के लिए पाँच साल का एक्शन प्लान बनाएँ। इसमें नॉन-टैरिफ़ बैरियर, क्वालिटी स्टैंडर्ड और हर इलाके में “एंकर लीडर्स” को शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने माना कि सीनियर लीडर अक्सर पूछते हैं कि क्या इन समझौतों से फ़ायदा होगा, क्योंकि पहले हुए FTA से पार्टनर देशों को होने वाला भारतीय एक्सपोर्ट, दूसरे बाज़ारों की तुलना में काफ़ी तेज़ी से नहीं बढ़ा था। उन्होंने कहा इसका जवाब एक-दूसरे की खूबियों (कॉम्प्लिमेंटैरिटी) में छिपा है, क्योंकि इन इकॉनमीज़ की ताकत अलग-अलग है। ‘यूटिलाइज़ेशन सेल’ का मकसद इसी क्षमता को असल नतीजों में बदलना है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *