Girl Student Death: सुकमा के एर्राबोर के पीएम श्री कन्या आश्रम में पढ़ने वाली कक्षा पहली की छात्रा मड़कम देवे की मौत ने आवासीय आश्रमों में बच्चों की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों के अनुसार बच्ची कई दिनों से बुखार से पीड़ित थी और उसकी तबीयत लगातार खराब थी। इसके बावजूद उसे अस्पताल ले जाने के बजाय रविवार को परिजनों के साथ घर भेज दिया गया। बारिश के कारण रास्ते में नदी-नाले उफान पर होने से परिजन बच्ची को उसी दिन घर नहीं पहुंचा सके।सोमवार को घर पहुंचने के कुछ ही घंटे बाद दोपहर करीब 12 बजे बच्ची ने दम तोड़ दिया।
Sukma Student Death: समय रहते अस्पताल क्यों नहीं पहुंचाया गया
मृत छात्रा मड़कम देवे, पिता मड़कम जोगा, निवासी मेटागुड़ा, पंचायत पालाचलमा की थी। घटना के बाद अब सवाल उठ रहा है कि जब बच्ची कई दिनों से बीमार थी और उसकी हालत बिगड़ रही थी, तो उसे समय रहते अस्पताल क्यों नहीं पहुंचाया गया? क्या आश्रम में उसकी स्वास्थ्य जांच कराई गई थी? तबीयत गंभीर होने की स्थिति में दूरस्थ और बारिश से प्रभावित इलाके में रहने वाले परिजनों को बुलाकर बच्ची को घर भेजने का निर्णय कितना सुरक्षित था? इन सवालों के जवाब अब जांच के बाद सामने आएंगे।
सुबह आश्रम पहुंचे थे परिजन
परिजनों के अनुसार रविवार सुबह करीब 10 बजे वे बच्ची को लेने एर्राबोर के पीएम श्री कन्या आश्रम पहुंचे थे। आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद बच्ची को उनके साथ भेज दिया गया। परिजनों का आरोप है कि उन्हें बच्ची को सामान्य बुखार होने की बात बताई गई, जबकि वह कई दिनों से बीमार थी। परिजनों ने यह भी बताया कि जिस समय वे आश्रम पहुंचे, उस दौरान आश्रम की अधीक्षिका मौके पर मौजूद नहीं थीं।
उफनते नदी-नालों ने रोका रास्ता
मेटागुड़ा पहुंचने का रास्ता बारिश के कारण बेहद कठिन था। नदी-नाले उफान पर होने के कारण परिजन रविवार को बच्ची को घर नहीं ले जा सके। अगले दिन किसी तरह उसे मेटागुड़ा पहुंचाया गया। घर पहुंचने के बाद बच्ची की तबीयत और बिगड़ गई और सोमवार दोपहर करीब 12 बजे उसकी मौत हो गई। बच्ची की मौत का वास्तविक चिकित्सकीय कारण जांच और चिकित्सकीय रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा।

