अररिया के उत्क्रमित मध्य विद्यालय ईटहरा में प्रधानाध्यापक मो. शमशुल होदा मासूम का शुक्रवार को भव्य स्वागत किया गया। उन्हें लगभग छह महीने पहले गंभीर आरोपों के चलते निलंबित किया गया था, लेकिन जांच में क्लीन चिट मिलने के बाद वे पुनः पदभार ग्रहण करने विद्यालय लौटे। शिक्षा विभाग ने पूर्व में कुछ गंभीर शिकायतों के आधार पर प्रधानाध्यापक शमशुल होदा मासूम को निलंबित कर दिया था। इस मामले की जांच जिला शिक्षा पदाधिकारी, अन्य वरिष्ठ अधिकारियों और मानवाधिकार आयोग के सदस्यों ने की। विस्तृत जांच के बाद सभी आरोप निराधार पाए गए, जिसके बाद उन्हें क्लीन चिट मिली और वे अपने पद पर वापस लौटे। शनिवार को विद्यालय शिक्षा समिति के अध्यक्ष सह स्थानीय वार्ड पार्षद श्याम कुमार मंडल की अध्यक्षता में एक विशेष स्वागत कार्यक्रम आयोजित किया गया। विद्यालय परिसर में शिक्षकों, छात्रों और आसपास के दर्जनों ग्रामीणों ने प्रधानाध्यापक पर फूल बरसाए। बच्चों ने “स्वागतम स्वागतम” के नारों से उनका अभिवादन किया और सभी ने उन्हें फूलों की माला पहनाकर मिठाई खिलाई। इस अवसर पर प्रधानाध्यापक शमशुल होदा मासूम ने उपस्थित सभी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बुरे दिनों में भी उनके साथ खड़े रहने वाले सभी शिक्षकों, बच्चों और स्थानीय लोगों का वे शुक्रिया अदा करते हैं। उन्होंने शिक्षा विभाग और मानवाधिकार आयोग के सदस्यों के प्रति भी आभार जताया। वार्ड पार्षद श्याम कुमार मंडल ने कहा कि छह महीने पहले लगे आरोप पूरी तरह गलत साबित हुए हैं। उन्होंने शिक्षा विभाग और जांच टीम का धन्यवाद करते हुए प्रधानाध्यापक का स्वागत किया। मंडल ने भविष्य में विद्यालय के बेहतर विकास की बात कही और विद्यालय में सीसीटीवी कैमरा लगाने की घोषणा भी की। इस मौके पर स्थानीय नागरिक कमलेश्वरी चौधरी, सुशांत पासवान, सौगारत पासवान सहित मानवाधिकार से जुड़ी पूनम देवी, ज्योति भगत, सुष्मिता ठाकुर और बुचनी देवी मौजूद थीं। यह घटना शिक्षा जगत में सत्य की जीत और सामुदायिक एकता का सुंदर उदाहरण बन गई है। विद्यार्थियों और ग्रामीणों में उत्साह का माहौल है। प्रधानाध्यापक की वापसी से स्कूल की नियमित पढ़ाई और गतिविधियां फिर से पटरी पर लौटने की उम्मीद जगी है। अररिया के उत्क्रमित मध्य विद्यालय ईटहरा में प्रधानाध्यापक मो. शमशुल होदा मासूम का शुक्रवार को भव्य स्वागत किया गया। उन्हें लगभग छह महीने पहले गंभीर आरोपों के चलते निलंबित किया गया था, लेकिन जांच में क्लीन चिट मिलने के बाद वे पुनः पदभार ग्रहण करने विद्यालय लौटे। शिक्षा विभाग ने पूर्व में कुछ गंभीर शिकायतों के आधार पर प्रधानाध्यापक शमशुल होदा मासूम को निलंबित कर दिया था। इस मामले की जांच जिला शिक्षा पदाधिकारी, अन्य वरिष्ठ अधिकारियों और मानवाधिकार आयोग के सदस्यों ने की। विस्तृत जांच के बाद सभी आरोप निराधार पाए गए, जिसके बाद उन्हें क्लीन चिट मिली और वे अपने पद पर वापस लौटे। शनिवार को विद्यालय शिक्षा समिति के अध्यक्ष सह स्थानीय वार्ड पार्षद श्याम कुमार मंडल की अध्यक्षता में एक विशेष स्वागत कार्यक्रम आयोजित किया गया। विद्यालय परिसर में शिक्षकों, छात्रों और आसपास के दर्जनों ग्रामीणों ने प्रधानाध्यापक पर फूल बरसाए। बच्चों ने “स्वागतम स्वागतम” के नारों से उनका अभिवादन किया और सभी ने उन्हें फूलों की माला पहनाकर मिठाई खिलाई। इस अवसर पर प्रधानाध्यापक शमशुल होदा मासूम ने उपस्थित सभी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बुरे दिनों में भी उनके साथ खड़े रहने वाले सभी शिक्षकों, बच्चों और स्थानीय लोगों का वे शुक्रिया अदा करते हैं। उन्होंने शिक्षा विभाग और मानवाधिकार आयोग के सदस्यों के प्रति भी आभार जताया। वार्ड पार्षद श्याम कुमार मंडल ने कहा कि छह महीने पहले लगे आरोप पूरी तरह गलत साबित हुए हैं। उन्होंने शिक्षा विभाग और जांच टीम का धन्यवाद करते हुए प्रधानाध्यापक का स्वागत किया। मंडल ने भविष्य में विद्यालय के बेहतर विकास की बात कही और विद्यालय में सीसीटीवी कैमरा लगाने की घोषणा भी की। इस मौके पर स्थानीय नागरिक कमलेश्वरी चौधरी, सुशांत पासवान, सौगारत पासवान सहित मानवाधिकार से जुड़ी पूनम देवी, ज्योति भगत, सुष्मिता ठाकुर और बुचनी देवी मौजूद थीं। यह घटना शिक्षा जगत में सत्य की जीत और सामुदायिक एकता का सुंदर उदाहरण बन गई है। विद्यार्थियों और ग्रामीणों में उत्साह का माहौल है। प्रधानाध्यापक की वापसी से स्कूल की नियमित पढ़ाई और गतिविधियां फिर से पटरी पर लौटने की उम्मीद जगी है।


