Affordable Houses In Rajasthan: जरूरतमंदों को सस्ते मकान उपलब्ध कराने के लिए प्रस्तावित नई सीएम जन आवास योजना में महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए जा रहे हैं। सरकारी भूमि पर आवास निर्माण के लिए निविदा होगी और सबसे कम लागत का प्रस्ताव देने वाले बिल्डर को काम सौंपा जाएगा।
इससे निर्माण लागत घटेगी और लाभ सीधे गरीब आवंटियों को मिलेगा। आवंटी से ली जाने वाली राशि भी बिल्डर को ही दी जाएगी, जिससे प्रक्रिया पारदर्शी बने।
यह बदलाव मौजूदा योजना में सामने आई खामियों के बाद प्रस्तावित किए गए हैं। शिकायतें मिल रही थीं कि गरीबों के नाम पर बने मकान अन्य वर्गों को आवंटित किए जा रहे हैं और कुछ बिल्डर्स प्रावधानों का दुरुपयोग कर रहे हैं। हालांकि, अभी पॉलिसी को अंतिम रूप दिया जाना है। योजना के फाइनल प्रारूप पर जल्द ही आपत्ति-सुझाव मांगे जाएंगे।
बिल्डरों को मिल सकती है छूट, लेकिन निगरानी सख्त
चर्चा है कि बिल्डर अपनी भूमि पर भी गरीबों के लिए मकान बना सकेंगे, लेकिन इसके बदले उन्हें अन्य भू-उपयोग की अनुमति और विभिन्न शुल्कों में छूट देना प्रस्तावित है। हालांकि, नई व्यवस्था में इस प्रक्रिया की निगरानी को और सख्त किया जाएगा।
सभी आवास और आवंटन का डेटा होगा ऑनलाइन
स्वीकृत योजनाओं, निर्मित मकानों और उनके आवंटन की पूरी जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाएगी। यह डेटा प्रस्तावित योजना के नए वेब पोर्टल पर अपलोड होगा। नई योजना में अलग से पोर्टल लॉन्च करने का प्रावधान किया जा रहा है, जिसके जरिए योजना की नियमित मॉनिटरिंग होगी। सभी बिल्डरों को प्रोजेक्ट के लिए आवेदन इसी पोर्टल के जरिए ही मांगने होंगे।
लॉटरी सिस्टम में भी बदलाव का प्रस्ताव
नई योजना में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एक और बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। अब तक कई मामलों में मकानों की लॉटरी बिल्डर स्तर पर निकाली जाती थी, लेकिन नई व्यवस्था में लाॅटरी संबंधित निकाय स्तर पर निकाली जाएगी।
इन पर भी चल रहा विचार
- ईडब्ल्यूएस और एलआइजी वर्ग के लिए बनने वाले मकान ऐसी जगह हों, जहां 500 मीटर के दायरे में बिजली-पानी, परिवहन, स्कूल और अस्पताल जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हों।
- यदि बिल्डर-डवलपर अपने मूल प्रोजेक्ट में आवास या भू-खंड नहीं दे पा रहा है तो उसे स्थानीय निकाय, विकास प्राधिकरण, नगर विकास न्यास की आवासीय योजना में ही जरूरतमंदों के लिए भू-खंड, फ्लैट खरीदकर देने होंगे। दूरदराज इलाकाें में आवास निर्माण नहीं करेंगे।


