Cyber Fraud: साइबर ठगी का तरीका अब बैंक खाते या एटीएम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह आम और खास के मोबाइल तक पहुंच बना चुका है। पत्रिका ने अपनी पड़ताल में पाया कि त्योहारी सीजन में साइबर फ्रॉड सक्रिय हो चुके हैं, ऐसे में आम आदमी को अलर्ट रहने की आवश्यकता है। इस जाल में आम आदमी ही नहीं, जनप्रतिनिधि भी फंस रहे हैं।
कहीं कोरियर पहुंचाने के नाम पर मोबाइल पर आया छह अंकों का कोड पूछा जा रहा है तो कहीं वॉट्सऐप का कंट्रोल लेकर कॉन्टैक्ट लिस्ट में शामिल लोगों को ठगी का निशाना बनाया जा रहा है। त्योहारी सीजन में ऑनलाइन खरीदारी और डिजिटल भुगतान बढ़ने के साथ साइबर ठगों की यह नई चाल पुलिस प्रशासन के लिए भी चुनौती बनी हुई है। पुलिस प्रशासन ने भी लोगों से सोच-समझकर डिजिटल ट्रांजेक्शन करने की अपील की है।
हाइलाइटर
- बीते 2 वर्षों में 475 साइबर ठग गिरफ्तार, इसमें नौकरीपेशा से लेकर पढ़े-लिखे लोग भी शामिल।
- निवेशकों से शेयर मार्केट से जुड़े फर्जी निवेश के नाम पर ठगी।
- कोरियर घर पहुंचने के नाम पर ओटीपी पूछकर ठगी।
- यूपीआई आईडी, ओटीपी, बुकिंग, ऑफर, लकी ड्रॉ, इंश्योरेंस आदि के नाम पर ओटीपी हासिल कर ठगी।
विधायक का मोबाइल हैक, वीडियो शेयर कर दी जानकारी
6 अक्टूबर को धरसींवा विधायक अनुज शर्मा का मोबाइल नंबर हैक होने के बाद उन्होंने मंगलवार को इंस्टाग्राम पर वीडियो शेयर कर इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि उनके नंबर से पैसों की मांग की जा रही है। साथ ही उन्होंने अपने नंबर से आने वाले किसी भी कॉल या मैसेज का जवाब नहीं देने और पैसे न भेजने की अपील की।
केस-1: यूपीआई हैक, खाते से उड़े 90 हजार
गंज थाने के मुताबिक, जेल कॉलोनी निवासी चंद्रकांत सिन्हा के साथ 6 अक्टूबर को 90 हजार रुपए की साइबर ठगी हो गई। प्रकरण के मुताबिक, फोनपे, पेटीएम, यूपीआई आदि एप्लीकेशन काम नहीं करने पर उन्होंने अपना मोबाइल सर्विस सेंटर में बनाने के लिए दिया था। दोबारा एप्लीकेशन डाउनलोड करने पर पता चला कि उनके एसबीआई खाते से 90 हजार रुपए पार हो गए।
केस-2: कहा- कोरियर वाला घर के बाहर खड़ा है, 6 डिजिट का नंबर बताएं
साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक, साइबर ठग अब रैंडम नंबरों पर कॉल कर लोगों को झांसे में ले रहे हैं। ठग फोन कर कहते हैं कि आपके घर के बाहर कोरियर पहुंचा है और उसकी डिलीवरी के लिए आपके मोबाइल पर छह अंकों का पासवर्ड भेजा गया है। जैसे ही व्यक्ति भरोसा कर यह छह अंकों का कोड ठग को बता देता है, उसके वॉट्सऐप अकाउंट का नियंत्रण ठग के हाथ में चला जाता है।
केस-3: रायपुर में कारोबारी डिजिटल अरेस्ट, 44 दिन में 8.50 लाख ठगे
राजधानी में साइबर ठगों ने खुद को ईडी और आईबी का अधिकारी बताकर एक कारोबारी को 44 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा और उससे 8.50 लाख रुपए ठग लिए। ठगों ने कारोबारी को बताया कि उसके नाम से आईसीआईसीआई बैंक में 6.80 करोड़ रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग हुई है। इसके बाद जेल भेजने और परिवार के सदस्यों को आईबी से गिरफ्तार कराने की धमकी देकर लगातार पैसे की मांग करते रहे।
ठगों के दबाव में कारोबारी ने अलग-अलग बैंक खातों में 8.50 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए। रकम जुटाने के लिए उसने अपनी जमा-पूंजी के साथ सोने के जेवर तक बेच दिए। ठग उसे हर घंटे वीडियो कॉल पर उपलब्ध रहने और लगातार अपडेट देने के लिए कहते थे।
निशित अग्रवाल, डीएसपी, रायपुर रेंज, साइबर क्राइम के मुताबिक, त्योहारी सीजन में अलर्ट रहने की जरूरत है। आम नागरिकों को साइबर क्राइम के प्रति स्वयं और दूसरों को जागरूक करना चाहिए। अनजाने ओटीपी और संदिग्ध लेन-देन से बचें। लालच और बहकावे में न आएं। साइबर अपराध होने की स्थिति में 1930 पर कॉल करने के साथ ही तत्काल नजदीकी थाने में सूचित करें।

